आरा (भोजपुर): विधानसभा चुनाव के बीच राज्य के कर्मचारी संगठनों की सक्रियता बढ़ गई है। माना जा रहा है कि इस बार चुनाव में सरकारी कर्मचारियों और उनके परिजनों की भूमिका निर्णायक रहने वाली है। इसी क्रम में अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ ने चुनाव प्रचार के लिए बिहार आ रहे प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों से कई तीखे सवाल पूछते हुए शीघ्र जवाब देने का आग्रह किया है।
महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुभाष लांबा ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा 16 जनवरी 2025 को किए गए आठवें वेतन आयोग (8th Pay Commission) की घोषणा के बावजूद अब तक अधिसूचना जारी नहीं की गई है। उन्होंने पूछा, ‘क्या यही घोषणा की गारंटी है?’ इसके साथ ही उन्होंने 2014 के वादे के अनुसार हर साल दो करोड़ नौकरियां न देने, पुरानी पेंशन स्कीम (OPS) बहाल न करने और कोरोना काल में फ्रीज किए गए 18 महीने के डीए–डीआर को रिलीज न करने जैसे मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगा।
PM समेत केंद्रीय मंत्री क्यों ले रहे OPS
लांबा ने सवाल किया कि अगर ओपीएस (OPS) हानिकारक है तो प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, सांसद और विधायक स्वयं इसे क्यों ले रहे हैं? उन्होंने संविदा कर्मियों को नियमित करने, सार्वजनिक उपक्रमों के निजीकरण पर रोक लगाने और आंगनबाड़ी, आशा व मिड-डे मील कर्मियों को सरकारी कर्मचारी का दर्जा देने की भी मांग उठाई। साथ ही कहा कि कर्मचारियों एवं मजदूरों के विरोध के बावजूद 29 श्रम कानून खत्म कर चार लेबर कोड क्यों बनाए गए?
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तेजस्वी की घोषणा का स्वागत
महासंघ ने महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी तेजस्वी यादव द्वारा संविदा कर्मियों को नियमित करने की घोषणा का स्वागत किया और एनडीए से भी इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।
वहीं, बिहार अराजपत्रित राज्य कर्मचारी महासंघ के महासचिव सुबेश सिंह और अध्यक्ष नीलम कुमारी ने बताया कि संगठन शीघ्र ही सभी राजनीतिक दलों के प्रमुखों को कर्मचारियों की लंबित मांगों का ज्ञापन सौंपेगा। उन्होंने कहा कि ‘राज्य कर्मचारी दलों के रुख और पीएम व मंत्रियों के जवाब के बाद ही अपने विवेक से मतदान का निर्णय लेंगे।’ राज्य के लाखों कर्मचारियों और उनके परिजनों की नजर अब राजनीतिक दलों के जवाब और घोषणाओं पर टिकी हुई है।



