नई दिल्ली: दिल्ली में शारदीय नवरात्रि, रामलीला और दशहरा जैसे धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजनों को देखते हुए सरकार ने लाउडस्पीकर की समय सीमा में बदलाव किया है। पहले रात 10 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने की अनुमति थी, लेकिन अब इसे बढ़ाकर रात 12 बजे तक कर दिया गया है। यह छूट 22 सितंबर से 3 अक्टूबर तक लागू रहेगी, यानी यह स्थायी नियम नहीं है। इस फैसले से आयोजकों को अपने कार्यक्रम पूरे करने में आसानी होगी, क्योंकि पहले समय सीमा के कारण कई आयोजन अधूरे रह जाते थे। आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि का स्तर 45 डेसिबल से अधिक नहीं होना चाहिए और आयोजकों को सिंगल विंडो सिस्टम के जरिए अनुमति लेनी होगी।
ध्वनि प्रदूषण के नियम
लाउडस्पीकर और ध्वनि नियंत्रण के नियम पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत ध्वनि प्रदूषण (नियंत्रण और अधिनियम), 2000 द्वारा निर्धारित हैं। सामान्य तौर पर, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बजाने पर पूर्ण प्रतिबंध है। विशेष अवसरों पर राज्य सरकारें अधिकतम 15 दिनों की छूट दे सकती हैं। दिल्ली में इस बार त्योहारों के लिए यह छूट दी गई है, लेकिन आयोजनों को तय समय पर समाप्त करना जरूरी है।
अन्य राज्यों में क्या है स्थिति?
दिल्ली के अलावा कई राज्यों में लाउडस्पीकर के उपयोग पर सख्त नियम लागू हैं। उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में रात 10 बजे के बाद लाउडस्पीकर पूरी तरह बंद करने के निर्देश हैं। महाराष्ट्र में सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए धार्मिक स्थलों पर लाउडस्पीकर के उपयोग पर कड़ाई बरती जा रही है। वहां दिन में ध्वनि सीमा 55 डेसिबल और रात में 45 डेसिबल निर्धारित है। बिना अनुमति के लाउडस्पीकर लगाने पर कार्रवाई की जाती है। अन्य राज्यों में भी ध्वनि प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए समय-समय पर नियमों में बदलाव किए जाते हैं।



