नई दिल्ली: दिल की धमनियों (Arteries) में ब्लॉकेज जिसे हम कोरोनरी आर्टरी डिजीज (CAD) भी कहते हैं, हार्ट अटैक की प्रमुख वजह मानी जाती है। समस्या यह है कि इसके शुरुआती लक्षण आसानी से सामने नहीं आते, जिसके कारण समय पर इलाज कठिन हो जाता है। लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब एम्स दिल्ली (AIIMS) के विशेषज्ञों ने इसे शुरुआती स्तर पर पहचानने का नया तरीका खोज निकाला है।
लार और यूरिन से की जाएगी शुरुआती पहचान
AIIMS के बायोफिजिक्स और कार्डियोलॉजी विभाग के डॉक्टरों ने अपने शोध में पाया कि अब लार और यूरिन के सैंपल से CAD की शुरुआती पहचान संभव हो सकती है। दरअसल यूरिन टेस्ट में यूरोमोडुलिन प्रोटीन को बायोमार्कर के रूप में पहचाना गया हैं। वही लार के टेस्ट में सिस्टैटिन-एस प्रोटीन पाया गया हैं। AIIMS विशेषज्ञों का कहना हैं कि इन दोनों प्रोटीन स्तरों में बदलाव CAD की शुरुआती अवस्था का संकेत देते हैं।
यूरिन प्रोटीन पर पहला अध्ययन
इहबास अस्पताल में वरिष्ठ वैज्ञानिक के रूप में काम कर रही डॉ. प्रतिभा शर्मा ने बताया कि यह पहला शोध एम्स में 90 लोगों पर किया गया। जिसमे 18 से 65 वर्ष आयु वर्ग के 45 CAD मरीज और 41 सामान्य लोग शामिल थे। हार्ट डिजीज के मरीजों के यूरिन में यूरोमोडुलिन प्रोटीन का स्तर सामान्य लोगों की तुलना में कम पाया गया। साथ ही जिन मरीजों में CAD हाल ही में हुआ था, उनमें यह स्तर और भी कम था। आपको बता दे कि यह शोध जर्नल ऑफ प्रोटिओमिक्स में प्रकाशित हो चुका है और इसे स्वास्थ्य मंत्रालय के स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग से फंड मिला था।
मौजूदा जांच से बेहतर विकल्प
अभी तक CAD की पहचान के लिए TMT स्ट्रेस टेस्ट, एंजियोग्राफी और सीटी एंजियोग्राफी जैसी काम्प्लेक्स और महंगी जांचों का सहारा लिया जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एम्स की यह नई खोज आने वाले समय में लोगो के लिए शुरुआती और आसान टेस्ट के रूप में इस्तेमाल हो सकती है।
निष्कर्ष
AIIMS दिल्ली के वैज्ञानिकों द्वारा किया गया यह शोध दिल की बीमारियों के इलाज में लोगो में नई उम्मीद जगाता है। अगर लार और यूरिन टेस्ट पर आधारित यह तकनीक बड़े स्तर पर लागू होती है, तो हार्ट अटैक के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है और बहुत लोगो की जान बचाई जा सकती हैं।



