पटना: बिहार विधानसभा चुनाव में इस बार जंग केवल जमीन पर ही नहीं, बल्कि आसमान में भी देखने को मिलेगी। राज्य में चुनावी प्रचार के दौरान हेलीकॉप्टरों की गूंज पूरे बिहार में सुनाई देगी। इन हेलीकॉप्टरों के किराये पर लगभग 100 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सबसे ज्यादा छह हेलीकॉप्टर भाजपा ने बुक कराए हैं। एक हेलीकॉप्टर का किराया प्रतिदिन करीब 11 लाख रुपये तक पहुंचता है।
एनडीए और महागठबंधन दोनों ही दलों ने चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ी है। पटना, दिल्ली और रांची की तीन बड़ी विमानन कंपनियां हेरिटेज एविएशन, इंडेमर एविएशन और ओएसएस एयर को इस बार करोड़ों रुपये के ठेके मिले हैं। बताया जा रहा है कि बुकिंग की प्रक्रिया एक महीने पहले ही पूरी कर ली गई थी और विमानन कंपनियों ने अपने स्तर पर पूरी तैयारी भी कर ली थी।
हेलीकॉप्टर की जंग में भाजपा सबसे आगे
भाजपा ने छह अत्याधुनिक हेलीकॉप्टर बुक किए हैं। इनका इस्तेमाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और कई केंद्रीय मंत्रियों की सभाओं के लिए किया जाएगा। भाजपा के रणनीतिकारों का मानना है कि कम समय में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचने के लिए हेलीकॉप्टर आवश्यक हैं। प्रधानमंत्री और अमित शाह की ताबड़तोड़ रैलियों के लिए हेलीकॉप्टर के जरिए रोजाना चार से पांच सभाएं कर पाना संभव होगा।
जदयू ने तीन हेलीकॉप्टर किए बुक
जदयू ने तीन हेलीकॉप्टर किराए पर लिए हैं- एक मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, दूसरा पार्टी अध्यक्ष ललन सिंह और मंत्री संजय झा के लिए, जबकि तीसरा पार्टी के मीडिया अभियान के उपयोग में आएगा। जदयू की योजना है कि रोजाना चार जिलों में चुनाव प्रचार किया जाए। पार्टी अपने हेलीकॉप्टर अभियानों के जरिए विकास और स्थिरता का संदेश प्रदेश भर में फैलाएगी।
राजद भी नहीं पीछे- तेजस्वी यादव के पास दो हेलीकॉप्टर
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) ने भी दो हेलीकॉप्टर बुक किए हैं। पार्टी चाहती है कि 2020 में जिन क्षेत्रों में उसे हार का सामना करना पड़ा था, वहां तेजस्वी यादव ज्यादा से ज्यादा सभाएं करें। एक दिन में पाँच से छह जनसभाएं करने की योजना है। इस बार राजद ने नारा दिया है- ‘बिहार बदलेगा, रोजगार लाएगा।‘ तेजस्वी यादव हर परिवार से एक व्यक्ति को सरकारी नौकरी देने के वादे को जन-जन तक पहुंचाने में जुटे हैं।
कांग्रेस के पास तीन हेलीकॉप्टर
कांग्रेस पार्टी ने तीन हेलीकॉप्टर किराए पर लिए हैं। इनका इस्तेमाल राहुल गांधी की ‘न्याय यात्रा’ और मल्लिकार्जुन खड़गे सहित अन्य शीर्ष नेताओं के दौरों के लिए किया जाएगा।
अन्य दल भी मैदान में
महागठबंधन के सहयोगी दलों में शामिल राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और कांग्रेस के साथ-साथ असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने भी चुनावी आकाश में उड़ान भरने की तैयारी कर ली है। एआईएमआईएम ने एक हेलीकॉप्टर बुक किया है ताकि सीमांचल क्षेत्र में अपनी पैठ मजबूत कर सके।
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2020 और 2015 में कितना हुआ था खर्च
2020 के विधानसभा चुनाव में भी राजनीतिक दलों ने हेलीकॉप्टरों का उपयोग किया था, लेकिन संख्या सीमित थी। कोरोना संकट के कारण तब कम हेलीकॉप्टर लगाए गए थे। इस बार उनकी संख्या तीन गुना तक बढ़ने की उम्मीद है। 2015 के चुनाव में प्रचार के दौरान कुल 24 हेलीकॉप्टर इस्तेमाल हुए थे। उस समय पांच चरणों में चुनाव हुए थे और 48 दिनों तक हेलीकॉप्टरों ने उड़ान भरी थी। शुरुआत के आठ दिनों में इनका उपयोग कम था, लेकिन बाद के 40 दिनों में प्रचार चरम पर पहुंच गया था। उस दौरान प्रतिदिन पटना एयरपोर्ट से 24 हेलीकॉप्टर उड़ान भरते थे, जिनमें 11 सिंगल इंजन और 13 डबल इंजन वाले थे।
कम समय में अधिक सभाओं का लाभ
राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों के मुताबिक, हेलीकॉप्टर की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह नेताओं को कम समय में ज्यादा सभाएं करने में मदद करता है। यही कारण है कि इस बार चुनावी आसमान में पहले से कहीं ज्यादा हेलीकॉप्टर उड़ान भरते नजर आएंगे।



