नोबेल शांति पुरस्कार या विवादों का मंच?

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नोबेल शांति पुरस्कार पाना चाहते हैं। उनकी ये इच्छा किसी से छिपी नहीं है। आइये जानते हैं कुछ उन हस्तियों के बारे में जिन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार देना विवादों में रहा-

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नई दिल्ली: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प नोबेल शांति पुरस्कार पाना चाहते हैं। उनकी ये इच्छा किसी से छिपी नहीं है। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी ट्रम्प को इस पुरस्कार के लिए नामित किया है। नेतन्याहू अकेले नहीं हैं, जो ये चाहते हैं कि ट्रम्प को नोबेल शांति पुरस्कार मिले। जून में पाकिस्तान ने भी घोषणा की थी कि ट्रम्प को नोबेल का शांति पुरस्कार मिलना चाहिए। ट्रम्प का दावा था कि भारत के साथ युद्धविराम में ट्रम्प ने अहम भूमिका निभाई। आइये जानते हैं कुछ उन हस्तियों के बारे में जिन्हें शांति का नोबेल पुरस्कार देना विवादों में रहा-

हैरान रह गए थे ओबामा

इस कड़ी में पहला नाम है अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबमा का। 2009 में जब उन्हें ये पुरस्कार मिला तो ओबामा खुद हैरान रह गए थे कि आखिर उन्हें किस बात के लिए ये मिला है। बाद में नोबेल कमिटी को भी अपने इस फैसले पर अफ़सोस हुआ था। दूसरा नाम है फिलिस्तीनी नेता यासिर अराफ़ात का। उन्हें 1994 में यह पुरस्कार मिला था। उनके पुरस्कार देने पर नोबेल कमिटी के अंदर भी मतभेद दिखे क्योंकि अराफात सशस्त्र संघर्ष और छापामार गतिविधियों में शामिल रहे थे।

कंबोडिया बमबारी

तीसरा नाम है हेनरी किसिंजर का- हेनरी अमेरिकी विदेश मंत्री थे, उन्हें 1973 में नोबेल शांति पुरस्कार से नवाज़ा गया था। वियतनाम में युद्धविराम कराने के लिए उन्हें यह पुरस्कार दिया गया, जबकि कंबोडिया में छुप कर बमबारी कराने में उनका हाथ था। नोबेल कमिटी के दो सदस्यों ने इसके विरोध में इस्तीफा तक दे दिया था। चौथा नाम है इथियोपिया के प्रधानमंत्री अबी अहमद का। उन्हें 2019 में नोबेल शांति पुरस्कार मिला था। इरीट्रिया के साथ लंबे समय से हो रहे सीमा विवाद को सुलझाने की कोशिशों के लिए उन्हें ये पुरस्कार दिया गया था। लेकिन यह फैसला जल्दबाजी में लिया गया था। क्योंकि बाद में अबी अहमद ने टिग्रे के उत्तरी इलाके़ में सेना भेज दी थी। इस वजह से गृह युद्ध छिड़ गया और हजारों लोगों की मौत हो गई।

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वापस करो नोबेल पुरस्कार

इस लिस्ट में पांचवां नाम है म्यांमार की आंग सान सू ची का। उन्हें 1991 में उन्हें यह पुरस्कार दिया गया था। 20 साल बाद उनकी खूब निंदा हुई, क्योंकि उन्होंने मुस्लिम रोहिंग्या समुदाय के जनसंहार के लिए खुलकर आवाज नहीं उठाई। लोगों ने मांग की थी कि आंग सान सू ची से नोबेल पुरस्कार ले लिया जाये। हालांकि नियम के मुताबिक एक बार देने के बाद नोबेल पुरस्कार वापस नहीं ले सकते हैं। लिस्ट में छठा नाम है- कीनिया की वंगारी मथाई का। नोबेल पुरस्कार पाने वाली वह पहली अफ़्रीकी महिला हैं। उन्हें यह पुरस्कार लाखों पेड़ लगाने और पर्यावरण की रक्षा करने के लिए दिया गया था। बाद में वह विवादों में घिर गई। उन्होंने HIV और एड्स को लेकर विवादित बयान दिए थे।

Pooja Thakur

pt37557@gmail.com

मीडिया की दुनिया में पिछले 3 सालों से सक्रिय। वर्तमान में Newg India में बतौर कंटेंट राइटर और मल्टीमीडिया प्रोड्यूसर काम कर रही हूं, जहां हर कहानी को एक नए नजरिए से पेश करने की कोशिश करती हूं।

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