नई दिल्ली: भारत के पूर्व मुख्य कोच रवि शास्त्री (Ravi Shastri) ने भारतीय क्रिकेट के दो सबसे सफल खिलाड़ियों—विराट कोहली (Virat Kohli) और रोहित शर्मा (Rohit Sharma) को लेकर एक अहम टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि दोनों दिग्गजों के लिए 2027 वनडे वर्ल्ड कप (2027 ODI World Cup) तक का रास्ता आसान नहीं होगा। शास्त्री के अनुसार, कोहली और रोहित के भविष्य का फैसला उनकी फॉर्म, फिटनेस और खेलने के जज्बे पर निर्भर करेगा।
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ (India vs Australia Series) होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज को उन्होंने दोनों खिलाड़ियों के लिए “महत्वपूर्ण परीक्षा” बताया। यह सीरीज 19 अक्टूबर से पर्थ में शुरू होगी और इसे भारत की वर्ल्ड कप 2027 की तैयारी का शुरुआती संकेतक माना जा रहा है।
सीरीज से तय होगी दिशा
शास्त्री, जो 2017 से 2021 तक भारतीय टीम के मुख्य कोच रहे, ने कहा कि यह सीरीज कोहली और रोहित के करियर के अगले अध्याय को परिभाषित कर सकती है। उन्होंने कहा, “यह उनकी फिटनेस, जज्बे और जाहिर है, फॉर्म पर निर्भर करता है। मुझे लगता है कि यह सीरीज इस बात की स्पष्ट तस्वीर देगी कि वे किस स्थिति में हैं। सीरीज के बाद वे खुद जान जाएंगे कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं और फिर फैसला उनका होगा।”
शास्त्री के मुताबिक, दोनों खिलाड़ियों के पास अब खुद को साबित करने का यह सही मौका है। अगर वे इस सीरीज में लय में लौटते हैं, तो आने वाले दो साल तक भारत की वनडे योजनाओं में उनका योगदान जारी रह सकता है।
अब सिर्फ वनडे पर फोकस
विराट कोहली और रोहित शर्मा ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अब सिर्फ वनडे प्रारूप में ध्यान केंद्रित किया है। टी20 और टेस्ट टीमों में नई पीढ़ी के खिलाड़ियों को मौका देने के बाद दोनों सीनियर बल्लेबाजों के करियर को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
2027 वर्ल्ड कप तक पहुंचते-पहुंचते रोहित 40 वर्ष और कोहली 38 वर्ष के हो जाएंगे। ऐसे में उनकी फिटनेस और प्रेरणा सबसे बड़ी चुनौती होगी। हालांकि, उनके प्रदर्शन का रिकॉर्ड अब भी शानदार है। हाल ही में संपन्न चैंपियंस ट्रॉफी में भारत की जीत में दोनों ने अहम भूमिका निभाई थी। रोहित शर्मा को फाइनल में प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया, जबकि विराट कोहली पूरे टूर्नामेंट में शीर्ष पांच बल्लेबाजों में शामिल रहे।
गिल को कप्तानी, लेकिन अनुभव पर भरोसा कायम
शुभमन गिल (Shubman Gill) को हाल ही में भारत की वनडे टीम का नया कप्तान बनाया गया है। इसे आने वाले वर्ल्ड कप के लिए दीर्घकालिक योजना का हिस्सा माना जा रहा है। इसके बावजूद, टीम प्रबंधन अब भी कोहली और रोहित जैसे खिलाड़ियों के अनुभव और मानसिक दृढ़ता को अहम मानता है। शास्त्री ने भी कहा कि बड़े टूर्नामेंट्स में अनुभव की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा “जब बड़े मैच आते हैं, तो बड़े खिलाड़ी ही टीम को आगे ले जाते हैं। हमने इसे चैंपियंस ट्रॉफी में देखा है, जहां अनुभवी खिलाड़ियों ने ही दबाव में जीत दिलाई।”
ऑस्ट्रेलिया के स्टीव स्मिथ पर भी बोले शास्त्री
रवि शास्त्री ने ऑस्ट्रेलियाई बल्लेबाज स्टीव स्मिथ का उदाहरण देते हुए कहा कि यह स्थिति सिर्फ भारतीय खिलाड़ियों पर लागू नहीं होती। “स्टीव स्मिथ ने मार्च में वनडे क्रिकेट से संन्यास लिया। उस उम्र में खेल से प्यार और खेलने का जज्बा बहुत जरूरी होता है। अगर वह बना रहता है, तो आप खेल में लंबे समय तक टिक सकते हैं,” शास्त्री ने कहा।
उन्होंने यह भी जोड़ा कि उम्र भले ही बढ़ जाए, लेकिन अनुभव का कोई विकल्प नहीं होता। उनके अनुसार, यदि खिलाड़ी अपनी फिटनेस और फोकस बनाए रखे, तो वह 30 के बाद भी टीम के लिए अमूल्य साबित हो सकता है।
आत्ममंथन का समय
रवि शास्त्री के इस बयान से साफ है कि अब कोहली और रोहित को हर मैच में अपनी उपयोगिता साबित करनी होगी। आने वाले दो वर्षों में भारत की टीम में कई युवा खिलाड़ी उभर रहे हैं—ऐसे में सीनियर खिलाड़ियों के लिए यह समय आत्ममंथन और प्रदर्शन दोनों का है।
- इसको भी पढ़ें: ISSF World Cup: मेघना ने पहली बार पदक जीतकर रचा इतिहास
ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ यह सीरीज उनके करियर की दिशा तय कर सकती है। अगर वे यहां चमके, तो 2027 वर्ल्ड कप में उनका अनुभव भारत की सबसे बड़ी ताकत बन सकता है। लेकिन अगर प्रदर्शन फीका रहा, तो शायद भारतीय क्रिकेट एक नई पीढ़ी के युग में प्रवेश कर जाए।



