नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को एक अहम घोषणा करते हुए कहा कि भारत अब नक्सलवाद और माओवादी हिंसा के दौर से बाहर निकलने की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है। उन्होंने आश्वस्त किया कि वह दिन अब दूर नहीं जब देश इस आतंकी चुनौती से पूरी तरह मुक्त हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने इसे अपनी “गारंटी” करार दिया और कहा कि सरकार की नीतियों और प्रयासों से नक्सली गतिविधियों में भारी गिरावट आई है। इस बार माओवादी आतंक से मुक्त क्षेत्रों में दीवाली की रौनक कुछ और होने जा रही है। 50 55 साल हुए दिवाली नहीं देखी थी उन्होंने। अब दिवाली देखेंगे।
प्रधानमंत्री ने बताया कि नक्सलवाद ने वर्षों तक भारत के कई हिस्सों को हिंसा, अस्थिरता और पिछड़ेपन की ओर धकेल दिया था। खासकर आदिवासी और ग्रामीण क्षेत्रों में विकास की गति थम सी गई थी। केंद्र में भाजपा की सरकार ने 2014 से लगातार इस चुनौती से निपटने के लिए दोतरफा रणनीति अपनाई है। एक तरफ सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई और दूसरी ओर विकास की रफ्तार तेज करना।
पीएम मोदी ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस के शासन में जो अर्बन नक्सलों का जो इकोसिस्टम है… ये जो अर्बन नक्सल्स है… वो कुछ इस कदर हावी थे। आज भी हैं, कि माओवादी आतंक का कोई भी घटना देश के लोगों तक न पहुंचे इसके लिए वो बहुत बड़ी सेंसरशिप चलाते रहते हैं वो। देश में आतंकवाद की इतनी चर्चा होती थी। आर्टिकल 370 पर डिबेट होती थी। लेकिन हमारे शहरों में जो कांग्रेस के राज में पनपे हुए अर्बन नक्सली बैठे थे…जो ऐसी संस्थानों पर कब्जा करके बैठे थे…वो माओवादी आतंक पर पर्दा डालने का काम करते थे। देश को अंधेरे में रखते थे।
माओवादी आतंक के कई पीड़ित दिल्ली आए थे
अभी कुछ दिन पहले भी माओवादी आतंक के कई पीड़ित दिल्ली आए थे। ये बड़ी दर्दनाक चीज है। बहुत बड़ी मात्रा में आए थे। किसी की टांग नहीं थी, किसी का हाथ नहीं था, किसी की आंख नहीं थी….शरीर के अंग कुछ चले गए थे। ये माओवादी आतंक के शिकार लोग थे। गांव के गरीब, आदिवासी, भाई बहन, किसान के बेटे थे। माताएं बहने थी, दो दो पैर कट चुके थे। वो दिल्ली में आए थे, 7 दिन रहे…हाथ पैर जोड़ के कह रहे थे कि हमारी बात हिंदुस्तान के लोगों तक पहुंचाइए ….प्रेस कॉन्फ्रेंस किया उन्होंने, आप में से किसी ने देखा नहीं होगा सुना नहीं होगा।
ये माओवादी आतंक के ठेकेदार जो बैठे हैं ना उन्होंने उस जुल्म के शिकार हुए, उनके दर्द की कथा भी हिंदुस्तान के लोगों तक नहीं पहुंचने दी।
कांग्रेस के इकोसिस्टम ने इसकी बहुत चर्चा ही नहीं होने दी
हालात ऐसे थे कि देश का करीब-करीब हर बड़ा राज्य नक्सली हिंसा..माओवादी आतंक की चपेट में था। बाकी देश में संविधान लागू था…लेकिन रेड कॉरिडोर में संविधान का कोई नाम लेने वाला नहीं था। पीएम ने कहा वह बहुत जिम्मेवारी से कहते हैं कि जो लोग माथे पे संविधान की किताब लगाते हैं न वे आज भी ये माओवादी आतंकियों जो संविधान को नहीं मानते हैं इनकी रक्षा के लिए दिन रात लगा देते हैं। सरकार तो चुनी जाती थी…लेकिन रेड कॉरिडोर में उसकी कोई मान्यता नहीं होती थी। शाम ढलती थी..तो घर से बाहर निकल पाना मुश्किल हो जाता था। जो जनता को सिक्योरिटी देने वाले लोग थे…उनको भी सिक्योरिटी लेकर चलना पड़ता था।
