नई दिल्ली: हाल ही में कारोलिंस्का इंस्टिट्यूट द्वारा किए गए एक शोध में यह खुलासा हुआ है कि जो लोग सही तरीके से नहीं सो पाते, उनके दिमाग की उम्र उनकी वास्तविक उम्र से अधिक दिखाई देती है। इस निष्कर्ष को eBioMedicine जर्नल में प्रकाशित किया गया है। शोध अध्ययन के अनुसार, शरीर में बढ़ी हुई सूजन (inflammation) इसकी एक संभावित वजह हो सकती है।
अध्ययन का उद्देश्य और तरीका
अच्छी नींद और मस्तिष्क की उम्र के बीच के सरोकार को समझने के लिए शोधकर्ताओं ने अपने इस शोध में 27,500 मध्य-आयु और बुजुर्ग लोगों के मस्तिष्क की MRI स्कैनिंग की। मशीन लर्निंग तकनीक का उपयोग करके उन्होंने मस्तिष्क की जैविक उम्र यानी व्यक्ति की biological age का अनुमान लगाया।
शोध में प्रतिभागियों की नींद की गुणवत्ता को पाँच मापदंडों पर मापा गया था जो निम्नलिखित हैं:
- क्रोनोटाइप
- नींद की अवधि
- अनिद्रा (insomnia)
- खर्राटे
- दिन में नींद आने की समस्या
अध्ययन का परिणाम
अध्ययन में यह पाया गया कि हर 1 अंक की कमी से मस्तिष्क की उम्र और वास्तविक उम्र के बीच का अंतर लगभग 6 महीने बढ़ गया हैं । जिन लोगों की नींद खराब थी, उनके मस्तिष्क की औसत उम्र उनकी वास्तविक उम्र से लगभग 1 साल ज्यादा थी।
Karolinska Institutet की न्यूरोबायोलॉजी विभाग की शोधकर्ता Abigail Dove ने कहा कि निष्कर्ष बताते हैं कि खराब नींद मस्तिष्क को जल्दी बूढ़ा कर सकती है और इसके पीछे सूजन एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। साथ ही उन्होंने आगे बतया की नींद सुधार कर मस्तिष्क की उम्र को बढ़ाया जा सकता है और संज्ञानात्मक क्षति (cognitive decline) को रोका जा सकता है।
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मुख्य कारण
- दिमाग की कचरा हटाने की प्रणाली (waste clearance system) पर नींद की कमी का नकारात्मक असर पढ़ना।
- इसके अलावा खराब नींद का हृदय स्वास्थ्य पर भी असर पढ़ता हैं , जो मस्तिष्क को प्रभावित कर सकता है।
निष्कर्ष
स्वस्थ नींद न केवल व्यक्ति के मस्तिष्क की उम्र को नियंत्रित करने में मदद कर सकती है, बल्कि यह दीर्घकालिक (long-term) बौद्धिक स्वास्थ्य के लिए भी जरूरी हैं।



