नई दिल्ली: त्योहारी सीजन शुरू होने के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों में नकली घी और नकली मावा जैसे खाद्य पदार्थ खपाने वाले गिरोह भी सक्रिय हो गए हैं। इसी बीच गुरुवार को दिल्ली पुलिस को उस वक्त बड़ी कामयाबी मिली जब उसने उत्तर-पूर्वी दिल्ली में चल रही नकली शुद्ध घी की तीन अवैध फैक्ट्रियों पर छापा मारकर वहां से 1600 किलोग्राम नकली घी जब्त किया। इस दौरान पुलिस ने इस काम में लगे छह आरोपियों को भी धर दबोचा। आरोपी सस्ते वनस्पति घी और रिफाइंड तेल की मदद सेन कली घी बनाते थे। आरोपी आम लोगों के स्वास्थ्य जोखिम में डालकर मोटा मुनाफा कमा रहे थे।
1,625 किलो मिलावटी घी जब्त
पुलिस उपायुक्त विक्रम सिंह नेबताया कि दशहरा और दीवाली पर्व के दौरान बढ़ती मांग का फायदा उठाने के मकसद से शहर में बड़े पैमाने पर मिलावटी घी खपाने से जुड़ी जानकारी मिली थी, जिस पर कार्रवाई करते हुए पुलिस की कई टीमों ने छापेमारी की। इस दौरान तीन जगहों से 1,625 किलो मिलावटी घी से भरे कुल 105 टिन के डिब्बे, रसायन, दवाइयां, चूल्हे, गैस सिलेंडर और अन्य निर्माण उपकरण जब्त किए गए। पुलिस की यह कार्रवाई शिव विहार, करावल नगर और मुस्तफाबाद इलाके में हुई। इस दौरान वहां से सफीक, यूसुफ मलिक, उसके बेटे महबूब, शाकिर, शाहरुख और जमालुद्दीन को गिरफ्तार किया गया। आरोपियों के काम करनेका तरीका बताते हुए पुलिस ने कहा कि, नकली शुद्ध घी बनाने के लिए आरोपी बाजार से वनस्पति घी और सस्ता रिफाइंड तेल थोक में खरीदते थे। फिर इन्हें गर्म करके इनमें असुरक्षित केमिकल से बने कृत्रिम स्वाद और रंग मिलाया जाता था ताकि मिश्रण को शुद्ध देसी घी जैसी बनावट और स्वाद दिया जा सके। फिर इसके बाद तैयार नकली शुद्ध घी को विभिन्न लोकप्रिय ब्रांडों के नाम पैक करने के बाद त्योहारों के मौसम में उन्हें बाजार में सस्ते दामों पर खपा दिया जाता था।
नकली शुद्ध घी बनाने में 1,400 रुपये खर्च आता था
वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, एक टिन नकली शुद्ध घी बनाने में आरोपियों को लगभग 1,300 से 1,400 रुपये का खर्च आता था और वे इसे बाजार में 3,500 से 4,000 रुपए में खपाते थे।
कार्यप्रणाली (Modus Operandi)
आरोपित दल्दा (वनस्पति घी) और सस्ता रिफाइंड तेल bulk में खरीदते थे। इन्हें गर्म करके आपस में मिलाते और खुशबू, रंग व स्वाद के लिए रासायनिक पदार्थ डालते। पैकिंग असली ब्रांड जैसी करके दुकानों, डेयरियों और सप्लायर्स को बेचते। त्योहारों के सीजन में नकली घी की माँग बढ़ने पर धंधा चरम पर होता।



