नई दिल्ली: जल जीवन मिशन ने ग्रामीण भारत में पानी की तस्वीर बदल दी है। 22 अक्टूबर 2025 तक, 15.72 करोड़ से अधिक ग्रामीण परिवारों को नल से स्वच्छ पानी मिल रहा है। 2019 में शुरू हुए इस मिशन ने केवल 3.23 करोड़ घरों से शुरुआत की थी, लेकिन अब 12.48 करोड़ अतिरिक्त घरों को नल कनेक्शन मिल चुका है। यह भारत के सबसे तेज बुनियादी ढांचे के विस्तार में से एक है। ₹2.08 लाख करोड़ के केंद्रीय बजट से समर्थित इस मिशन ने 81% ग्रामीण घरों तक सुरक्षित पेयजल पहुंचाया है।
महिलाओं और समुदायों का सशक्तिकरण
यह मिशन सिर्फ पानी देने तक सीमित नहीं है। इसने महिलाओं को पानी लाने की मेहनत से मुक्ति दी, जिससे उनका समय बचा और स्वास्थ्य, शिक्षा व रोजगार के अवसर बढ़े। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, स्वच्छ पानी से हर साल 4 लाख मौतें और 14 मिलियन डीएएलवाई (विकलांगता-समायोजित जीवन वर्ष) रोके जा सकते हैं। 24.80 लाख महिलाओं को जल गुणवत्ता परीक्षण के लिए प्रशिक्षित किया गया और 2,843 प्रयोगशालाओं ने 38.78 लाख नमूनों की जांच की।
सामुदायिक भागीदारी और स्थिरता
मिशन सामुदायिक भागीदारी पर जोर देता है। महाराष्ट्र के म्हापन गांव में महिलाएं जल योजना का प्रबंधन करती हैं, जिससे ₹1.70 लाख की आय हुई। नागालैंड के वोखा में ग्रामीणों ने जल संरक्षण के लिए खाइयां और पेड़ लगाए। राजस्थान के बोथरा गांव में चेक डैम से जल स्तर 70 फीट बढ़ा। 192 जिलों, 1,912 ब्लॉकों और 2.66 लाख गांवों ने पूर्ण कवरेज हासिल की। 11 राज्यों ने 100% लक्ष्य पूरा किया।
डिजिटल नवाचार और भविष्य
पश्चिम बंगाल का ‘जल मित्र’ ऐप जल प्रबंधन में पारदर्शिता लाया है। जीआईएस मैपिंग और डिजिटल डैशबोर्ड से योजनाओं की निगरानी आसान हुई। मिशन ने 3 करोड़ व्यक्ति-वर्ष रोजगार सृजित किए। यह ग्रामीण भारत में स्वास्थ्य, सम्मान और समृद्धि की नई कहानी लिख रहा है।



