नई दिल्ली: भारत की अर्थव्यवस्था तेज कदमों से आगे बढ़ रही है। एक ओर जहां करीब 80 करोड़ लोग राशन कार्ड पर निर्भर हैं, वहीं दूसरी तरफ अमीरों की तादाद इतनी तेजी से बढ़ रही है कि यह वैश्विक स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है। नई रिपोर्ट्स बताती हैं कि देश में हर 30 मिनट में एक नया करोड़पति परिवार उभर रहा है और अगर अरबपतियों की बात करें, तो हर पांचवें दिन एक नया नाम जुड़ रहा है। यह बदलाव स्टार्टअप्स, शेयर बाजार की तेजी और टेक सेक्टर के बूम का नतीजा है। लेकिन सवाल यह है कि इस मामले में भारत दुनिया में कहां खड़ा है? आइए, नई रिपोर्ट के आंकड़ों से समझते हैं।
रिपोर्ट के प्रमुख आंकड़े
मर्सिडीज-बेंज हुरुन इंडिया वेल्थ रिपोर्ट 2025 के अनुसार, देश में करोड़पतियों की संख्या में जबरदस्त इजाफा हुआ है। 2021 में जहां 4.58 लाख परिवारों की संपत्ति 8.5 करोड़ रुपये या इससे ज्यादा थी, वहीं 2025 तक यह आंकड़ा बढ़कर 8.71 लाख हो गया। यानी सिर्फ चार सालों में लगभग 90 फीसदी की ग्रोथ हुई है। यह परिवार कुल घरेलुओं का 0.31 फीसदी हैं, जो भारत को दुनिया के तेजी से अमीर बनने वाले देशों में शुमार करता है। रिपोर्ट में करोड़पति का मतलब ऐसी संपत्ति से है जो कम से कम एक मिलियन डॉलर (लगभग 8.5 करोड़ रुपये) के बराबर हो।
अरबपतियों का वैश्विक स्थान
हुरुन ग्लोबल रिच लिस्ट 2025 के मुताबिक, भारत अब अरबपतियों की संख्या में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा देश बन चुका है। अमेरिका (870 अरबपति) और चीन (823) के बाद भारत में 284 अरबपति हैं, जो पिछले साल से 13 ज्यादा हैं। कुल मिलाकर दुनिया में 3,442 अरबपति हैं और भारत का योगदान इसमें उल्लेखनीय है। यहां हर पांच दिन में एक नया अरबपति बनना आर्थिक विकास की गति को दर्शाता है। मुकेश अंबानी सबसे अमीर भारतीय हैं, जिनकी संपत्ति 100 बिलियन डॉलर है, उसके बाद गौतम अडानी। रिपोर्ट कहती है कि भारतीय अरबपतियों की औसत संपत्ति चीन से ज्यादा हो गई है।
शहरों और राज्यों में अमीरी का वितरण
रिपोर्ट में मुंबई को करोड़पतियों की राजधानी बताया गया है, जहां 1.42 लाख ऐसे परिवार रहते हैं। महाराष्ट्र इस मामले में नंबर वन राज्य है, जिसमें कुल 1.78 लाख करोड़पति परिवार हैं। इसके बाद तमिलनाडु (72,600), दिल्ली (68,200) और कर्नाटक (68,800) का स्थान है। बेंगलुरु में 31,600 करोड़पति परिवार हैं। ये आंकड़े तकनीक, फाइनेंशियल सर्विसेज, स्टार्टअप्स और रियल एस्टेट के विकास को दिखाते हैं। टियर-2 शहर जैसे अहमदाबाद, सूरत और हैदराबाद भी अब उभरते हब बन रहे हैं।
आगे की राह
भारत का यह सफर बताता है कि आर्थिक ग्रोथ का फायदा ऊपरी तबके तक पहुंच रहा है, लेकिन असमानता भी बढ़ रही है। रिपोर्ट का अनुमान है कि 2035 तक करोड़पतियों की संख्या 17-20 लाख तक पहुंच सकती है। यह बदलाव नई पीढ़ी की महत्वाकांक्षाओं और बाजार की मजबूती का प्रमाण है।



