नई दिल्ली: पिछले 100 सालों में बैक्टीरिया के छोटे-छोटे डीएनए अणु, जिन्हें प्लाज्मिड्स कहते हैं, ने दुनियाभर में एंटीबायोटिक प्रतिरोध की समस्या को बढ़ाया है। ब्रिटेन के वैज्ञानिकों ने 1917 से अब तक के 40 हजार से अधिक प्लाज्मिड्स का विश्लेषण किया, जो छह महाद्वीपों से एकत्र किए गए। यह शोध, जो साइंस पत्रिका में प्रकाशित हुआ, बताता है कि कैसे कुछ खास प्लाज्मिड्स ने मल्टीड्रग-रेसिस्टेंट (एमडीआर) बैक्टीरिया को जन्म दिया, जो हर साल लाखों लोगों की जान ले रहे हैं।
प्लाज्मिड्स का रहस्य
प्लाज्मिड्स बैक्टीरिया के अंदर मौजूद गोल डीएनए संरचनाएं हैं, जो अपनी नकल बनाकर अन्य बैक्टीरिया में फैल सकती हैं। ये आनुवंशिक जानकारी, खासकर एंटीबायोटिक प्रतिरोधी जीन को तेजी से साझा करते हैं। 1917 में प्लाज्मिड्स में प्रतिरोधी जीन नहीं थे, क्योंकि तब एंटीबायोटिक्स का उपयोग शुरू नहीं हुआ था। लेकिन जैसे-जैसे दवाओं का इस्तेमाल बढ़ा, प्लाज्मिड्स ने प्रतिरोधी जीन हासिल किए।
विकास के तीन रास्ते
शोध में प्लाज्मिड्स के विकास के तीन तरीके सामने आए:
- जीन जोड़ना: पुराने प्लाज्मिड्स में नए प्रतिरोधी जीन शामिल हुए।
- विलय की प्रक्रिया: दो प्लाज्मिड्स मिलकर एक नया, अधिक खतरनाक प्लाज्मिड बनाते हैं, जो कई बैक्टीरिया प्रजातियों में फैल सकता है।
- टूटना और पुनर्चक्रण: कुछ प्लाज्मिड्स टूट गए, लेकिन उनके टुकड़े अन्य प्लाज्मिड्स में शामिल हो गए।
आज के सबसे खतरनाक प्लाज्मिड्स इन्हीं प्रक्रियाओं से बने हैं।
शोध का प्रभाव
यह खोज नई दवाओं और उपचारों के विकास में मदद कर सकती है। वैज्ञानिक अब इन खतरनाक प्लाज्मिड्स को लक्षित करके रणनीति बना सकते हैं। साथ ही, यह शोध भविष्य में फैलने वाले संक्रमणों की भविष्यवाणी करने में सहायक होगा। यह एंटीबायोटिक्स के अंधाधुंध उपयोग को रोकने की जरूरत को भी रेखांकित करता है।
भविष्य की राह
प्लाज्मिड्स की कहानी हमें सिखाती है कि बैक्टीरिया लगातार बदलते हैं। कुछ धीरे-धीरे विकसित होते हैं, तो कुछ नए रूप में उभरते हैं। यह शोध न केवल बैक्टीरिया के इतिहास को समझाता है, बल्कि भविष्य की रणनीतियों के लिए भी मार्गदर्शन देता है। एंटीबायोटिक प्रतिरोध से निपटने के लिए हमें नई दवाओं के साथ-साथ प्लाज्मिड्स को समझने और नियंत्रित करने की जरूरत है।



