नई दिल्ली: भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने बच्चों के आधार में अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट (एमबीयू) को बढ़ाने के लिए नया तरीका अपनाया है। अब व्यवहार विज्ञान (बिहेवियरल इनसाइट्स) की मदद से माता-पिता और बच्चों को अपडेट के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए यूआईडीएआई ने ब्रिटेन की रिसर्च कंपनी बिहेवियरल इनसाइट्स लिमिटेड (बीआईटी) के साथ समझौता किया है। यह कदम 5 साल और 15 साल की उम्र में आधार में फिंगरप्रिंट, आंख की पुतली और फोटो अपडेट को आसान बनाएगा।
फ्री अपडेट, अब जागरूकता की बारी
यूआईडीएआई ने पहले ही 7 से 15 साल के बच्चों के लिए एमबीयू को पूरी तरह मुफ्त कर दिया है। यह सुविधा 1 अक्टूबर 2025 से शुरू हो चुकी है और एक साल तक चलेगी। इससे करीब 6 करोड़ बच्चों को फायदा होगा। लेकिन कई अभिभावक समय पर अपडेट नहीं कराते, जिससे बच्चों को सरकारी योजनाओं, स्कूल दाखिला और अन्य सेवाओं में दिक्कत आती है। अब बीआईटी की मदद से मनोवैज्ञानिक, जागरूकता और लॉजिस्टिक बाधाओं को दूर किया जाएगा।
समझौते पर हस्ताक्षर
समझौता पत्र पर यूआईडीएआई की उप महानिदेशक तनुश्री देब बर्मा और बीआईटी के ग्रुप सीईओ रवि गुरुमूर्ति ने हस्ताक्षर किए। यूआईडीएआई के सीईओ भुवनेश कुमार और नेतृत्व टीम मौजूद रही। कुमार ने कहा कि जब तकनीक इंसानी व्यवहार से जुड़ती है, तब डिजिटल पहचान सिर्फ कागजी प्रक्रिया नहीं रहती, बल्कि भरोसेमंद और सशक्त अनुभव बन जाती है। इस समझौते से हम यही करना चाहते हैं।
नई रणनीतियां, आसान अपडेट
बीआईटी की सीईओ रेचल कोयल ने कहा कि इंसानी व्यवहार की नई समझ से आधार अपडेट बढ़ेगा और लोग जरूरी सरकारी सेवाओं तक आसानी से पहुंच सकेंगे। अब विशेष व्यवहारिक हस्तक्षेप (इंटरवेंशन) तैयार किए जाएंगे। जैसे, एसएमएस याद दिलाना, स्थानीय भाषा में जागरूकता, आसपास केंद्रों की जानकारी, स्कूलों के जरिए प्रोत्साहन आदि। इनकी टेस्टिंग होगी और सफल तरीकों को बड़े स्तर पर लागू किया जाएगा।
क्यों जरूरी है समय पर अपडेट?
बच्चे जब आधार बनवाते हैं, तब उनकी उम्र छोटी होती है। 5 साल और 15 साल की उम्र में शरीर में बदलाव आता है, इसलिए बायोमेट्रिक अपडेट जरूरी है। पुराने डेटा से पहचान सत्यापन में दिक्कत आती है। समय पर अपडेट न होने से बच्चे स्कॉलरशिप, बैंक खाता, मोबाइल सिम, परीक्षा फॉर्म आदि में अटक जाते हैं। यूआईडीएआई लगातार कोशिश कर रहा है कि कोई बच्चा इस कारण वंचित न रहे।
मुफ्त सुविधा का फायदा
7-15 साल के बच्चों के लिए अपडेट फ्री होना बड़ी राहत है। पहले इसके लिए शुल्क देना पड़ता था। अब अभिभावक बिना खर्च के नजदीकी आधार केंद्र पर जाकर अपडेट करा सकते हैं। UIDAI का मानना है कि शुल्क माफ करने से अड़चन कम हुई, लेकिन जागरूकता और सुविधा की कमी अब भी बाधा है। यही कमी व्यवहार विज्ञान से पूरी की जाएगी।
आगे की राह
यह पहल डिजिटल इंडिया को और मजबूत बनाएगी। जब बच्चे का आधार सही रहेगा, तभी वह डिजिटल सेवाओं का पूरा लाभ ले सकेगा। यूआईडीएआई और बीआईटी मिलकर न सिर्फ अपडेट बढ़ाएंगे, बल्कि लोगों का भरोसा भी जीतेंगे। आने वाले महीनों में पायलट प्रोजेक्ट शुरू होंगे और सफलता के आधार पर पूरे देश में लागू किया जाएगा।



