भारतीय भेड़िया: विलुप्ति के कगार पर प्राचीन योद्धा

आईयूसीएन ने भारतीय भेड़िए को कैनिस वंश की नई प्रजाति का दर्जा देने का सुझाव दिया है, जो विलुप्ति के कगार पर है। आबादी घट रही है, संरक्षण के लिए तत्काल कदम जरूरी हैं। 

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नई दिल्ली: अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (आईयूसीएन) ने पहली बार भारतीय भेड़िए ‘कैनिस ल्यूपस पैलिप्स’ की अलग से समीक्षा की है, जो एक क्रांतिकारी बदलाव साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्राचीन प्रजाति अब कैनिस वंश की आठवीं अलग प्रजाति के रूप में मान्यता पा सकती है। अगर यह प्रस्ताव स्वीकृत होता है, तो यह भेड़िया वैश्विक संरक्षण की प्राथमिकता सूची में ऊपर आ जाएगा, क्योंकि वर्तमान में कैनिस वंश में सात प्रजातियां ही शामिल हैं।

भारतीय भेड़िए की अनोखी पहचान

भारतीय भेड़िया, जिसे अक्सर ग्रे वुल्फ के नाम से जाना जाता है, भारत और पाकिस्तान के शुष्क इलाकों, रेगिस्तानों, घासभूमियों तथा पतले जंगलों में पाया जाता है। यह अन्य भेड़ियों से थोड़ा छोटा कद-काठी वाला होता है, जिसमें हल्का भूरा कोट चमकदार दिखता है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह दुनिया की सबसे पुरानी भेड़िया नस्लों में शुमार है, जिसका विकास लाखों वर्ष पहले भारतीय उपमहाद्वीप में हुआ, यहां तक कि मानव आगमन से पूर्व। जैव विविधता के लिहाज से यह एक अनमोल धरोहर है, जो पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

खतरे में डूबती आबादी

आईयूसीएन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, भारत-पाकिस्तान में भारतीय भेड़ियों की कुल संख्या मात्र 2,877 से 3,310 के बीच है। इस कमी के चलते इसे ‘वल्नरेबल’ यानी असुरक्षित श्रेणी में डाल दिया गया है, जो विलुप्ति के कगार पर होने का संकेत देता है। चिंताजनक बात यह है कि जबकि बाघ जैसी प्रजातियों की संख्या स्थिर हो रही है, भारतीय भेड़िया की आबादी लगातार सिकुड़ रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि ये भेड़िए ज्यादातर संरक्षित क्षेत्रों से बाहर रहते हैं, जहां मानवीय हस्तक्षेप सीधा असर डालता है।

संरक्षण की चुनौतियां

रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि केवल 12.4 प्रतिशत क्षेत्र ही ऐसे हैं जहां भारतीय भेड़िए संरक्षित इलाकों में पाए जाते हैं। बाकी 87 प्रतिशत भेड़िए असुरक्षित भूमि पर निर्भर हैं, जो शिकार, भूमि क्षरण, सड़क परियोजनाओं और इंसान-वन्यजीव टकरावों से बुरी तरह प्रभावित हैं। देहरादून के वन्यजीव संस्थान के विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि बिना तत्काल हस्तक्षेप के अगले दशक में स्थिति और बिगड़ सकती है। उत्तर प्रदेश जैसी जगहों पर हाल की घटनाएं मानव-भेड़िया संघर्ष को उजागर करती हैं, जहां समस्या पैदा करने वाले भेड़ियों को सतर्कता से हटाने की सलाह दी गई है ताकि स्थानीय समुदाय का सहयोग बरकरार रहे।

कैनिस वंश का विस्तार

अगर भारतीय भेड़िए को नई प्रजाति का दर्जा मिलता है, तो कैनिस वंश में शामिल सात मौजूदा प्रजातियां कैनिस ल्यूपस (ग्रे वुल्फ), कैनिस लैट्रांस (कोयोट), कैनिस ऑरियस (गोल्डन जैकल), कैनिस सिमेंसिस (इथियोपियन वुल्फ), कैनिस फैमिलिएरिस (घरेलू कुत्ता), कैनिस रूफस (रेड वुल्फ) और कैनिस लूपास्टर (अफ्रीकी वुल्फ) के साथ यह आठवीं बनेगी। यह कदम न केवल वैज्ञानिक वर्गीकरण को मजबूत करेगा, बल्कि संरक्षण प्रयासों को वैश्विक स्तर पर गति भी देगा।

संरक्षण की दिशा में आगे का सफर

भारतीय भेड़िया एक दुर्लभ और प्राचीन प्रजाति है, जो भारतीय उपमहाद्वीप की जैविक विरासत का प्रतीक है। घटती संख्या और उभरते खतरों को देखते हुए, अब विशेष संरक्षण योजनाओं, संरक्षित क्षेत्रों का विस्तार और जागरूकता अभियानों की सख्त जरूरत है। अगर हम अभी नहीं चेते, तो यह अनोखा योद्धा इतिहास के पन्नों में सिमट सकता है। समय है कि हम इसे बचाने के लिए एकजुट हों, ताकि आने वाली पीढ़ियां इस प्राकृतिक चमत्कार को देख सकें।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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