घरेलू कलह में उलझे तेजस्वी!, रणनीति बनाने में जुटा NDA

किसी चुनाव में कौन-सा पक्ष अपने पिच पर विपक्ष को खेलने को मजबूर करता है, जीत-हार बहुत हद तक इसी पर निर्भर करती है। एसआईआर के मुद्दे पर एनडीए विपक्ष के पिच पर जाने को मजबूर था, लेकिन अब पासा पलट चुका है। पेश है वरिष्ठ पत्रकार उपेंद्र नाथ राय की रिपोर्ट-

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पटना। चुनाव में प्रमुख यह होता है कि कौन दूसरे को अपने पिच पर खेलने के लिए विवश करता है। इस रणनीति में पहले कांग्रेस आगे थी। राहुल गांधी और तेजस्वी यादव ने जब एसआईआर का मुद्दा उठाया, तो एनडीए को उनके पिच पर आना पड़ा। एनडीए का पूरा दिन एसआईआर पर जवाब देने में ही बीत गया। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। इसका कारण यह है कि कांग्रेस और महागठबंधन किसी भी मुद्दे को लंबे समय तक बनाए रखने में असफल रहते हैं।

इस बीच तेजस्वी पर घरेलू कलह हावी होता जा रहा है और कांग्रेस की जोरदार धमक की धार कुंद होती जा रही है। वहीं भाजपा के शीर्ष नेताओं के लगातार दौरे बिहार की सुर्खियां बनते जा रहे हैं, जिससे तेजस्वी और कांग्रेस को भाजपा-नीतीश के पिच पर खेलने को मजबूर होना पड़ रहा है। फिलहाल बिहार की महिलाओं को रोजगार के लिए दिए गए 10 हजार रुपये पर पूरा दिन विपक्ष उलझा रहा। प्रियंका गांधी का तो पूरा भाषण इसी पर केंद्रित रहा कि एनडीए सरकार महिलाओं को पैसे के बदले वोट खरीदने की फिराक में है।

कमराबंद बैठकों का दौर शुरू

उधर, भाजपा में कमराबंद बैठकों का दौर शुरू हो गया है। लगातार रणनीतियां बन रही हैं। भाजपा ने बिहार चुनाव में अवैध घुसपैठ, महिला सम्मान, मोदी का अपमान और मंदिर का मुद्दा जोर-शोर से उठाने का फैसला किया है। ये मुद्दे हिंदू समाज को एकजुट करने के लिए चुने गए हैं, ताकि बहुसंख्यक समाज में विभाजन न हो सके। अब कांग्रेस और तेजस्वी भी अपने जाति-आधारित अभियान को भूलकर भाजपा नेताओं का जवाब देते-देते दिख रहे हैं।

बूथ स्तर तक विचार पहुंचाने की तैयारी

भाजपा के विश्वस्त सूत्रों के अनुसार चुनाव का पूरा ब्लूप्रिंट तैयार हो चुका है। बूथ स्तर तक अपनी विचारधारा पहुंचाने और विपक्ष का जवाब समझाने के लिए मंडल और बूथ स्तर पर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं। मंडल स्तर पर पन्ना प्रमुखों तक का ग्रुप बनाया गया है, जिसके माध्यम से प्रचार सामग्री और वीडियो भेजे जा रहे हैं।

प्रोफेशनल हो चुकी है भाजपा

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा अब पूरी तरह प्रोफेशनल हो चुकी है। बूथ स्तर तक के कार्यकर्ताओं से हर काम का वीडियो और फोटो अपलोड कराया जाता है। उन पर लगातार निगरानी रहती है और गलतियों पर सुधार के लिए टीम मार्गदर्शन देती रहती है।

भाजपा का लक्ष्य 180 पार, नारा नहीं बनेगा

भाजपा ने सहयोगी दलों के साथ मिलकर 180 सीटों का लक्ष्य तय किया है। हालांकि, इसे लोकसभा चुनाव की तरह ‘400 पार’ जैसा नारा नहीं बनाया जाएगा, ताकि विपक्ष को डर दिखाने का मौका न मिले। इसके लिए पदाधिकारियों को बूथ स्तर पर जाकर रणनीति बनाने और पन्ना प्रमुखों को प्रशिक्षित करने का निर्देश दिया गया है।

