Artificial Sweeteners : मीठा स्वाद, कड़वा असर

कृत्रिम मिठास (Artificial Sweeteners) दिमागी क्षमता, खासकर याददाश्त को कमजोर कर सकती है, विशेष रूप से मधुमेह रोगियों में। यह शोध चीनी के विकल्पों के छुपे खतरों की ओर इशारा करता है। 

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नई दिल्ली: कृत्रिम मिठास (Artificial Sweeteners), जिसे लोग अक्सर चीनी का सेहतमंद विकल्प मानते हैं, दिमाग के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। हालिया शोध में खुलासा हुआ है कि ये स्वीटनर्स लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर सोचने और याद रखने की क्षमता को कमजोर कर सकते हैं। साओ पाउलो विश्वविद्यालय के एक अध्ययन में पाया गया कि अधिक मात्रा में कृत्रिम मिठास का सेवन करने वालों में दिमागी क्षमता तेजी से घटती है, खासकर मधुमेह रोगियों में। यह शोध सात प्रकार के स्वीटनर्स, जैसे एस्पार्टेम, सैकरिन और सॉर्बिटॉल पर केंद्रित था, जो डाइट सोडा, फ्लेवर्ड वॉटर और लो-कैलोरी मिठाइयों में आमतौर पर पाए जाते हैं।

शोध का खुलासा

यह अध्ययन 12,772 लोगों पर आठ साल तक चला, जिनकी औसत उम्र 52 साल थी। शोधकर्ताओं ने प्रतिभागियों को उनके खान-पान के आधार पर तीन समूहों में बांटा: कम, मध्यम और अधिक कृत्रिम मिठास लेने वाले। सबसे ज्यादा सेवन करने वाले समूह ने प्रतिदिन औसतन 191 मिलीग्राम स्वीटनर लिया, जो एक डाइट सोडा कैन के बराबर है। सॉर्बिटॉल का सेवन सबसे ज्यादा, यानी 64 मिलीग्राम प्रतिदिन, देखा गया। समय-समय पर किए गए दिमागी परीक्षणों से पता चला कि अधिक मिठास लेने वालों की याददाश्त और सोचने की शक्ति में 62% तेज गिरावट आई, जो उम्र के 1.6 साल बढ़ने के बराबर थी। मध्यम सेवन वालों में यह गिरावट 35% थी।

उम्र और मधुमेह का प्रभाव

खास बात यह रही कि 60 साल से कम उम्र के लोगों में कृत्रिम मिठास का असर ज्यादा देखा गया, जबकि बुजुर्गों पर इसका प्रभाव कम था। मधुमेह रोगियों में यह असर और भी गंभीर था। शोध में शामिल स्वीटनर्स में टैगाटोज को छोड़कर बाकी सभी ने दिमागी क्षमता, खासकर स्मरण शक्ति, को नुकसान पहुंचाया। शोधकर्ता डॉ. क्लॉडिया सुएमोटो ने बताया कि लोग इन्हें चीनी का सुरक्षित विकल्प मानते हैं, लेकिन ये मस्तिष्क के लिए हानिकारक हो सकते हैं।

पहले भी आ चुके हैं चेतावनी के संकेत

यह पहली बार नहीं है जब कृत्रिम मिठास पर सवाल उठे हैं। जुलाई 2023 में विश्व स्वास्थ्य संगठन और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों ने एस्पार्टेम को संभावित कैंसरकारी पदार्थों की सूची में शामिल किया था। इसके अलावा, सुक्रालोज से बनने वाला यौगिक सुक्रालोज-6-एसीटेट आंत को नुकसान पहुंचा सकता है और ऑक्सीडेटिव तनाव, सूजन या कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। 2018 के एक शोध ने भी इस यौगिक के हानिकारक प्रभावों की पुष्टि की थी।

क्या करें उपभोक्ता?

यह शोध एक चेतावनी है कि कृत्रिम मिठास का अधिक सेवन सोचने और याद रखने की शक्ति को कमजोर कर सकता है। शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि अध्ययन में कुछ सीमाएं थीं, जैसे स्व-रिपोर्टेड आहार डेटा और सभी स्वीटनर्स का विश्लेषण न होना। फिर भी, यह सुझाव देता है कि कृत्रिम मिठास को पूरी तरह सुरक्षित मानने से पहले और शोध की जरूरत है। उपभोक्ताओं को सलाह है कि वे इनका सेवन सीमित करें और प्राकृतिक विकल्पों पर विचार करें।

Sakshi Pal

sakshipal8700@gmail.com

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