DUSU अध्यक्ष आर्यन मान को मिलेगी कितनी सैलरी?

DUSU अध्यक्ष आर्यन मान को कोई सैलरी नहीं मिलती, लेकिन 20 लाख रुपये का बजट संगठन को मिलता है, जो छात्र गतिविधियों के लिए खर्च होता है।

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नई दिल्ली: दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ (DUSU) के 2025 चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने धमाकेदार प्रदर्शन करते हुए अध्यक्ष समेत तीन अहम पदों पर जीत हासिल की। इस बार आर्यन मान नए DUSU अध्यक्ष बने हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि इस प्रतिष्ठित पद पर कोई सैलरी नहीं मिलती? जी हां, अध्यक्ष को कोई मासिक वेतन नहीं दिया जाता, बल्कि संगठन को 20 लाख रुपये का सालाना बजट मिलता है। यह राशि छात्र कल्याण, सांस्कृतिक आयोजनों, इवेंट्स और रिसर्च प्रोजेक्ट्स के लिए खर्च होती है, न कि निजी इस्तेमाल के लिए। आइए, इस जीत, बजट और अध्यक्ष की भूमिका पर नजर डालें।

ABVP की जीत और NSUI का प्रदर्शन

इस बार के DUSU चुनाव में ABVP ने अध्यक्ष (आर्यन मान), सचिव (कुणाल चौधरी) और संयुक्त सचिव (दीपिका झा) के पदों पर कब्जा किया। पहली मतगणना से ही ये उम्मीदवार आगे रहे और अंत में जीत पक्की की। दूसरी ओर, कांग्रेस समर्थित NSUI केवल उपाध्यक्ष पद (राहुल झांसल) जीत सका। NSUI के अध्यक्ष उम्मीदवार जोसलिन नंदिता चौधरी, सचिव उम्मीदवार कबीर और संयुक्त सचिव उम्मीदवार लवकुश भड़ाना को हार का सामना करना पड़ा। गुरुवार को हुए मतदान में 39.45% वोटिंग दर्ज की गई, जो पिछले सालों से थोड़ा कम रही।

DUSU अध्यक्ष को सैलरी नहीं, लेकिन बजट मिलता है

DUSU अध्यक्ष का पद भले ही ग्लैमरस और शक्तिशाली हो, लेकिन इसमें कोई निश्चित वेतन नहीं है। इसके बजाय, संगठन को 20 लाख रुपये का बजट मिलता है। यह राशि यूनिवर्सिटी के छात्रों के लिए इवेंट्स, सेमिनार और अन्य गतिविधियों पर खर्च होती है। अध्यक्ष इस बजट का प्रबंधन करता है, लेकिन इसका निजी उपयोग पूरी तरह वर्जित है। यह व्यवस्था सुनिश्चित करती है कि फंड्स का इस्तेमाल सिर्फ छात्र हित में हो।

अध्यक्ष की पावर और जिम्मेदारियां

DUSU अध्यक्ष का रोल सिर्फ नाम का नहीं, बल्कि जिम्मेदारियों से भरा है। उन्हें अलग ऑफिस, प्रशासनिक बैठकों में हिस्सेदारी और यूनिवर्सिटी के फैसलों पर आपत्ति जताने का अधिकार मिलता है। हॉस्टल, फीस या कैंपस सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को हल करने में अध्यक्ष हजारों छात्रों का नेतृत्व करता है। 11 महीने के कार्यकाल में वे यूनिवर्सिटी की नीतियों को प्रभावित करते हैं और विरोध प्रदर्शन तक आयोजित कर सकते हैं। यह पद कई नेताओं के लिए राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखने का लॉन्चपैड भी बनता है।

11 महीने का कार्यकाल, फिर नए चुनाव

DUSU के सभी पदों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, सचिव, संयुक्त सचिव का कार्यकाल 11 महीने का होता है। 12वें महीने में नए चुनाव होते हैं, जहां संगठन अपने उम्मीदवार उतारते हैं। अध्यक्ष का पद सबसे प्रभावशाली माना जाता है, क्योंकि यह कैंपस की हर गतिविधि का केंद्र होता है।

सैलरी नहीं, सेवा का मौका

आर्यन मान के लिए DUSU अध्यक्ष बनना एक बड़ा मौका है, लेकिन यह सैलरी से ज्यादा जिम्मेदारी का पद है। 20 लाख का बजट और नेतृत्व की शक्ति उन्हें छात्रों के लिए काम करने का अवसर देती है। यह जीत ABVP की ताकत दिखाती है और NSUI के लिए रणनीति बदलने का संकेत देती है।

Usha Mehta

ushamehta0013@gmail.com

NewG India का सबसे युवा चेहरा, दिल्ली विश्वविद्यालय से हिंदी पत्रकारिता में स्नातक की डिग्री हासिल की। ग्रेजुएशन के बाद IGNOU और ABP न्यूज़ नेटवर्क जैसे संस्थानों में इंटर्नशिप की। सोशल और कॉमर्स विषयों की गहरी समझ हैं कलम के साथ आवाज में भी धार हैं। NewG India में बतौर कंटेंट डेवलपर व एंकर अपनी जिम्मेदारी उषा मेहता बखूबी निभा रही हैं ।

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