नई दिल्ली: ब्रिटेन के प्रतिष्ठित बुकर प्राइज फाउंडेशन ने 8 से 12 साल के बच्चों के लिए ‘चिल्ड्रन्स बुकर प्राइज’ शुरू करने की घोषणा की है। यह नया पुरस्कार 2027 में पहली बार दिया जाएगा, जिसमें विजेता को 50,000 पाउंड की पुरस्कार राशि मिलेगी। यह कदम बच्चों की रचनात्मकता को प्रोत्साहित करने और साहित्य के प्रति उनकी रुचि बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास है।
क्या है चिल्ड्रन्स बुकर प्राइज?
यह पुरस्कार विशेष रूप से उन बच्चों के लिए है, जो छोटी उम्र में कहानियां लिखने का जुनून रखते हैं। इसमें दुनिया भर के बच्चे हिस्सा ले सकेंगे, बशर्ते उनकी किताब अंग्रेजी में लिखी या अनुवादित हो और यूके या आयरलैंड में प्रकाशित हो। फाउंडेशन का मकसद बच्चों को साहित्य की दुनिया से जोड़ना और उनकी कल्पनाशीलता को सम्मान देना है। यह पुरस्कार बच्चों को लेखन के क्षेत्र में प्रेरित करेगा और प्रकाशकों को बेहतर बाल साहित्य के लिए प्रोत्साहित करेगा।
जूरी और पुरस्कार राशि
चिल्ड्रन्स बुकर प्राइज की खासियत यह है कि इसकी जूरी में बच्चे और वयस्क दोनों शामिल होंगे। इससे बच्चों की कहानियों को उनके नजरिए से समझा और आंका जाएगा। जूरी की अगुवाई मशहूर ब्रिटिश लेखक और चिल्ड्रन्स लॉरेट फ्रैंक कॉटरेल बॉयस करेंगे, जो बच्चों के लिए लिखी कहानियों के लिए जाने जाते हैं। विजेता को 50,000 पाउंड (लगभग 55 लाख रुपये) की राशि मिलेगी, जो युवा लेखकों के लिए एक बड़ी प्रेरणा होगी।
कब शुरू होगी प्रक्रिया?
इस पुरस्कार के लिए एंट्री 2026 की शुरुआत में खुलेंगी। किताबों का चयन और समीक्षा लगभग एक साल तक चलेगी, और पहला अवॉर्ड 2027 में प्रदान किया जाएगा। यह न केवल बच्चों के लिए प्रेरणादायक है, बल्कि साहित्य जगत में नए अवसर भी लाएगा।
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बुकर की गौरवशाली परंपरा
1969 में शुरू हुआ बुकर प्राइज विश्व का सबसे सम्मानित साहित्यिक पुरस्कार है। सलमान रुश्दी, अरुंधति रॉय जैसे लेखकों ने इसे जीता है। हाल ही में भारतीय लेखिका बानू मुश्ताक ने अपनी कन्नड़ किताब ‘हार्ट लैंप’ के लिए इंटरनेशनल बुकर प्राइज जीता, जिसका अनुवाद दीपा भष्ठी ने किया। अब बच्चों के लिए यह नया अवॉर्ड भारतीय युवा लेखकों के लिए भी एक सुनहरा मौका हो सकता है।



