पंजाब में आप के साफ होने के बाद दिल्ली में आएगी कांग्रेस की बारी : देवेन्द्र यादव

क्या कांग्रेस कभी फिर से खड़ी हो सकेगी ? उसकी रणनीति क्या है? इन सभी मुद्दों पर न्यू जी इंडिया के स्टूडियो में दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव से बात की गुलशन राय खत्री ने। पेश है, उसी बातचीत के कुछ अंश

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दिल्ली में कांग्रेस ने लगातार 15 साल तक शासन किया। 1998 में बीजेपी को हराने के बाद कांग्रेस सत्ता में आयी तो बीजेपी के लिए उसे हराना बड़ी चुनौती बन गया लेकिन 2015 के बाद हालत ये हो गई है कि दिल्ली से लोकसभा तो दूर विधानसभा तक में पिछले तीन बार से कांग्रेस शून्य पर आउट होती रही है। ऐसे में कांग्रेस का क्या भविष्य है ? क्या कांग्रेस कभी फिर से खड़ी हो सकेगी ? उसकी रणनीति क्या है? इन सभी मुद्दों पर न्यू जी इंडिया के स्टूडियो में दिल्ली कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव से बात की गुलशन राय खत्री ने। पेश है, उसी बातचीत के कुछ अंश :

सवाल : देवेन्द्र जी, छह महीने पहले दिल्ली विधानसभा के चुनाव हुए। एक बार फिर कांग्रेस को निराशा मिली। लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी की जगह बीजेपी की सरकार बन गई। इस सरकार के अब तक के कामकाज को किस तरह से देखते हैं ?

जवाब : देखिए दिल्ली की राजनीति में बदलाव तो आया। दिल्ली वालों ने 15 साल कांग्रेस की सरकार भी देखी और दस साल आप की भी। इस बार बीजेपी को मौका मिला। बीजेपी ने इस बार चुनाव से पहले बड़ी बड़ी बातें कीं। महिलाओं को नकद सहायता देने, पर्यावरण ठीक करने, यमुना की सफाई जैसे कई वायदे किए। लेकिन बीते सात महीने का काम देखें तो बीजेपी सरकार के नाम पर एक ही उपलब्धि है कि इस दौरान उन्होंने 15 हजार परिवारों को बेघर कर दिया। ये वही बीजेपी थी, जिसके नेता झुग्गियों में जाकर कहते थे कि उनकी झुग्गी की जगह मकान बनाकर देंगे। लेकिन मकान की जगह उनकी झुग्गी हटा दी। ये उनके साथ अन्याय है। मुझे याद है कि जब शीला दीक्षित सरकार थी तो उस समय लोगों को रोजगार, सोशल सिक्योरिटी  मिलती थी। अब लोगों की ये उम्मीदें पूरी नहीं होती। मुझे लगता है कि बीजेपी गरीबी नहीं, गरीब को हटाना चाहती है और उसी दिशा में कदम बढ़ाते दिखती है।

सवाल : लेकिन मेरा सवाल है कि अगर शीला दीक्षित सरकार का काम इतना अच्छा था तो पिछले तीन विधानसभा चुनाव से कांग्रेस शून्य पर ही आउट क्यों हो रही है। लोकसभा चुनाव में भी दिल्ली में यही स्थिति क्यों बनी हुई है ?

जवाब : मैं मानता हूं।दिल्ली में 15 साल हमारी सरकार थी। उसी दौरान दस साल केंद्र में भी हमारी सरकार थी। हमारी सरकारों ने यथासंभव जनहित के काम किए। दिल्ली का इंफ्रास्ट्रक्चर बेहतर किया। पर्यावरण के लिए भी काम हुआ। लेकिन इसके बावजूद बदलाव प्रकृति का नियम है। उसी दौरान अरविंद केजरीवाल के नाम का बहुरुपिया आया और उन्होंने बदलाव का नारा दिया। नारा देने के दौरान वे बहुत सिंपल लगते थे और खुद को पढ़ा लिखा और कमिश्नर कहते थे। जबकि सच्चाई है कि वे कभी कमिश्नर रहे भी नहीं। दिल्ली की भोली जनता उनकी बातों में आ गई और हम 2013 के विधानसभा चुनाव में आठ सीटों पर ही सिमट गए। उस दौरान केजरीवाल की 45 दिन की सरकार रही।

सवाल : लेकिन 45 दिन की केजरीवाल सरकार भी तो तभी बनी, जब कांग्रेस ने उन्हें समर्थन दिया। अगर इतनी ही खराबी थी तो कांग्रेस ने आप को सरकार बनाने के लिए समर्थन क्यों दिया ?

