नई दिल्ली: बिहार की राजनीति में बड़ा नाटकीय मोड़ देखा जा रहा है। जेल से रिहा होने के बाद चुनाव लड़ने का ऐलान करने वाले अनंत सिंह फिर गिरफ्तार हो गए हैं। इस गिरफ़्तारी के बाद से मोकामा का समीकरण बदल गया है। पत्नी को पीछे करके अनंत सिंह ने इस बार चुनाव लड़ने का ऐलान किया था लेकिन अब उनकी राजनीतिक विरासत बचाने की जिम्मेदारी फिर से पत्नी नीलम देवी के कंधे पर आ गया है।
मोर्चा संभालेंगी नीलम
अनंत सिंह की अनुपस्थिति में यह तो तय हो गया है कि नीलम देवी अब मैदान में आकर मोर्चा संभालेंगी। नीलम देवी के लिए राजनीति नई चीज नहीं है। जब छोटे सरकार जेल गए तो नीलम देवी घर से निकलीं और न सिर्फ लोकसभा बल्कि विधानसभा तक का सफर तय किया। उन्होंने मोकामा की राजनीति और अनंत सिंह का पूरा बिजनेस संभाला। अब एक बार फिर से नीलम देवी मोकामा में पति के लिए वोट मांगती दिखाई देंगी।
राजनीतिक करियर
नीलम देवी की राजनीतिक करियर की बात करें तो 2019 के लोकसभा चुनाव में वो कांग्रेस की प्रत्याशी थीं। मुंगेर में जदयू के ललन सिंह के खिलाफ ताल ठोका लेकिन हार गईं। उन्हें 3.60 लाख वोट मिला था। 2022 में अनंत सिंह को UAPA मामले में 10 साल की सजा हुई तो उनकी विधानसभा सदस्यता चली गई। जेल में बैठे-बैठे अनंत सिंह ने न सिर्फ अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाया बल्कि जीत भी दिलाई। भाजपा की सोनम देवी को हराकर नीलम देवी विधानसभा पहुंचीं।
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मोकामा की सड़कों पर नीलम देवी
2025 का विधानसभा चुनाव अनंत सिंह खुद लड़ रहे थे। उनका कहना था कि उनकी पत्नी नीलम देवी ने सही से काम नहीं किया था। जनता से मिली-जुली भी नहीं थी। अब अनंत सिंह की गिरफ़्तारी के बाद नीलम देवी फिर से मोकामा की सड़कों पर दिखाई देंगीं।