माओवादी आतंक से हजारों लोग मारे गए
पीएम ने बताया कि बीते 50-55 सालों में इस माओवादी आतंक की वजह से हजारों लोग मारे गए। कितने ही सुरक्षाकर्मी माओवादी आतंक का शिकार बने, कितने ही नौजवानों को हमने खोया, ये नक्सली, ये माओवादी आतंकी स्कूल नहीं बनाने देते थे। अस्पताल नहीं बनाने देते थे। अस्पताल है तो डॉक्टर को घुसने नहीं देते थे जो बने हुए थे, उनको भी बम से उड़ा दिया जाता था।
दशकों-दशक तक विकास की रोशनी से देश का एक बहुत बड़ा हिस्सा, बहुत बड़ी आबादी वंचित रही। इसका बहुत बड़ा नुकसान हमारे आदिवासी भाई बहनो को, दलित भाई-बहनों को गरीब लोगों को उठाना पड़ा। माओवादी आतंक, देश के नौजवानों के साथ बहुत बड़ा अन्याय है, बहुत बड़ा पाप है।
नौजवान को इस हाल में नहीं छोड़ सकता था
मैं बेचैनी महसूस करता था, जुबान पे ताला लगा के बैठा था, आज पहली बार मेरे दर्द को आपके सामने प्रस्तुत कर रहा हूं। मैं उन माताओं को जानता हूं जिन्होंने अपने लाल खोए हैं। उन माताओं की अपने लाल से कुछ अपेक्षाएं थी। या तो वो ये माओवादी आतंकियों के झूठे बातों में फंस गए या तो माओवादी आतंक का शिकार हो गए और इसलिए, 2014 के बाद हमारी सरकार ने… पूरी संवेदनशीलता के साथ भटके हुए नौजवानों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया। मै देशवासिओं को पहली बार कह रहा हूँ, देशवासिओ को संतोष होगा , देशवासी हमें आशीर्वाद देंगे, जिन माताओ ने अपने लाल खोये वो माताएँ हमें आशीर्वाद देंगी, देश की शक्ति को आषीर्वाद देंगी और आज देश उसके नतीजे देख रहा है।
11 पहले 125 जिले माओवादी आतंक से प्रभावित थे
11 वर्ष पहले तक देश के सवा सौ जिले, 125 से ज़्यादा, माओवादी आतंक से प्रभावित थे और आज ये संख्या सिर्फ 11 जिलों तक सिमट गई है। इसके लिए कितना कुछ करना पड़ा होगा। उस ग्यारह में भी अब सिर्फ तीन जिले ही ऐसे बचे हैं, जो सबसे अधिक नक्सल प्रभावित हैं। बीते दशक में हजारों नक्सलियों ने हथियार डाले हैं। पीएम मोदी ने कहा वह पिछले 75 घंटों का आंकड़ा देते हैं। इन 75 घंटों में 303 नक्सलियों ने सरेंडर किया है। एक जमाने में जिनका 303 चलता था, आज वो 303 सरेंडर हुए हैं। ये कोई सामान्य नक्सली नहीं हैं। किसी पर 1 करोड़ का इनाम था। किसी पर 15 लाख का इनाम था। किसी पर 5 लाख का इनाम था। इन नक्सलियों से बहुत बड़ी मात्रा में हथियार भी पकड़े गए हैं।
ये सारे लोग अब बंदूकें छोड़ करके, बम छोड़ करके, भारत के संविधान को गले लगाने के लिए तैयार हुए हैं और जब संविधान के लिए पूर्ण समर्पित सरकार होती है न तब गलत रास्ते पे गया हुआ व्यक्ति भी लौट के अपने आंखों को उस संविधान पर टीका देता है। अब वो विकास की मुख्यधारा में वापस आ रहे हैं। ये लोग स्वीकार कर रहे हैं कि वो गलत रास्ते पर थे। 5 5 दशक बीता दिए, जवानी खपा दी पर उन्होंने जो सोचा था वो परिवर्तन नहीं आया। अब ये भारत के संविधान पर विश्वास करते हुए आगे बढ़ेंगे।
बस्तर नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बताया कि पहले बस्तर नक्सलियों का गढ़ हुआ करता था। आज मैं उसी बस्तर का उदाहरण देता हूं, वहां के आदिवासी नौजवान बस्तर ओलंपिक का आयोजन कर रहे हैं और लाखों नौजवान बस्तर ओलंपिक में आके खेल के मैदान में ताकत दिखा रहें हैं।



