नई दिल्ली: अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो (Marco Rubio) ने हाल ही में भारत (US-India Trade Tension) द्वारा रूस से तेल खरीद (Russia Oil Imports) पर अपनी कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उनका कहना है कि ट्रंप प्रशासन (Trump Administration) को उम्मीद है कि भारत इस मामले में उठाए गए कदमों को सुधार लेगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह मुद्दा केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि यूरोप के कई देशों पर भी लागू होता है, जो अब भी रूस से तेल और गैस की खरीद जारी रखे हुए हैं। रूबियो ने यूरोप की आलोचना करते हुए कहा कि वे अमेरिका से अधिक प्रतिबंध लगाने की मांग करते हैं, लेकिन खुद ठोस कदम नहीं उठाते।
भारत पर बढ़ा टैरिफ बोझ
रूस से ऊर्जा आयात को लेकर अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। इस फैसले के बाद भारत पर कुल अमेरिकी शुल्क लगभग 50 प्रतिशत तक पहुंच गया है, जो विश्व स्तर पर सबसे ऊंचा माना जा रहा है। यह कदम दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद व्यापारिक तनाव को और गहरा कर सकता है।
पुतिन और ट्रंप की बातचीत
रूबियो ने यह भी कहा कि राष्ट्रपति ट्रंप (Donald Trump) ने रूस-यूक्रेन संघर्ष को लेकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन (Vladimir Putin) से अपनी गहरी निराशा जाहिर की थी। अगस्त में अलास्का में हुई शिखर वार्ता के बावजूद ट्रंप की यह असंतुष्टि बनी रही।
जयशंकर और रूबियो की मुलाकात
संयुक्त राष्ट्र महासभा के 80वें सत्र के दौरान रूबियो ने भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर (S. Jaishankar) से मुलाकात की। यह बैठक लगभग एक घंटे तक चली और इसमें व्यापार, टैरिफ और रूस से भारत की ऊर्जा खरीद पर विस्तृत चर्चा हुई। हाल के महीनों में बढ़ते मतभेदों के बीच यह दोनों नेताओं की पहली आमने-सामने की बैठक थी।
ईरान ने अमेरिका से बातचीत से किया इनकार
दूसरी ओर, पश्चिम एशिया से एक अहम खबर आई है। ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई ने साफ कहा है कि उनका देश परमाणु कार्यक्रम को लेकर अमेरिका के साथ किसी भी प्रकार की सीधी बातचीत नहीं करेगा।
राष्ट्रपति पेजेशकियन पर दबाव
खामेनेई का यह बयान ऐसे समय पर आया है जब ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने न्यूयॉर्क पहुंचे हैं। माना जा रहा है कि यह टिप्पणी पेजेशकियन की कूटनीतिक पहल को सीमित कर सकती है और अमेरिका-ईरान संवाद की संभावनाओं को लगभग खत्म कर सकती है।
परमाणु गतिविधियां और अमेरिकी रुख
खामेनेई ने अपने भाषण में कहा कि अमेरिका बातचीत नहीं, बल्कि आदेश थोप रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका के दबाव के चलते ईरान की परमाणु गतिविधियां और संवर्धन कार्य रुक गए हैं, जबकि इसे बातचीत का नतीजा बताया जा रहा है।
यूरोपीय रुख
जर्मन समाचार एजेंसी डीपीए की रिपोर्ट के अनुसार, जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल पहले ही कह चुके हैं कि ईरान के साथ किसी नए समझौते की संभावना बहुत कम है। इससे साफ है कि पश्चिमी देशों और ईरान के बीच विश्वास की खाई और चौड़ी होती जा रही है।
अमेरिका-भारत संबंधों में रूस से तेल आयात बड़ा विवाद बना हुआ है, वहीं ईरान-अमेरिका के बीच परमाणु मुद्दे पर संवाद की राह लगभग बंद होती दिख रही है। यह दोनों घटनाएं आने वाले समय में वैश्विक कूटनीति और ऊर्जा बाजार को गहराई से प्रभावित कर सकती हैं।



