नई दिल्ली: साल 2025 के नोबेल पुरस्कारों (Nobel Prize) की घोषणा का सिलसिला जारी है। इस साल केमिस्ट्री के लिए तीन वैज्ञानिकों सुसुमु कितागवा, रिचर्ड रॉबसन और ओमार एम. यागी को नोबेल मिला है। इन्हें मेटल-ऑर्गेनिक फ़्रेमवर्क्स के विकास के लिए नोबेल दिया गया है।
द राॅयल स्वीडिश अकेडमी ऑफ साइंसेज ने कहा कि इन तीनों वैज्ञानिकों ने एक नए तरह के मौलिक्यूलर आर्किटेक्टर को विकसित किया है। ये ऐसे एटम बम हैं, जिनमें बड़े-बड़े खाली हिस्से होते हैं। गैस और रासायनिक पदार्थ आसानी से गुजर सकते हैं। इसको ख़ास तरह से डिजाइन किया गया है, ताकि किसी विशेष चीज को कैप्चर या स्टोर कर सकें।
मिलेंगे इतने रुपये
इनका उपयोग रेगिस्तानी हवा से पानी इकट्ठा करने, प्रदूषण हटाने, कार्बन डाइऑक्साइड को साफ करने, जहरीली गैसों को संग्रहित करने या रासायनिक प्रतिक्रियाओं को तेज करने के लिए किया जा सकता है। विजेताओं को 11 मिलियन स्वीडिश क्रोना यानी 10.3 करोड़ रुपए, सोने का मेडल और सर्टिफिकेट दिया जाएगा। तीनों वैज्ञानिक सुसुमु कितागवा(जापान), रिचर्ड रॉबसन (ऑस्ट्रेलिया) और ओमार एम. यागी(अमेरिका) पुरस्कार लेने 10 दिसंबर को स्टॉकहोम जायेंगे।
क्यों स्पेशल है ये खोज:
- रेगिस्तान जैसी सूखी जगहों की हवा से पानी निकालने में
- पानी से गंदे और खतरनाक रसायनों (जैसे PFAS) को साफ करने में
- हवा से कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂) जैसी गैस हटाने में
- हाइड्रोजन और मीथेन जैसी गैसों को सुरक्षित तरीके से स्टोर करने में
- फलों से निकलने वाली गैस (एथिलीन) को रोकने में, ताकि फल धीरे-धीरे और ज्यादा समय तक ताजे रहें
- दवाओं को शरीर में धीरे-धीरे और सही तरीके से पहुंचाने में
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कब हुई थी Nobel Prize की स्थापना
नोबेल पुरस्कार की शुरुआत 1895 में हुई थी, जब वैज्ञानिक और आविष्कारक अल्फ्रेड नोबेल ने अपनी वसीयत में इसका जिक्र किया। पहला नोबेल पुरस्कार 1901 में दिया गया था। 1901 से 2024 तक मेडिसिन (चिकित्सा) के क्षेत्र में 229 लोगों को यह सम्मान मिल चुका है। शुरू में ये पुरस्कार सिर्फ भौतिकी (Physics), रसायन (Chemistry), मेडिसिन, साहित्य (Literature) और शांति (Peace) के क्षेत्र में दिए जाते थे। बाद में इकोनॉमिक्स (अर्थशास्त्र) के लिए भी नोबेल पुरस्कार शुरू किया गया।



