भारत में स्कूल ड्रॉपआउट दर में कमी, शिक्षा क्षेत्र की उपलब्धि

भारत में स्कूल ड्रॉपआउट दर में पिछले दो वर्षों में कमी आई है। केंद्र और राज्य सरकारों की योजनाओं ने इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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नई दिल्ली: भारत ने शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। केंद्रीय सांख्यिकी मंत्रालय की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 से 2024-25 के बीच स्कूल ड्रॉपआउट दर में लगभग 50% की कमी दर्ज की गई है। विशेष रूप से मिडिल और सेकेंडरी स्तर पर यह कमी उल्लेखनीय है। मिडिल स्तर पर ड्रॉपआउट दर 8.1% से घटकर 3.5%, सेकेंडरी स्तर पर 13.8% से 8.2%, और प्रिपरेटरी स्तर पर 8.7% से 2.3% हो गई। यह उपलब्धि शिक्षा को सर्वसुलभ बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

सफलता के पीछे की रणनीतियां

इस बदलाव का श्रेय सरकार की कई योजनाओं को जाता है। मिड-डे मील योजना ने बच्चों को स्कूल में बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, क्योंकि पौष्टिक भोजन ने बच्चों को नियमित उपस्थिति के लिए प्रेरित किया। समग्र शिक्षा अभियान ने स्कूलों में बुनियादी ढांचे को बेहतर किया, जिससे शिक्षण प्रक्रिया आकर्षक और प्रभावी बनी। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 ने शिक्षा प्रणाली में लचीलापन लाकर छात्रों को विभिन्न अवसर प्रदान किए। इसके अलावा, आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए छात्रवृत्ति और वित्तीय सहायता ने बच्चों को स्कूल में बनाए रखने में मदद की।

राज्यों की उपलब्धियां

कई राज्यों ने इस दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है। उत्तर प्रदेश, दिल्ली और महाराष्ट्र ने प्रिपरेटरी स्तर पर शून्य ड्रॉपआउट दर हासिल की, जबकि झारखंड ने सेकेंडरी स्तर पर यह उपलब्धि प्राप्त की। हालांकि, पश्चिम बंगाल में सेकेंडरी स्तर पर 20.3% ड्रॉपआउट दर अभी भी एक चुनौती है।

बाकी चुनौतियां और भविष्य

हालांकि प्रगति सराहनीय है, लेकिन शिक्षा पर बढ़ता खर्च एक बड़ी बाधा है। ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूलों में प्रति छात्र औसत खर्च 2,639 रुपये है, जबकि निजी स्कूलों में यह 19,554 रुपये तक है। शहरी क्षेत्रों में यह अंतर और भी बड़ा है, जहां निजी स्कूलों का खर्च 31,782 रुपये तक पहुंचता है। इन खर्चों को कम करने और ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने की जरूरत है।

निष्कर्ष

भारत में स्कूल ड्रॉपआउट दर में कमी एक प्रेरणादायक कदम है। यह उपलब्धि सरकार, शिक्षकों और समाज के सामूहिक प्रयासों का परिणाम है। भविष्य में, शिक्षा को और अधिक किफायती और समावेशी बनाने से भारत शिक्षा के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छू सकता है। 

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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