समस्तीपुर: डॉ राजेन्द्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय ने एनआइआरएफ रैंकिंग ऊंची छलांग लगाई है। इससे गदगद विवि के कुलपति डॉ पी एस पांडेय ने एक कार्यक्रम में कहा सभी के सहयोग से विश्वविद्यालय ने एनआईआरएफ रैंकिंग, आई आई आर एफ रैंकिंग सहित सभी रैंकिंग में अच्छा स्थान हासिल किया है।अच्छे रैंकिंग से जिम्मेदारी और बढ़ गई है। आने वाले वर्षों में और बेहतर रैंक कैसे करने का प्रयास किया जाएगा। इस मंथन कार्यक्रम से बेहतर सुझाव मिलेंगे जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बेहतर रैंकिंग के लिए प्रतिभागिता का प्रयास किया जाएगा।
अनुसंधान किसानों की समस्याओं पर किये जा रहे
विश्वविद्यालय में अब सभी कार्य पूर्ण पारदर्शिता से इ आफिस से हो रहे हैं। विश्वविद्यालय के अकादमिक और अनुसंधान के कार्य भी डिजिटल हो गये हैं। जो कुछ छूट गया है उसे भी आने वाले समय में डिजिटल कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अनुसंधान की गुणवत्ता बढ़ी है और लगभग सभी अनुसंधान किसानों की समस्याओं पर किये जा रहे हैं जिससे आने वाले समय में किसानों को बहुत फायदा होगा। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय डिजिटल एग्रीकल्चर और ड्रोन तकनीक में पूर्वी भारत में एक उल्लेखनीय केंद्र बनकर उभरा है। और देश भर में इसकी चर्चा हो रही है। उन्होंने प्राध्यापकों से आग्रह किया कि वे छात्रों को ध्यान में रख कर कार्य करें ताकि उनका समग्र विकास हो सके। उन्होंने कहा कि यदि इसमें कही भी नियमों को लेकर कोई विवशता है तो उन नियमों को बदल दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि कई ऐसे नियमों में परिवर्तन किया गया है और आगे भी किया जायेगा।
पूसा विवि देश भर तेज प्रगति हो रही
कार्यक्रम में मुख्य अतिथि डॉ के वीरेंजनेलु ने विभिन्न सरकारी आंकड़ों के माध्यम बताया कि पूसा विश्वविद्यालय देश भर के सभी विश्वविद्यालयों से तेज प्रगति हो रही है। उन्होंने कहा कि यदि प्रगति की यह रफ्तार बनी रही तो बहुत जल्द विश्वविद्यालय देश भर के विश्वविद्यालयों में पहला रैंक प्राप्त कर लेगा। उन्होंने कहा कि प्राध्यापकों को अच्छे जर्नल में रिसर्च पेपर प्रकाशित करना चाहिए इससे प्राध्यापकों को भी फायदा होगा और विश्वविद्यालय के रैंकिंग में भी और सुदृढ़ता मिलेगी। विश्वविद्यालय के प्रबंधन बोर्ड के सदस्य डॉ जयंकृष्ण झा ने कहा कि उन्हें गर्व है कि वे भी इस विश्वविद्यालय की प्रगति में सहभागी हैं। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की चर्चा देश में जहां भी जाते हैं उन्हें सुनने को मिलती है।
तीन वर्षों में तेरह से अधिक पेटेंट मिले
कुलसचिव डॉ मृत्युजंय कुमार ने कहा कि विश्वविद्यालय में पिछले तीन वर्षों में तेरह से अधिक पेटेंट मिले हैं। लगभग तेइस विभिन्न फसलों के प्रभेद रिलीज हुये है। चार सौ से अधिक ड्रोन पायलटों को ट्रेनिंग दी गई है। छात्रों ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का झंडा बुलंद किया है। इस सबके परिणामस्वरूप आज विश्वविद्यालय देश भर में श्रेष्ठ हुआ है और जल्दी ही श्रेष्ठतम बनेगा। उन्होंने अच्छे प्रदर्शन के लिए कुलपति के नेतृत्व की सराहना की। रैंकिंग कमिटी के चेयरमैन और फिशरीज कालेज के डीन डॉ पी पी श्रीवास्तव ने रैंकिंग के विभिन्न आयामों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि रैंकिंग बेहतर बनाने में सभी शिक्षकों का योगदान है। निदेशक अनुसंधान डॉ ए के सिंह ने विश्वविद्यालय के अनुसंधान को और बेहतर बनाने के उपायो पर चर्चा की।
निदेशक शिक्षा डा उमाकांत बेहरा ने विश्वविद्यालय की शिक्षा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर श्रेष्ठ बनाने को लेकर अपनी कार्ययोजना प्रस्तुत की। निदेशक पीजीसीए ने कार्यक्रम की रूपरेखा के बारे में विस्तार से जानकारी दी और सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम के दौरान रैंकिंग समिति के सभी सदस्यों को सम्मानित किया गया। कृषि व्यवसाय एवं ग्रामीण प्रबंधन संस्थान के निदेशक डॉ रामदत्त ने धन्यवाद ज्ञापन किया। कार्यक्रम के दौरान डीन कम्युनिटी साइंस डा उषा सिंह, डीन बेसिक साइंस डा अमरेश चंद्रा, डॉ घनश्याम झा , डॉ महेश कुमार, डॉ शिवपूजन सिंह, डॉ महेश कुमार, डॉ कुमार राज्यवर्धन समेत विभिन्न शिक्षक वैज्ञानिक एवं पदाधिकारी उपस्थित रहे ।



