जहानाबाद: ‘तेजस्वी तुमसे बैर नहीं, सुदय तुम्हारी खैर नहीं’ के नारे के साथ जहानाबाद के सड़कों पर उतरते हुए पटना के लिए रवाना होने वाले राजद कार्यकर्ताओं का काफिला स्थानीय विधायक के प्रति पूरी तरह बगावती तेवर में है। दरअसल, कुमार कृष्ण मोहन उर्फ सुदय यादव जहानाबाद के विधायक हैं। इस बार भी राष्ट्रीय जनता दल की ओर से उनकी दावेदारी है। लेकिन कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग अपने पार्टी नेतृत्व से टिकट बदलने की मांग कर रहा है।
हाल के दिनों में जब अधिकार यात्रा के तहत तेजस्वी जहानाबाद आए थे, तो उनके सामने भी कार्यकर्ताओं ने ‘सुदय हटाओ, जहानाबाद बचाओ’ के तख्तियां के साथ जमकर नारेबाजी की थी। इस दौरान तेजस्वी ने कार्यकर्ताओं को कहा था, हम सब देख रहे हैं, आप लोग निश्चिंत रहिए।
लेकिन अब चुनाव की घोषणा हो गई है, और किसी भी समय पार्टी द्वारा उम्मीदवार की घोषणा भी की जा सकती है। ऐसे में कार्यकर्ताओं का एक बड़ा वर्ग सुदय यादव के टिकट कटने को लेकर आंदोलन छेड़ दिया है। जहानाबाद से उठने वाली इस मांग के साथ कार्यकर्ताओं की बड़ी टोली पटना के लिए रवाना हुई है।
मुद्रिका सिंह यादव के बेटे को मिला टिकट
बिहार सरकार के पूर्व मंत्री और राजद के कद्दावर नेता मुद्रिका सिंह यादव के निधन के बाद उनके बेटे सुदय यादव को पार्टी द्वारा टिकट दिया गया था। उपचुनाव में सुदय यादव को बड़ी जीत मिली थी, जिसके कारण 2020 के विधानसभा चुनाव में भी उनका टिकट बरकरार रखा गया और उन्होंने लगभग 34,000 वोट से तत्कालीन शिक्षा मंत्री कृष्णनंदन प्रसाद वर्मा को मात दी थी। ऐसे में 2025 के चुनाव में भी उनके समर्थकों को उम्मीद है कि पार्टी उन्हें ही उम्मीदवार बनाएगी। लेकिन इस बीच बगावत का स्वर भी बुलंद होने लगा है।
दूसरे उम्मीदवार को उतारने की मांग
बगावत कर रहे पार्टी कार्यकर्ताओं का कहना है कि सुदय यादव द्वारा कार्यकर्ताओं की घोर उपेक्षा की गई है। कुछ सीमित लोगों का ही विकास उनके द्वारा हुआ है। ऐसे में इस बार उनके स्थान पर किसी दूसरे उम्मीदवार को टिकट दिया जाना चाहिए।
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सुदय समर्थकों का दावा
हालांकि, सुदय यादव के समर्थकों का कहना है कि आम मतदाता उनके साथ खड़े हैं। कुछ लोग अपनी टिकट की लालसा में इस तरह की हरकत कर रहे हैं, जिसे पार्टी नेतृत्व भी पूरी तरह जानता है। ऐसे में उनका टिकट कटने का कोई सवाल ही नहीं उठता। अब देखने वाली बात यह होगी कि सुदय यादव फिर से मैदान में उतरते हैं या राष्ट्रीय जनता दल किसी नए चेहरे पर भरोसा जताती है। लेकिन इस विवाद से इतना तय है कि स्थानीय स्तर पर राष्ट्रीय जनता दल में बड़ी फूट है, जिसे पटना का पार्टी नेतृत्व संभालना इतना आसान नहीं होगा।



