पटना/भागलपुर: हिंदू धर्म में कई ऐसी पूजा-पद्धति और नियम- धर्म हैं, जो सबसे अलग हैं. साथ ही ऐसे मंदिर भी हैं, जो रहस्यमयी हैं। इस मंदिर में पूजा की परंपरा बिल्कुल अलग विधि-विधान से होती है. अभी पूरे देश भर में नवरात्रि से माहौल भक्तिमय बना हुआ है. इस दौरान मां दुर्गा की आराधना की जा रही है. इस अवसर पर मंदिर में मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की जाती है, लेकिन हम आज एक ऐसे मंदिर की बात करने जा रहे हैं जो सबसे अलग है. नवरात्रि के दौरान यहां पर मां दुर्गा की प्रतिमा स्थापित नहीं होती है, यहां मां काली की प्रतिमा स्थापित होती हैं और उनकी धूमधाम से आराधना की जाती है. यह मंदिर है भागलपुर जिले के सुल्तानगंज स्थित कासिमपुर में. इसे मां काली रक्षा काली के नाम से जानते हैं.
हिंदू-मुस्लिम होते हैं शामिल
करीब 400 से अधिक घर से बने इस मोहल्ले में आधे हिंदू और आधे मुस्लिम हैं. दोनों धर्म को मानने वाले भाईचारे के साथ रहते हैं और पूजा अर्चना में सब कोई शामिल होते हैं. इस मंदिर की स्थापना 1955 में हुई है. यहां जो कोई सच्चे मन से आते हैं सभी की मां काली रक्षा करती है और उनकी मन्नते पूरी भी करती हैं.
आपसी सौहार्द का मिसाल
पूजा समिति सदस्य नीरज पासवान ने बताया कि यह मंदिर आपसी सौहार्द का अद्भुत मिसाल पेश करता है. मुस्लिम भाई मेला लगने से लेकर विसर्जन शोभायात्रा में सहयोग करते हैं. इस मंदिर की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई है, इस वजह से जिले के अलावा अन्य पड़ोसी जिले से भी लोग यहां मनोकामना लेकर पहुंचते हैं और पूरी होने पर चढ़ावा चढ़ाने आते हैं. यहां मां को बलि दी जाती है. मंगलवार व शनिवार को भक्तों की भीड़ जुटती है.
हुआ था विवाद
मंदिर के पुजारी हीरालाल बताते हैं कि नवरात्र में दुर्गा प्रतिमा की मां काली की प्रतिमा स्थापित होती है जिसे रक्षा काली के नाम से हमलोग जानते हैं. वे बताते हैं कि श्रीमद भागवत कथा के दौरान कलश विसर्जन में रास्ता को लेकर विवाद हुआ. जिसके बाद वर्ष 1955 से दुर्गा पूजा के दौरान मां काली की प्रतिमा स्थापित कर पूजा अर्चना की शुरुआत हुई. इस अवसर पर धूमधाम से मेले का आयोजन किया जाता है.



