नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सोमवार को दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) की प्रत्येक कक्षा में ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन को एक ‘शक्तिशाली’ परंपरा के रूप में स्थापित करने और इसे एक जन आंदोलन के रूप में विकसित करने की अपील की। वंदे मातरम् की 150वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में दिल्ली विश्वविद्यालय के रामजस कॉलेज में आयोजित एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए धर्मेंद्र प्रधान कहा कि राष्ट्र गीत एक विकसित और समृद्ध भारत के निर्माण में मार्गदर्शक का काम करेगा।
वंदे मातरम् गाएं और इसकी भावना के वाहक बनें
प्रधान ने कहा, दिल्ली विश्वविद्यालय में हमारे युवा साथी वंदे मातरम् का पूर्ण संस्करण गाएं और इसकी भावना के वाहक बनें। विश्वविद्यालय वंदे मातरम् की शाश्वत भावना को एक जन आंदोलन में बदलने और इससे भावी पीढ़ियों को जोड़ने में एक प्रमुख भूमिका निभाएगा। विश्वविद्यालय की प्रत्येक कक्षा में वंदे मातरम के सामूहिक गायन को एक शक्तिशाली परंपरा के रूप में स्थापित किया जाए, तभी यह एक जन आंदोलन के रूप में विकसित होगा। उस समय, हमने स्वतंत्रता के लिए वंदे मातरम् गाया था, आज वंदे मातरम् एक विकसित और समृद्ध भारत के निर्माण में हमारे मार्गदर्शक के रूप में काम करेगा।
वंदे मातरम’ की रचाना अक्षय नवमी, सात नवंबर 1875 को हुई थी
उन्होंने कहा, ‘‘लंबे संघर्षों और अनगिनत राष्ट्र-सेवकों के बलिदान के बाद, हमें 1947 में स्वतंत्रता मिली, वंदे मातरम् उस राष्ट्रीय चेतना का उद्घोष था जिसने पूरे देश को एक सूत्र में पिरोया।’’ केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, बंकिम चंद्र चटर्जी द्वारा रचित ‘वंदे मातरम’ अक्षय नवमी के शुभ अवसर पर लिखा गया माना जाता है, जो सात नवंबर 1875 को पड़ी थी।
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डीयू में साल भर “वंदे मातरम” पर कार्यक्रमों होंगे
डीयू कुलपति प्रो. योगेश सिंह ने कहा कि “वंदे मातरम” 150 वर्ष का हो गया है। ये 150 वर्ष कैसे रहे! ये वर्ष राष्ट्रीय चेतना के वर्ष, बदलते भारत के वर्ष, अंधेरे से उजाले के वर्ष, अंग्रेजों से छुटकारे के वर्ष और भारत के संघर्ष के वर्ष रहे हैं। भारत की इन ये 150 वर्ष की जो संघर्ष की यात्रा रही है, “वंदे मातरम” उसका उद्घोष रहा है। उसने प्रेरणा का काम किया, जगाने का काम किया और मन को आगे बढ़ाने का काम किया है। कुलपति ने डीयू के इस कार्यक्रम में आने के लिए केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का आभार प्रकट किया। इस अवसर पर उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारत सरकार का आभार प्रकट करते हुए कहा कि उन्होंने इस कालजयी गीत को भारत के मनों के नजदीक लाने का काम किया है। कुलपति ने कहा कि “वंदे मातरम” राष्ट्र प्रेम की भावना है और राष्ट्र भक्ति का मंत्र है। डीयू में साल भर “वंदे मातरम” पर कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। इस दौरान डीयू के सभी कॉलेजों में कार्यक्रम आयोजित होंगे। इस कार्यक्रम के दौरान रामजस कॉलेज के प्रिंसिपल प्रो. अजय अरोड़ा और वाइस प्रिंसिपल प्रो. रुचिका वर्मा सहित अनेकों कॉलेजों के प्रिंसिपल, डीयू के अधिकारी, शिक्षक और अनेकों विद्यार्थी उपस्थित रहे।