जवाब : बिलकुल उसे हम अपनी गलती मानते हैं और उसका खामियाजा आज तक कांग्रेस को भुगतना पड़ रहा है। मुझे लगता है कि दिल्ली में दो ही पार्टी की जगह है। इनमें दिल्ली के वो लोग जो बीजेपी का समर्थन करते हैं और दूसरे वो लोग, जो बीजेपी के खिलाफ हैं। बीजेपी के एंटी स्पेस में कांग्रेस पूरी तरह से फिट थी। लेकिन आम आदमी पार्टी लोगों को बहकाने में कामयाब रही। आम आदमी पार्टी ने लोगों को सब कुछ फ्री देने, करप्ट लोगों को खत्म करने, करप्ट लोगों को जेल भेजने का वादा किया और इस तरह से कांग्रेस का वोट उसके साथ चला गया।

लेकिन अब आम आदमी पार्टी के नेताओं की असलियत सामने आने लगी थी। ऐसे में हमें इस बार कामयाबी की उम्मीद थी। हालांकि आप जरुर 62 से 22 पर आ गई लेकिन कांग्रेस लोगों को ये विश्वास नहीं दिला सकी कि वह सरकार बनाने जा रही है।

सवाल : आपकी पार्टी भी तो डिलेमा में रही कि कांग्रेस और आप मिलकर लड़ेंगे या अलग अलग ? फिर आपकी सेंट्रल लीडरशिप भी खुलकर सामने नहीं आयी ? सीनियर लीडर भी काफी बाद में चुनाव प्रचार में उतरे ?

जवाब : ये ठीक है कि हमारी पार्टी से जो गलती 2013 में हुई, वही 2024 में भी हुई।लेकिन कई बार अपने टारगेट को पाने के लिए दो कदम पीछे भी हटना पड़ता है। लोकतंत्र को कमजोर करने वाली बीजेपी को रोकने के लिए कांग्रेस ने आप से हाथ मिलाया और उसका खामियाजा भी भुगता। लेकिन अब आप की पोल खुल चुकी है। आप और उसके नेता खुद ही करप्शन में लिप्त नजर आए हैं। दूसरी ओर मुझे याद नहीं आता कि कांग्रेस के किसी नेता के खिलाफ कोई आरोप साबित हो पाया।

सवाल : आप खुद पंजाब कांग्रेस के प्रभारी हैं। ऐसा तो नहीं कि आने वाले टाइम में पंजाब में कांग्रेस, फिर से आप के साथ हाथ मिलाकर चुनाव लड़ती नजर आएगी?

जवाब : बिल्कुल नहीं। याद करें। 2024 में भी पंजाब में कांग्रेस के साथ मिलकर लड़ने का दबाव था। लेकिन हम वहां प्रमुख विपक्षी दल थे इसलिए हमारी पार्टी ने फैसला लिया और कांग्रेस ने अकेले चुनाव लड़ा और 13 में से आठ सीटों पर जीत हासिल कीं। एक बात और कहना चाहता हूं। दिल्ली में कांग्रेस तभी आगे बढ़ेगी, जब आप पार्टी पंजाब में पूरी तरह से साफ होगी। जब वहां उसकी सरकार नहीं रहेगी। तभी दिल्ली वालों को वि्श्वास दिला पाएंगे कि आप पार्टी भ्रष्ट पार्टी थी और अब उसमें कोई दम नहीं बचा है।

सवाल : भले ही आप 62 से 22 पर आ गई लेकिन कांग्रेस तो फिर भी ताकतवर नहीं हुई  ?

जवाब : हम लोग नई रणनीति पर काम कर रहे हैं। छह महीने में हम लोग पार्टी को मजबूत करने पर काम कर रहे हैं। हमारे कई सीनियर लीडर चुनाव से पहले पार्टी छोड़कर चले गए थे। अब दिल्ली का प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते मेरी कोशिश है कि संगठन को बेहतर करें। इसके लिए हम मासिक बैठकों से लेकर मंडलम जैसा कंसेप्ट शुरू कर रहे हैं। साथ ही जनता से जुड़े हर मुद्दे को हम उठा रहे हैं। मुझे उम्मीद है कि जल्द ही हमारा कैडर मजबूत होगा।

सवाल : लेकिन जनता के बीच में जनता के साथ संवाद उसकी क्या स्थिति है? आज की डेट में अगर आपके कोई रामलीला मैदान में बड़ी रैली करना चाहे तो क्या संभव है?

जवाब : जल्द ही हम रामलीला मैदान में अपनी स्ट्रेंथ दिखाएंगे।

सवाल : आप संगठन को मजबूत करने, संवाद की बात करते हैं लेकिन आपके नेता राहुल गांधी ही दिल्ली में जिस इलाके में संवाद के लिए जाते हैं। वहां न आपको और न ही बाकी स्थानीय नेताओं को बताते हैं। इससे मैसेज नहीं जाता कि वे अपने ही नेताओं को नजरंदाज कर रहे हैं।

जवाब : जैसा आप सोच रहे हैं, शुरु में हमे भी यही लगता था लेकिन ऐसा है नहीं। वे लोकल लीडरशिप को शामिल किए बिना ही जिस वर्ग को अपना मैसेज देना चाहते हैं ताकि सीधे संवाद हो। ताकि मुद्दा न भटके। जब राहुल गांधी किसी कुम्हार, मोची या नाई से मिलते हैं तो सीधे उसकी समस्याओं को समझते हैं।

