UGC का मनोविज्ञान डिस्टेंस कोर्स पर प्रतिबंध, लाखों छात्र प्रभावित

UGC ने मनोविज्ञान के डिस्टेंस लर्निंग कोर्स पर रोक लगा दी है, जिससे 1.3 लाख छात्रों का भविष्य अनिश्चित हो गया है। फैसले से डिग्री की मान्यता पर सवाल उठ रहे हैं।

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नई दिल्ली: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने मनोविज्ञान के डिस्टेंस लर्निंग कोर्स पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। यह निर्णय राष्ट्रीय सहयोगी और हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स कमीशन (NCAHP) के दिशानिर्देशों के तहत लिया गया, जो 2021 में स्थापित एक सरकारी निकाय है। NCAHP का उद्देश्य स्वास्थ्य से जुड़े पेशेवरों की शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता सुनिश्चित करना है। यूजीसी ने तर्क दिया कि मनोविज्ञान जैसे विषय, जो स्वास्थ्य क्षेत्र से जुड़े हैं, में डिस्टेंस लर्निंग व्यावहारिक प्रशिक्षण की कमी के कारण उपयुक्त नहीं है। इस फैसले के तहत, उन सभी विश्वविद्यालयों से मनोविज्ञान के डिस्टेंस कोर्स चलाने की अनुमति वापस ले ली गई है, जो इसे पहले ऑफर कर रहे थे।

छात्रों और शिक्षकों पर प्रभाव

इस अचानक निर्णय ने देशभर के 1.3 लाख से अधिक छात्रों को अनिश्चितता में डाल दिया है। जो छात्र वर्तमान में मनोविज्ञान के स्नातक या स्नातकोत्तर कोर्स कर रहे हैं, उन्हें अपनी डिग्री की वैधता को लेकर चिंता सता रही है। पहले से डिग्री प्राप्त कर चुके छात्रों को भी नौकरी या आगे की पढ़ाई में समस्याओं का डर है। शिक्षक और विश्वविद्यालय भी इस फैसले से हैरान हैं, क्योंकि कई संस्थान वर्षों से ये कोर्स संचालित कर रहे थे। दिल्ली विश्वविद्यालय के एक पूर्व प्राचार्य ने कहा कि डिस्टेंस और रेगुलर कोर्स का पाठ्यक्रम लगभग समान होता है, इसलिए इस प्रतिबंध का औचित्य समझ से परे है।

डिस्टेंस कोर्स की लोकप्रियता

पिछले कुछ वर्षों में मनोविज्ञान के डिस्टेंस कोर्स की मांग तेजी से बढ़ी थी। 2020-21 में जहां केवल 17 विश्वविद्यालय यह कोर्स ऑफर करते थे, वहीं 2024-25 तक यह संख्या बढ़कर 57 हो गई थी। विशेष रूप से तेलंगाना और तमिलनाडु में कई राज्य विश्वविद्यालयों ने इस कोर्स को लोकप्रिय बनाया। विशेषज्ञों का कहना है कि यह फैसला राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के उद्देश्यों के खिलाफ है, जो शिक्षा को सभी के लिए सुलभ बनाने पर जोर देती है।

भविष्य की चुनौतियां

इस प्रतिबंध ने छात्रों के सामने कई सवाल खड़े किए हैं। क्या उनकी डिग्री को मान्यता मिलेगी? क्या वे आगे की पढ़ाई या नौकरी के लिए योग्य माने जाएंगे? यूजीसी और NCAHP ने इस बदलाव को लागू करने में छात्रों को पर्याप्त समय नहीं दिया, जिससे असमंजस और बढ़ गया है। विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को इस फैसले के प्रभाव को कम करने के लिए वैकल्पिक उपाय और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने चाहिए।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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