नई दिल्ली: टमाटर तो हमारी थाली का स्टार है न? सलाद से लेकर सब्जी तक, इसकी चटक लाल चमक न सिर्फ भोजन को रंगीन बनाती है, बल्कि लाइकोपीन जैसे तत्व स्वास्थ्य को भी मजबूत करते हैं। लेकिन सोचा कभी, आखिर ये लाल रंग कहां से आता है? कुछ टमाटर पीले-पीले क्यों हो जाते हैं, जैसे कोई जादू हो गया हो? चीन के शंघाई जियाओ टोंग यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स ने अब इस पहेली को सुलझा लिया है। उनकी खोज बताती है कि टमाटर के रंग का खेल एक ही जीन YFT3 की छोटी-मोटी गड़बड़ी से चलता है। ये खोज न सिर्फ वैज्ञानिक दुनिया में हलचल मचा रही है, बल्कि किसानों और न्यूट्रिशन एक्सपर्ट्स के लिए भी नई उम्मीद जगाती है। आइए, इस रहस्य की परतें खोलते हैं।
कैरोटीनॉयड: रंगों का जादूगर
टमाटर के लाल, नारंगी या पीले शेड्स का राज तो कैरोटीनॉयड नाम के नैचुरल पिगमेंट्स में छिपा है। ये पिगमेंट्स पौधों के अंदर एक जटिल केमिकल प्रोसेस – आइसोप्रेनॉइड पाथवे – से तैयार होते हैं। इस चेन में दो क्रूशियल बिल्डिंग ब्लॉक्स होते हैं:
- IPP (आइसोपेंटेनिल पाइरोफॉस्फेट)
- DMAPP (डाइमिथाइलैलिल पाइरोफॉस्फेट)
इन दोनों को बैलेंस में रखने का जिम्मा एक स्पेशल एंजाइम का है, जिसे IDI1 कहते हैं। ये एंजाइम ही सुनिश्चित करता है कि IPP और DMAPP का रेशियो सही रहे, ताकि कैरोटीनॉयड्स बिना रुके बनते रहें। बिना इसके, सब कुछ उल्टा-पुल्टा हो जाता है!
YFT3 जीन: रंग का असली बॉस
रिसर्चर्स ने पाया कि YFT3 जीन ही IDI1 एंजाइम को ‘कंस्ट्रक्ट’ करने का ब्लूप्रिंट देता है। लेकिन अगर इस जीन में हल्का सा ट्विस्ट आ जाए। यानी म्यूटेशन, तो एंजाइम फेल हो जाता है। स्टडी में उन्होंने एक रेयर वैरायटी के पीले टमाटर पर फोकस किया। टेस्टिंग से पता चला कि यहां YFT3 के 2117वें न्यूक्लियोटाइड में ‘A’ से ‘C’ का स्वैप हो गया था। नतीजा? एंजाइम के 126वें अमीनो एसिड में सीरीन की जगह आर्गिनिन घुस आया। ये छोटा सा चेंज? ये तो बम फटने जैसा था। नॉर्मल केस में सीरीन एंजाइम के एक्टिव साइट को स्टेबल रखता है और मैग्नीशियम आयनों को कसकर पकड़ता है। लेकिन आर्गिनिन आने से एंजाइम की शेप ही बिगड़ जाती है। मैग्नीशियम लूज हो जाता है, प्रोसेस रुक जाता है। IPP-DMAPP का बैलेंस गड़बड़ा, कैरोटीनॉयड प्रोडक्शन स्लो डाउन और लाइकोपीन की कमी से टमाटर का लाल रंग फीका पड़कर पीला हो जाता है।
लैब में साइंस का कमाल
टीम ने हाई-टेक टूल्स जैसे मैप-बेस्ड क्लोनिंग, मॉलिक्यूलर चेकअप्स और इन-विवो टेस्टिंग का सहारा लिया। रिजल्ट? जब हेल्दी YFT3 जीन को पीले टमाटर में इंजेक्ट किया, तो वो चमकदार लाल हो गया! उल्टा, CRISPR टूल से नॉर्मल टमाटर के YFT3 को डिसेबल किया तो वो भी पीला पड़ गया।
मजेदार ट्विस्ट?
जब YFT3 की एक्टिविटी कम हुई, तो प्लांट ने काउंटर अटैक किया है। DXS, DXR, HDR, PSY1, CRTISO, CYCB, CYP97A और NCED जैसे दूसरे कैरोटीनॉयड जीनों को ज्यादा एक्सप्रेस किया। लेकिन ये ट्राई फेल हो गई, क्योंकि प्रॉब्लम एंजाइम की स्ट्रक्चर में थी, न कि जीन काउंट में। इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी से ये भी क्लियर हुआ कि म्यूटेंट टमाटर में क्रोमोप्लास्ट्स (पिगमेंट स्टोरेज ऑर्गेनेल्स) ठीक से डेवलप ही नहीं हो पाते।
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क्यों है ये खोज गेम-चेंजर?
ये सिर्फ टमाटर की कलर स्टोरी नहीं, बल्कि प्लांट बायोकेमिस्ट्री का नया चैप्टर है। स्टडी के लीड रिसर्चर कहते हैं, एक सिंगल अमीनो एसिड चेंज से फल का लुक, न्यूट्रिशन और सेल स्ट्रक्चर सब बदल जाता है। ये बताता है कि एंजाइम्स का बैलेंस कितना डेलिकेट है। फ्यूचर में, ये नॉलेज से किसान ज्यादा लाइकोपीन-रिच, कलरफुल टमाटर उगा सकेंगे। जीन एडिटिंग या सिलेक्टिव ब्रीडिंग से YFT3 जैसे जीन ट्वीक करके, हम हेल्दी, टेस्टी और मार्केट-फ्रेंडली फसलें क्रिएट कर सकते हैं। ‘हॉर्टिकल्चर रिसर्च’ जर्नल में पब्लिश्ड ये पेपर साबित करता है कि छोटी जेनेटिक चूक का असर कितना गहरा हो सकता है। टमाटर का रंग, जीन म्यूटेशन, लाइकोपीन बेनिफिट्स ये टॉपिक्स अब ट्रेंडिंग सर्चेस में छाए रहेंगे। क्या पता, अगली बार सलाद खाते वक्त आप भी इस साइंस को सोचें! क्या आपकी फेवरेट वैरायटी लाल है या कुछ और? कमेंट्स में बताएं।



