राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन (NCH) ने एक पहल शुरू की है, जिसमें GST शिकायतों का समाधान किया जाएगा। इसके लिए इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम पोर्टल पर एक श्रेणी शुरू की गई है। इस श्रेणी में ऑटोमोबाइल, बैंकिंग, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुएं, ई-कॉमर्स, एफएमसीजी और अन्य सहित प्रमुख उप-श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें जीएसटी से संबंधित शिकायतें दर्ज की जाएंगी।
इस पहल की तैयारी के लिए, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) ने प्रशिक्षण सत्र भी आयोजित किया है ताकि NCH परामर्शदाताओं को GST से संबंधित प्रश्नों और शिकायतों का प्रभावी ढंग से समाधान करने में योग्य बनाया जा सके।
राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन के बारे में
देश भर के उपभोक्ताओं की शिकायत दर्ज कराने हेतु एकीकृत केंद्र के रूप में उभरा है। उपभोक्ता अब टोल-फ्री नंबर 1915 या इंटीग्रेटेड ग्रीवांस रिड्रेसल सिस्टम के माध्यम से 17 भाषाओं (हिंदी, अंग्रेजी, कश्मीरी, पंजाबी, नेपाली, गुजराती, मराठी, कन्नड़, तेलुगु, तमिल, मलयालम, मैथिली, संथाली, बंगाली, उड़िया, असमिया और मणिपुरी सहित) में अपनी शिकायतें दर्ज करा सकते हैं। यह आईटी-सक्षम प्लेटफ़ॉर्म व्हाट्सएप, एसएमएस, ईमेल, एनसीएच ऐप, वेब पोर्टल और उमंग ऐप सहित कई पंजीकरण मोड का समर्थन करता है, जो उपभोक्ताओं को सुविधा और सुगमयता प्रदान करता है।
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क्या है जीएसटी रिफॉर्म
जीएसटी काउंसिल की 56वीं बैठक में भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में एतिहासिक बदलाव किए गए। सरकार ने जीएसटी रिफॉर्म करते हुए चार स्लैब आधारित जीएसटी व्यवस्था को दो-स्लैब व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया। ये नवीनतम सुधार 22 सितम्बर से सम्पूर्ण देश में लागू हो जायेंगे। सरकार के अनुसार ये सुधार जीएसटी संरचना को एक सरल रूप देंगे। पहले की चार स्लैब आधारित व्यवस्था को हटाकर 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत की दो-स्लैब आधारित प्रणाली से कराधान अधिक पारदर्शी और सुगम हो जायेंगा। वहीं डिमेरिट गुड्स और लक्जरी उत्पादों पर 40 प्रतिशत की दर राजस्व संतुलन सुनिश्चित करेगी।



