शांति वार्ता या जंग का ऐलान? अफगान सीमा पर फिर भड़का पाकिस्तान

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच सीमा तनाव बढ़ता जा रहा है। इस्तांबुल में चल रही शांति वार्ता पर सभी की नजरें हैं, क्योंकि इसकी असफलता से हालात युद्ध की ओर बढ़ सकते हैं।

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नई दिल्ली: पाकिस्तान और अफगानिस्तान (Pakistan-Afghanistan War) के बीच जारी सीमा तनाव एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर पहुंच गया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ (Khawaja Asif) ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि अगर इस्तांबुल में चल रही शांति वार्ता विफल (Istanbul Peace Talks) रही, तो पाकिस्तान काबुल के खिलाफ खुला युद्ध शुरू कर सकता है। यह बयान उस समय आया है जब दोनों देशों के बीच हाल ही में सीमा पर झड़पें और संघर्षविराम उल्लंघन बढ़ गए थे।

TOLO न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, इन वार्ताओं का उद्देश्य सीमा पर शांति बहाल करना और दोहा समझौते के पालन को सुनिश्चित करना है। आसिफ ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में सीमा पर कोई नई झड़प नहीं हुई, जिससे समझौते का असर कुछ हद तक देखने को मिला है। हालांकि, अफगान सरकार ने उनके इस बयान पर अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं दी है।

तुर्किये में दूसरे दौर की बातचीत शुरू

इस्तांबुल में चल रही बातचीत का दूसरा चरण इस समय सुर्खियों में है। दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडल तुर्किये की मध्यस्थता में शामिल हैं, और चर्चा का फोकस चार अहम मुद्दों पर है—

  • सीमा पर संयुक्त निगरानी प्रणाली बनाना,
  • एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान सुनिश्चित करना,
  • पाकिस्तान की सुरक्षा चिंताओं के मूल कारणों पर चर्चा,
  • और व्यापारिक प्रतिबंधों को हटाना।

आसिफ ने कहा कि इस समय सीमा पर शांति बनी हुई है, लेकिन अगर वार्ता असफल होती है, तो हालात “तेजी से बिगड़ सकते हैं।” यह बैठक अक्टूबर में हुई पहली बातचीत का फॉलोअप है, जिसमें कतर और तुर्किये ने मिलकर मध्यस्थता की थी।

पाकिस्तान का तर्क और शरणार्थियों का दर्द

पाकिस्तान का दावा है कि वह दशकों से अफगानिस्तान की मदद करता आया है और लाखों शरणार्थियों को शरण दी है। लेकिन हाल ही में पाकिस्तानी बलों ने बलूचिस्तान के कई अफगान शरणार्थी शिविरों को खाली करवाया। इनमें लोरालई, गार्डी जंगल, सारनान, झोब, कलात-ए-सैफुल्लाह, पिशिन और मुस्लिम बाग शामिल हैं। शरणार्थियों का कहना है कि उन्हें अचानक बाहर निकाला गया और अपने सामान तक समेटने का मौका नहीं मिला। इस कदम की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मानवीय आलोचना हो रही है।

तालिबान से पाकिस्तान की मांग

तनाव की जड़ में पाकिस्तान की यह मांग है कि तालिबान सरकार उन उग्रवादियों को रोके, जो अफगान भूमि से पाकिस्तान पर हमले कर रहे हैं। पाकिस्तान का आरोप है कि ये हमले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के आतंकियों द्वारा किए जा रहे हैं। जवाब में पाकिस्तान ने सीमा पार हवाई हमले किए, जिससे दोनों देशों के बीच भारी गोलीबारी हुई और कई लोगों की जान गई।

तालिबान का इनकार और शांति का दावा

दूसरी ओर, तालिबान अधिकारियों ने पाकिस्तान के आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि अफगानिस्तान की भूमि किसी भी देश के खिलाफ इस्तेमाल नहीं हो रही और “इस्लामिक अमीरात” किसी भी पड़ोसी देश के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देता। तालिबान ने दावा किया है कि वह क्षेत्रीय शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध है।

इस्तांबुल में चल रही शांति वार्ता दोनों देशों के बीच तनाव कम करने का अंतिम अवसर मानी जा रही है। अगर यह बातचीत विफल होती है, तो स्थिति पूरी तरह से सैन्य टकराव में बदल सकती है, जिसका असर न सिर्फ दक्षिण एशिया बल्कि वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य पर भी पड़ेगा।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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