नई दिल्ली: देश की सुप्रीम अदालत ने बेशक आवारा कुत्तों को शेल्टर होम में रखने के अपने फैसले को संशोधित कर दिया है, लेकिन आवारा कुत्तों के काटने का खतरा बना हुआ है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बीते 37 माह में डॉग बाइट की करीब एक करोड़ केस अलग-अलग राज्यों में पंजीकृत हुए हैं। इसकी सूचना राज्य सरकारों की ओर से केंद्र को दी गई है। यही नहीं, इस अवधि में रिपोर्ट के अनुसार रेबिज से होने वाली मौत में भी मामूली वृद्धि हुई है। हालांकि, सरकार ने वर्ष 2030 रेबिज से होने वाली मौत के आंकड़े को शून्य करने का लक्ष्य तय किया है।
बढ़ रहे आंकड़ें
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम से मिली जानकारी के मुताबिक, 2022 में रेबीज से 21, 2023 में 50, 2024 में 54 और वर्ष-2025 के जनवरी माह में एक मौत रिपोर्ट की गई है। वहीं, इस अवधि में कुल 93.87 लाख डॉग बाइट के केस पंजीकृत किए गए हैं। तमाम प्रयासों के बाद देश में डॉग बाइट के मामलों में लगातार वृद्धि हो रही है और यह वृद्धि देखें तो करीब दोगुना हुई है। डॉग बाइट के मामले में वृद्धि को इन आंकड़ों से समझा जा सकता है…
वर्ष डॉग बाइट के मामले
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अुनसार विश्व में रेबीज से जितनी मौत होती है उसमें 96 फीसदी रेबीज की वजह डॉग बाइट ही है। सिर्फ एशिया की बात करें तो रेबीज से होने वाली मौत में भारत की हिस्सेदारी 59.9 फीसदी है वहीं विश्व की 35 फीसदी रेबीज मौत अकेले भारत में होती है। डॉग बाइट से लेकर दूसरे जानवरों के काटने और इसकी वजह से इलाज पर जो खर्च आता है उससे प्रति वर्ष 8.6 बिलियन डॉलर का आर्थिक बोझ पड़ता है।
बीते सालों में डॉग बाइट के मामले
- वर्ष मामले
- 2022- 21,89,909
- 2023-30,52,521
- 2024- 37,15,713
- 2025 (जनवरी)-4,29,664
सरकार ने एंटी रेबीज वैक्सीन की डोज पर बढ़ाया अपना खर्च
- वित्त वर्ष- राशि
- 2020-21- 275.28
- 2021-22- 281.60
- 2022-23- 475.00
- 2023-24- 1080.57
- 2024-25- 1423.41
नोट : राशि के आंकड़े लाख में है।
यहां लें रेबीज से संबंधित जानकारी
15400 पर कॉल करके रेबीज से संबंधित कोई भी जानकारी आप ले सकते हैं। यह हेल्पलाइन नंबर नेशनल रेबीज कंट्रोल प्रोग्राम की है।



