नई दिल्ली: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ यानी आरएसएस के सरसंघचालक मोहन भागवत को बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि भारत की आत्मा हिंदू संस्कृति है। संघ सत्ता के लिए नहीं काम करता है। संघ का उद्देश्य समाज की सेवा करना और संगठन के लिए काम करना है। भगवत ने ये बातें बेंगलुरु में आयोजित कार्यक्रम ‘100 साल का संघ: नए क्षितिज’ के दौरान कही।
जिम्मेदारी हिंदुओं की
भागवत ने कार्यक्रम में कहा कि भारत में सब हिंदू है। यहां के सभी मुस्लिम और ईसाई हिंदू पूर्वजों के वंशज हैं। शायद वो भूल गए हैं या फिर उन्हें भुला दिया गया है। यहां कोई अहिंदू नहीं है। लोग पूछते हैं कि संघ सिर्फ हिंदू समाज के लिए क्यों काम। तो जवाब साफ़ है कि भारत की जिम्मेदारी हिंदुओं की है।
अंग्रजों की देन नहीं भारत
उन्होंने कहा कि हमारा राष्ट्र अंग्रेजों की देन नहीं है। हम सदियों से एक राष्ट्र रहे हैं। दुनिया के हर देश की एक अनूठी संस्कृति होती है। भारत की मूल संस्कृति क्या है? कोई भी परिभाषा अंततः “हिंदू” शब्द पर आकर रुकती है। प्रत्येक हिंदू को यह समझना चाहिए कि हिंदू होने का अर्थ है भारत के प्रति जिम्मेदारी लेना।
भारत की प्रगति सनातन में
आरएसएस प्रमुख ने कहा कि जब हिंदू समाज पूरी ताकत में होता है, तब वह समूचे विश्व को जोड़ने की क्षमता रखता है। सनतान ही हिंदू राष्ट्र है और सनातन की प्रगति भारत की प्रगति है। भारत का हिंदू राष्ट्र होना संविधान के खिलाफ नहीं बल्कि उसके अनुरूप है।
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सत्ता नहीं चाहिए
भागवत ने कहा, “संघ को सत्ता या प्रमुखता नहीं चाहिए। संघ का एकमात्र उद्देश्य समाज को संगठित करना और भारत माता की महिमा को बढ़ाना है। पहले लोग इस पर विश्वास नहीं करते थे, लेकिन अब करते हैं।”



