पटना: इन दिनों बिहार की राजनीति गरम है। हर राजनीतिक दल बाहर से हर जाति को लुभाने की कोशिश कर रहे हैं और भीतर से जातिगत समीकरण बैठाने में जुटे हुए हैं। एक तरह “इंडिया” ब्लाक मुस्लिम और यादव के गठजोड़ पर विशेष ध्यान दे रहा है। वहीं नीतिश की अगुवाई में एनडीए महिला और युवाओं को आकर्षित करने में लगा हुआ है। इसको कम शब्दों में कहे तो, दोनों ही गठबंधन एमवाई फैक्टर को साधने में जुटे हैं। तेजस्वी का एमवाई मुस्लिम-यादव गठजोड़ है तो वहीं नीतिश का एमवाई महिला-युवा गठजोड़ है।
बिहार भाजपा के सचिव संतोष रंजन राय का कहना है कि भाजपा कभी जातिगत राजनीति नहीं करती। केन्द्र हो या राज्य की नीतिश कुमार की अगुवाई वाली सरकार हर समाज, हर धर्म की प्रगति के लिए काम किया है। महिलाओं और युवाओं पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की विशेष नजर रहती है और उनकी प्रगति पर हर वक्त् ध्यान देते हैं। नीतिश कुमार ने भी महिलाओं की प्रगति पर विशेष ध्यान दिया है। आज हर वर्ग की महिला नीतिश की सरकार से खुश है।
तेजस्वी के एमवाई में 31.96 प्रतिशत आबादी
बिहार में जहां यादव वर्ग की आबादी 1.63 करोड़ अर्थात कुल आबादी का 14.26 प्रतिशत है। वहीं मुसलमान वर्ग की आबादी 2.30 करोड़ अर्थात 17.70 प्रतिशत है। दोनों को मिला देने से 31.96 प्रतिशत हो जाता है, जो किसी को प्रदेश की कुर्सी तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाएगा। अब भाजपा और नितिश की कोशिश है कि मुसलमान और यादव बिरादरी में भी कैसे सेंध लगाया जाय। इसके लिए दोनों महिला वर्ग पर विशेष ध्यान देने बात पर काम कर रहे हैं। भाजपा तीन तलाक वाले मुद्दे को याद करते हुए यह मान रही है कि मुस्लिम महिलाएं खुलकर नहीं, लेकिन बूथ तक पहुंचने पर उनके पक्ष में वोटिंग कर सकती हैं।
आधी आबादी पर काम कर रहे नीतिश
बिहार की नौकरियों में 35 प्रतिशत तक महिलाओं को आरक्षण देकर नीतिश सरकार ने मास्टर स्ट्रोक चल दिया है। कभी राज्य में हासिए पर रहीं महिलाएं आज हर नौकरी में पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही हैं। इससे महिलाओं में उत्साह भी बढ़ा है और नीतिश सरकार के प्रति महिलाओं का रूख सकारात्मक भी है।
पहले भी महिलाओं का रूख नीतिश के प्रति रहा है सकारात्मक
बिहार में पिछले तीन चुनावों का देखा जाय तो 2010, 2015 और 2020 में महिला वोटर्स पुरुष की अपेक्षा ज्यादा मतदान की थीं। लोकनीति-सीएसडीएस का सर्वे बताता है कि एनडीए की सत्ता बचाए रखने में महिलाओं की अहम भूमिका रही। महिला वोटरों ने एनडीए को जहां 41 प्रतिशत वोट किया, वहीं इंडिया ब्लाक को 31 प्रतिशत महिलाओं ने वोट दिया था।
महिलाओं के लिए शुरु की गई योजनाओं से नीतिश को लाभ की उम्मीद
बिहार में नीतिश कुमार ने महिलाओं के लिए मुख्यमंत्री बालिका साइकिल योजना और पंचायती राज संस्थाओं में पचास प्रतिशत आरक्षण की व्यवस्था की। इसके बाद महिलाओं की सोच बदली और वे खुलकर नीतिश के पक्ष में आने लगीं। नौकरियों में 35 प्रतिशत तक आरक्षण देने के बाद महिलाओं का नीतिश सरकार के प्रति रूख और अधिक सकारात्मक हुआ है।
बदल रहा मतदान का ट्रेंड
पहले से मतदान का ट्रेंड भी बहुत कुछ बदल चुका है। पहले जहां मुहल्ले का एक प्रमुख व्यक्ति होता था और उसके कहने पर पूरा गांव वोट करता था। वहीं अब पति भी पत्नी पर किसी पार्टी को वोट करने का दबाव नहीं बनाता। पति कहीं और पत्नी दूसरी और पुत्र कहीं अन्य जगह वोट करता है। इसको ध्यान में रखकर भाजपा व नीतिश रणनीति बना रहे हैं। इसी को ध्यान में रखकर एक तरफ मुस्लिम महिलाओं को अपनी ओर आकर्षित करने में लगे हैं, तो दूसरी तरफ मुस्लिम समाज के पसंमादा मुस्लमानों पर भी डोरे डाल रहे हैं।
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किसी मुद्दे को लपकना जानती है भाजपा
भाजपा किसी भी मुद्दे को लपकना भी बहुत अच्छी तरह जानती है और कोई मौका गंवाना नहीं चाहती। उदाहरण के तौर पर राहुल और तेजस्वी द्वारा निकाली गयी यात्रा के दौरान एक मंच से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मां को कहे गये अपशब्द को भाजपा ने राष्ट्रीय स्तर का मुद्दा बना दिया। उस मुद्दे ने तेजस्वी और राहुल के बढ़ रहे तेज को ब्रेक लगा दिया। दोनों ही पार्टिंयां बैकफुट पर आ गयीं, जबकि कौन कहा था, यह आज तक पता नहीं चल सका।
राजनीतिक विश्लेषक ने कहा
राजनीतिक विश्लेषक राजीव रंजन सिंह का कहना है कि भाजपा किसी मुद्दे को भुनाना अच्छी तरह जानती है। किस मुद्दे को कहां और कितना हद तक उठाना है,इस पर उनका होम वर्क दूसरी पार्टियों की अपेक्षा ज्यादा है। यही कारण है कि हर समय इंडिया के पक्ष में जाते जनाधार को भाजपा गठबंधन अंत तक अपने पक्ष में मोड़ने में कामयाब हो जाता है।



