भारतीय बी-स्कूलों में AI का इस्तेमाल, लेकिन सिर्फ 7% फैकल्टी हैं एक्सपर्ट

हाल ही में हुए एक सर्वे में यह पाया गया कि भारत में बी-स्कूलों में AI का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा हैं लेकिन केवल 7% फैकल्टी ही AI के एक्सपर्ट यूजर हैं।

Share This Article:

नई दिल्ली: भारत के सबसे बेहतरीन बिजनेस स्कूलों (B-schools) में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का इस्तेमाल बहुत तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन चिंता की बात यह हैं की फैकल्टी में केवल 7% ही AI के एक्सपर्ट यूजर हैं। एमबीएयूनिवर्स डॉट कॉम (MBAUniverse.com) द्वारा किए गए एक सर्वे के मुताबिक, 235 फैकल्टी सदस्यों में 55% ‘इंटरमीडिएट यूजर’ हैं, जबकि सिर्फ 7% खुद को ‘एक्सपर्ट’ बताते हैं। यह स्थिति बी-स्कूलों में संरचित कैपेसिटी-बिल्डिंग प्रोग्राम्स की ज़रूरत को दर्शाती है।

सर्वे के मुख्य बातें

इस सर्वे में IIM, IIT, ISB, XLRI, SPJIMR, MDI और NMIMS जैसे प्रमुख संस्थानों के फैकल्टी शामिल हुए। सर्वे में 51% फैकल्टी ने माना कि AI का स्टूडेंट्स की पढ़ाई पर सकारात्मक असर पड़ रहा है। वहीं 21% ने कहा कि आकलन करना अभी जल्दी होगा और वही 18% ने इसके नकारात्मक असर की ओर इशारा किया।

AI के उपयोग के क्षेत्र

रिपोर्ट में बताया गया है कि फैकल्टी सदस्य AI का सबसे ज्यादा इस्तेमाल रिसर्च और टीचिंग में कर रहे हैं, जबकि पाठ्यक्रम (क्यूरिकुलम) विकास में भी इसका उपयोग बढ़ रहा है। प्रशासनिक कार्यों और छात्र मूल्यांकन में AI का प्रयोग अभी शुरुआती चरण में है, जिससे इस क्षेत्र में संरचित सहयोग और प्रशिक्षण की संभावनाएं हैं।

सबसे लोकप्रिय AI टूल्स

इस सर्वे के अनुसार शिक्षण से जुड़ी गतिविधियों में ChatGPT को सबसे प्रासंगिक AI टूल माना गया। इसके बाद Microsoft Copilot और Perplexity का नाम आता है। साथ ही Google Gemini और Claude को औसत रेटिंग मिली, जबकि Meta AI सबसे कम प्रासंगिक और लोकप्रिय पाया गया।

चुनौतियां और चिंताएं

सर्वे रिपोर्ट ने यह भी दिखाया कि रिसर्च में जनरेटिव AI के उपयोग में सबसे बड़ी चुनौती नैतिकता और ईमानदारी (Ethical & Integrity) से जुड़ी है। इसके अलावा गलत या अविश्वसनीय आउटपुट और नीतिगत दिशा-निर्देशों की कमी भी मुख्य रूकावट हैं।

विशेषज्ञों की राय

उच्च शिक्षा विभाग के सचिव विनीत जोशी ने कहा कि AI शिक्षा को बदल रहा है और इसे जिम्मेदारी के साथ अपनाना होगा। उन्होंने आगे कहा कि यह हर छात्र को सवाल पूछने की स्वतंत्रता देता है और भाषा, पृष्ठभूमि या भौगोलिक बाधाओं को पार करने में भी मदद करता है।

इंडियन मैनेजमेंट कॉन्क्लेव के चेयरमैन अमित अग्निहोत्री ने कहा, ‘हम ऐसे दौर में हैं जहां AI बिज़नेस प्रक्रियाओं को बदलने, नौकरियों और क्षमताओं को नए सिरे से परिभाषित करने और उच्च शिक्षा का स्वरूप बदलने की क्षमता रखता है। मैनेजमेंट एजुकेशन इस बदलाव के सबसे आगे है।’

निष्कर्ष

यह सर्वे हमे बताता है कि भारतीय बी-स्कूलों में AI की स्वीकार्यता तेज़ी से बढ़ रही है, लेकिन फैकल्टी को प्रशिक्षण और स्पष्ट नीतिगत मार्गदर्शन देने की अभी बहुत ज़रूरत है। सही दिशा में कदम उठाकर ही AI को शिक्षा जगत के लिए लाभकारी बनाया जा सकता हैं।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

https://newgindia.com/author/usha/

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.