पटना: बिहार विधानसभा चुनाव की गहमागहमी के बीच कांग्रेस पार्टी ने अपनी तैयारी तेज कर दी है। राजधानी पटना में हुई आंतरिक बैठकों और रणनीतिक चर्चाओं के बाद, रविवार को दिल्ली के इंदिरा भवन में कांग्रेस की स्क्रीनिंग कमेटी की लंबी बैठक आयोजित हुई। इस बैठक में बिहार विधानसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों के चयन पर गहन विचार-विमर्श किया गया। सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने 36 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम लगभग फाइनल कर दिए हैं। अब सिर्फ औपचारिक घोषणा बाकी है, जो दशहरा के बाद कभी भी हो सकती है।
2020 से अलग रणनीति
साल 2020 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को महागठबंधन (RJD के नेतृत्व में) से 70 सीटें मिली थीं। इनमें से कांग्रेस केवल 17 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी। पार्टी के अंदरूनी हलकों का कहना है कि उस समय कांग्रेस के उम्मीदवारों का चयन बड़ी हद तक राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की सहमति से हुआ था। कई सीटों पर कमजोर उम्मीदवार उतारे गए, जिसके चलते कांग्रेस को अपेक्षित परिणाम नहीं मिला। लेकिन इस बार कांग्रेस का आलाकमान साफ कर चुका है कि उम्मीदवारों का चयन हम अपने सर्वे और संगठन के फीडबैक के आधार पर करेंगे। यानी सीटों पर सीधे हाईकमान की पकड़ होगी।
पुराने चेहरों का टिकट कटा
बैठक में यह भी तय हुआ है कि कांग्रेस अपने कई पुराने चेहरों को इस बार टिकट नहीं देगी। पार्टी ने ग्राउंड रिपोर्ट, संगठन की राय और आंतरिक सर्वे के आधार पर यह फैसला लिया है। कुछ मौजूदा विधायकों को भी उनकी पुरानी सीट छोड़कर दूसरी विधानसभा सीट से उतारा जा सकता है।
महागठबंधन के समीकरण पर असर
हालांकि, सीट बंटवारे को लेकर महागठबंधन में अभी भी अंतिम सहमति नहीं बनी है। कांग्रेस नेताओं को यह निर्देश दिया गया है कि यदि किसी सीट का बंटवारा अंतिम समय में बदलता है और वह किसी अन्य सहयोगी पार्टी को मिलती है, तो कांग्रेस का फाइनल उम्मीदवार भी INDIA गठबंधन के प्रत्याशी का समर्थन करेगा।
बैठक में कौन-कौन रहे मौजूद?
दिल्ली में हुई इस अहम बैठक में कांग्रेस की ओर से बिहार के बड़े चेहरे मौजूद रहे-
- राजेश राम, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
- कृष्णा अल्लावरू, प्रदेश प्रभारी
- शकील अहमद खान, विधायक दल के नेता
- मदन मोहन झा, विधान पार्षद
वहीं, स्क्रीनिंग कमेटी के सदस्य के तौर पर कांग्रेस हाईकमान से जुड़े बड़े नेता शामिल हुए-
- अजय माकन
- इमरान प्रतापगढ़ी
- प्रदीप शिंदे
बैठक देर रात तक चली और एक-एक सीट पर लंबी चर्चा के बाद 36 उम्मीदवारों के नाम पर मुहर लगाई गई।
यह भी पढ़ें:- ‘बिहार के धृतराष्ट्र हैं नीतीश, 20 साल तक सिर्फ कुर्सी बचाई’
कांग्रेस का अगला कदम
कांग्रेस का इरादा है कि दशहरा के बाद इन उम्मीदवारों को आधिकारिक टिकट सौंपा जाएगा और उन्हें चुनावी मैदान में प्रचार शुरू करने का निर्देश दिया जाएगा। पार्टी चाहती है कि उम्मीदवार जल्द से जल्द बूथ स्तर तक सक्रिय हो जाएं। अब देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस के इस 36 फाइनल उम्मीदवारों वाले फैसले पर RJD और महागठबंधन के अन्य सहयोगी दल क्या रुख अपनाते हैं?



