नई दिल्ली: भारतीय हॉकी (Indian Hockey) के शानदार इतिहास को सम्मान देते हुए शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित मेजर ध्यानचंद राष्ट्रीय स्टेडियम (Major Dhyan Chand Stadium) में 100 वर्ष पूरे होने का भव्य समारोह आयोजित किया गया। यह जश्न न केवल भारतीय खेल जगत के स्वर्णिम अध्याय का प्रतीक था, बल्कि उन दिग्गज खिलाड़ियों को श्रद्धांजलि भी, जिन्होंने इस खेल को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया।
दिग्गज खिलाड़ियों का हुआ सम्मान
इस अवसर पर ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता गुरबख्श सिंह और असलम शेर खान समेत कई दिग्गज मौजूद रहे। हॉकी इंडिया ने उन खिलाड़ियों को सम्मानित किया जिन्होंने दशकों तक भारतीय हॉकी को पहचान दिलाई और आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित किया। सम्मानित हस्तियों में हरबिंदर सिंह, अजित पाल सिंह, अशोक कुमार, बी.पी. गोविंदा, जफर इकबाल, ब्रिगेडियर हरचरण सिंह, मीर रंजन नेगी, रोमियो जेम्स, असुंता लाकड़ा और सुभद्रा प्रधान शामिल थे।
खेल जगत और राजनीति के दिग्गज भी हुए शामिल
कार्यक्रम में केंद्रीय खेल मंत्री मनसुख मंडाविया (Mansukh Mandaviya), केंद्रीय मंत्री किरण रिजिजू और तमिलनाडु के उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने भी शिरकत की। उन्होंने भारतीय हॉकी की ऐतिहासिक यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि हॉकी भारत की खेल संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और इसने विश्व पटल पर देश की प्रतिष्ठा को ऊंचा किया है।
मंडाविया ने कहा, “हॉकी ने भारत को ओलंपिक में स्वर्णिम गौरव दिलाया और यह खेल हमारी खेल भावना और अनुशासन का प्रतीक है।”
प्रदर्शनी मैच से हुई शुरुआत
शताब्दी समारोह की शुरुआत एक प्रदर्शनी मैच से हुई, जिसमें खेल मंत्री एकादश और हॉकी इंडिया एकादश आमने-सामने थीं। इस रोमांचक मुकाबले में खेल मंत्री एकादश ने 3-1 से जीत दर्ज की। विजेता टीम के लिए ब्यूटी डुंगडुंग, सलीमा टेटे और कृष्णा पाठक ने गोल किए, जबकि मनप्रीत सिंह ने हॉकी इंडिया टीम की ओर से एकमात्र गोल दागा।
इस मैच में पुरुष और महिला दोनों राष्ट्रीय टीमों के खिलाड़ी शामिल हुए, जिसने समारोह को और विशेष बना दिया।
हॉकी के इतिहास की झलक
कार्यक्रम के दौरान ‘भारतीय हॉकी के 100 वर्ष’ शीर्षक से एक स्मारक पुस्तक का विमोचन किया गया, जिसमें हॉकी के स्वर्णिम इतिहास, दिग्गज खिलाड़ियों की उपलब्धियों और खेल के विकास की कहानी को दर्ज किया गया है।
इसके साथ ही एक विशेष फोटो प्रदर्शनी भी लगाई गई, जिसमें 1928 के एम्स्टर्डम ओलंपिक में भारत के पहले स्वर्ण पदक से लेकर आधुनिक युग के पुनरुत्थान तक की यादगार झलकियां प्रदर्शित की गईं।
दिलीप तिरकी हुए भावुक
हॉकी इंडिया के अध्यक्ष दिलीप तिरकी (Dilip Tirkey) ने कहा कि ध्यानचंद स्टेडियम में लौटना उनके लिए बेहद भावुक अनुभव रहा क्योंकि यहीं से उनकी हॉकी यात्रा की शुरुआत हुई थी। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि यह आयोजन खिलाड़ियों की मेहनत, समर्पण और देश के खेल इतिहास की महान विरासत को सलाम करने का मौका है।
कार्यक्रम में एफआईएच हॉकी पुरुष जूनियर विश्व कप 2025 ट्रॉफी (FIH Junior World Cup 2025) का भी प्रदर्शन किया गया, जिसने समारोह की शोभा बढ़ा दी।
भारतीय हॉकी के इस शताब्दी समारोह ने न केवल बीते 100 सालों की गौरवगाथा को याद किया, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक नई प्रेरणा भी दी कि खेल केवल मैदान की जीत नहीं, बल्कि देश की पहचान का प्रतीक होता है।



