नई दिल्ली: भारत में कफ सिरप को लेकर बवाल मचा हुआ है। राजस्थान और मध्यप्रदेश में कफ सिरप पीने से कई बच्चों की मौत हुई है। इसे लेकर लोगों में काफी गुस्सा है। बच्चों को दी जाने वाली कोल्ड्रिफ सिरप में डाइएथिलीन ग्लाइकॉल नाम का खतरनाक और जानलेवा केमिकल मिला है। अगर यह केमिकल शरीर के अंदर चला जाता है तो किडनी फेल्योर, लिवर डैमेज और मौत तक हो सकती है।
बरते ये सावधानियां
कफ सिरप को लेकर जिस तरह से मामले आ रहे हैं, उसे देखकर लोगों के अंदर एक डर बैठ गया है। लेकिन आपको पैनिक होने की जरूरत नहीं है। कुछ चीजों का ख्याल रखकर आप इन खतरों से दूर रह सकते हैं।
- हमेशा डॉक्टर से सलाह लेने के बाद ही कफ सिरप लें।
- खांसी-जुकाम होने पर खुद से दवा न लें।
- बच्चों के लिए अलग सिरप का इस्तेमाल करें।
- 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप नहीं देना चाहिए।
- कफ सिरप पीने से पहले उसका लेबल और एक्सपायरी डेट जरूर चेक कर लें।
- किसी अनजान ब्रांड या फिर लोकल से दूर रहें।
- ज्यादा मात्रा में कफ सिरप लेने से बचे।
- सिरप को सही जगह पर स्टोर करके रखें।
- सिरप पीने के बाद अगर किसी तरह का रिएक्शन दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएँ।
सरकार ने जारी की एडवाइजरी
कोल्ड्रिफ (Coldrif) कफ सिरप को लेकर देशभर में डर का माहौल बना हुआ है। सरकार की तरफ से एडवाइजरी जारी की गई है। केंद्र ने कहा है कि 2 साल से कम उम्र के बच्चों को कफ सिरप न दी जाएं। बड़े बच्चों को भी कफ सिरप देने से पहले सावधानी रखें। मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में जिन बच्चों की मौत कोल्ड्रिफ सिरप पीने से हुई, उसमें 46.2% डाइएथिलीन ग्लाइकॉल (DEG) था।
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कितना खतरनाक है डाइएथिलीन
डायएथिलीन और एथिलीन ग्लाइकॉल बच्चों के लिए बेहद खतरनाक हैं। इसलिए, दुनिया भर में इनके इस्तेमाल पर नियंत्रण है। किसी भी कफ सिरप या दवा में डायएथिलीन और एथिलीन ग्लाइकॉल की मात्रा बहुत कम, लगभग 0.1% या उससे कम होनी चाहिए।