भावनात्मक जुड़ाव पर जोर

भाजपा इस बार भावनात्मक जुड़ाव की रणनीति अपना रही है। इसी कड़ी में महिलाओं को रोजगार योजना के जरिए सीधे जोड़ा गया। केंद्र सरकार ने मौके पर आकर महिलाओं को संबोधित किया और केंद्र व राज्य सरकार द्वारा किए गए कार्यों की लंबी सूची गिनाई।

हिन्दुत्व के एजेंडे को धार

भाजपा हिन्दुत्व के एजेंडे को भी आगे बढ़ा रही है। प्रयास है कि चुनाव को बाहरी घुसपैठिये बनाम बिहारी, हिन्दुत्व बनाम अल्पसंख्यक और परिवार बनाम आमजन जैसे मुद्दों पर केंद्रित रखा जाए। नेताओं को अपनी सांस्कृतिक विरासत पर बोलने के निर्देश दिए गए हैं।

हर विधानसभा के हिसाब से रणनीति

पार्टी हर विधानसभा क्षेत्र में चरणबद्ध जनसंपर्क अभियान चलाने पर फोकस कर रही है। इसके लिए टीम तैनात की गई है। कार्यकर्ताओं को सौ से अधिक बार विधानसभा जाकर लोगों से मिलने और वार्ड-पंचायत स्तर पर बैठकें करने का निर्देश है।

मोदी होंगे प्रमुख चेहरा

इस चुनाव में भाजपा ने तय किया है कि चेहरा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे, न कि नीतीश कुमार। “डबल इंजन सरकार” और “विपक्ष लाचार” जैसे नारों की गूंज मोदी के नेतृत्व में सुनाई देगी। केंद्र की योजनाओं को प्रमुखता से रखा जाएगा।

गया और सीतामढ़ी में धार्मिक जुड़ाव

भाजपा ने पहले से ही गया और सीतामढ़ी जैसे धार्मिक स्थलों पर काम कराकर आस्था से जुड़ने की कोशिश की है। मोदी की रैलियां और वर्चुअल सभाएं निर्णायक असर डाल सकती हैं। मंदिर मुद्दा भी अहम रहेगा — सिर्फ अयोध्या ही नहीं, बल्कि गया और अन्य धार्मिक स्थल भी केंद्र में होंगे।

छोटे मंदिरों से नब्ज टटोलेगी भाजपा

भाजपा छोटे मंदिरों और धार्मिक आयोजनों को भी चुनावी मुद्दा बनाएगी। पार्टी का मानना है कि आस्था में तर्क की जगह नहीं होती। विपक्ष यदि इस पर बहस करेगा, तो खुद भाजपा की पिच पर खेलने को मजबूर हो जाएगा। महिला और युवा को अलग से टारगेट करने की रणनीति पहले से तैयार है।

Sandeep Kumar

sandeepx4a@gmail.com

संदीप कुमार एक अनुभवी वरिष्ठ पत्रकार हैं, जिन्हें समाचार जगत में 14 साल से ज्यादा काम किया है। इन्हें गहन शोध, सटीक रिपोर्टिंग और निष्पक्ष पत्रकारिता के लिए जाना जाता है। उन्होंने ETV Bharat, Hyderabad में साढ़े पाँच वर्षों तक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और राष्ट्रीय से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई अहम खबरों को प्रभावशाली अंदाज में प्रस्तुत किया। इसके साथ ही उन्होंने Network 10, TOTAL News, MH1 समेत कई प्रतिष्ठित मीडिया संस्थानों में भी अपनी पत्रकारिता का कौशल साबित किया। राजनीति, राष्ट्रीय सुरक्षा, समाज और जनसरोकार से जुड़े मुद्दों पर पकड़ मजबूत है। इस समय newG india में कार्यरत हैं।

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