नई दिल्ली: Gandhi, जिन्हें भारत का राष्ट्रपिता कहा जाता है, ने अपने सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों से विश्व को प्रेरित किया। उनके जीवन में कई लोगों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, लेकिन तीन महिलाओं कस्तूरबा गांधी, मीराबेन और सरोजिनी नायडू का योगदान विशेष रूप से उल्लेखनीय रहा। आइए, इनके साथ गांधी जी के रिश्तों को समझते हैं।
कस्तूरबा गांधी: जीवनसंगिनी और सहयोगी
कस्तूरबा गांधी, महात्मा गांधी की पत्नी, उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी थीं। कम उम्र में हुए विवाह के बाद, कस्तूरबा ने गांधी जी के हर कदम पर उनका साथ दिया। विदेश में पढ़ाई के दौरान भी कस्तूरबा ने धैर्यपूर्वक परिवार को संभाला। स्वतंत्रता संग्राम में उन्होंने न केवल गांधी जी के आंदोलनों का समर्थन किया, बल्कि महिलाओं को इन आंदोलनों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी सादगी और समर्पण ने गांधी जी के विचारों को और मजबूती दी।
मीराबेन: पिता-पुत्री का अनमोल बंधन
मैडलिन स्लेड, जिन्हें गांधी जी ने मीराबेन नाम दिया, एक ब्रिटिश महिला थीं, जो गांधी जी के विचारों से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने अपना जीवन उनके आश्रम में समर्पित कर दिया। 1925 में अहमदाबाद पहुंचने पर गांधी जी ने उन्हें अपनी बेटी की तरह अपनाया। मीराबेन ने स्वतंत्रता संग्राम में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया और गांधी जी के सिद्धांतों को विश्व तक पहुंचाने में मदद की। उनका रिश्ता गहरा और प्रेरणादायक था।
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सरोजिनी नायडू: हास्य और दोस्ती का रिश्ता
भारत कोकिला सरोजिनी नायडू और गांधी जी की दोस्ती अनोखी थी। इंग्लैंड में पहली मुलाकात में सरोजिनी ने गांधी जी को देखकर हंसी उड़ाई, जिसे गांधी जी ने मुस्कान के साथ स्वीकार किया। इस मुलाकात ने एक गहरी दोस्ती की नींव रखी। सरोजिनी ने गांधी जी को “मिकी माउस” का नाम दिया, जबकि गांधी जी उन्हें प्यार से “बुलबुल” कहते थे। अगले तीन दशकों तक दोनों ने स्वतंत्रता संग्राम में एक-दूसरे का साथ दिया।