सवाल : अब बीजेपी की बात। आप बीजेपी को झुग्गियां तोड़ने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे थे लेकिन मुख्यमंत्री ने तो साफ किया है कि वही झुग्गियां टूट रही हैं, जिन्हें तोड़ने के लिए कोर्ट का आदेश है।

जवाब : अगर ऐसा है तो फिर जब राहुल गांधी ऐसी तोड़फोड़ वाली जगह पर पहुंचे तो फिर उनकी ओर से क्यों ये बयान आता है कि दिल्ली में झुग्गियां नहीं टूटेंगी। अगर कोर्ट के आदेश से झुग्गियां टूट रही हैं तो वे किस अधिकार से ये तोड़फोड़ रोकेंगी ? सच्चाई ये है कि सरकार के वकील ही कोर्ट में सही बात नहीं रख रहे है। मुझे लगता है कि अगर ये ठोस नीति बनाकर कोर्ट जाएंगे तो कोर्ट भी इन लोगों के लिए मानवीय पक्ष को ध्यान में रखेगी।

सवाल : आपने शीला सरकार के 15 साल बाद दस साल अरविंद केजरीवाल की सरकार भी देखी और छह सात महीने की बीजेपी सरकार भी। दोनों में से कौन सी सरकार बेहतर काम करती नजर आयी ?

जवाब : बेहतर तो कांग्रेस ही है। दिल्ली वाले भी जानते हैं कि कांग्रेस सरकार में जनहित के कितने काम हुए। दिल्ली का बेहतरीन विकास हुआ। फॉरेस्ट एरिया बढ़ा। कांग्रेस ने गरीब आदमी के लिए योजनाएं तैयार कीं, उन्हें लागू किया।

सवाल : आप बीजेपी पर सवला उठा रहे हैं लेकिन कई लोगों का मानना है कि इस बार चुनाव में कांग्रेस ने ही बीजेपी की मदद की?

जवाब : देखिए, हम एक बेहतरीन चुनाव लड़े। कभी भी चुनाव में ऐसा नहीं लगा कि इस बार ये त्रिकोणीय लड़ाई नहीं है। पहली बार हमने प्लानिंग के साथ चुनाव लड़ा। हमारी लीडरशिप का भी सहयोग रहा। बहुत कम समय में हमने खड़गे जी, राहुल जी, प्रियंका जी समेत 35 बड़े नेताओं की सभाएं कीं। हमने तय किया था कि इस बार हारा हुआ चुनाव नहीं लड़ेंगे। इसका निश्चित ही बीजेपी को फायदा मिला, क्योंकि वोट का थोड़ा बंटवारा हुआ।

सवाल : आप दिल्ली मेट्रो के किराए बढ़ाने का विरोध कर रहे हैं। कांग्रेस की सरकार के वक्त भी तो मेट्रो के किराए बढ़े थे ?

जवाब : जी। लेकिन मैं उसको आपको करेक्ट करूंगा कि कांग्रेस के वक्त नॉमिनल बढ़ा था। जब एकदम से 91% बढ़ा था तो वो 2017 का साल था। जिस समय आम आदमी पार्टी की सरकार थी। और कहीं ना कहीं उसका नेगेटिव असर भी पड़ा। अगर पब्लिक ट्रांसपोर्ट महंगा होगा तो लोग प्राइवेट गाड़ियां चलाने लगेंगे। दिल्ली में यही स्थिति है। आप बसों की हालत देख लीजिए। सात महीने में 2200 बसें कम हो गईं।

सवाल : आप तो लंबे वक्त से राजनीति में है। जब सरकार बनती है तो कागजी कार्यवाही में वक्त लगता है। टेंडर प्रक्रिया होती है। इससे पहले कैबिनेट में फैसला लेना होता है। तो ऐसे में छह सात महीने के आधार पर ही कैसे सरकार के खराब या अच्छे की पहचान कर सकते हैं ?

जवाब : मैंने आपको कहा कि छ महीने हमने भी सोचा कि लेट देम लेट अस गिव देम टाइम। हम लेकिन आप जब सार्वजनिक मंचों पे जाते हैं तो आप बड़ी-बड़ी बातें करते हैं। आपने आप ही के जैसे एक इंटरव्यू में धड़ाके के साथ कह दिया कि इस बारिश आएगी तो पानी नहीं खड़ा होगा। हालत ये थी कि लोगों के स्कूल में घुस गया। मंत्रियों के घर में पानी घुस गया। थाने में घुस गया पानी। लोगों की कई जगह पर स्कूल की बिल्डिंग का दीवार गिरने से सात लोग मर गए। तो इस तरीके की घटनाएं हो रही हैं सरकार को थोड़ा सेंसिटिवली बात करनी चाहिए। पर्यावरण खराब हो गया। कुछ भी तो होता नहीं दिखा। उल्टा मेट्रो को महंगा कर दिया। आपने यूईआर शुरू किया तो वहां आपने दिल्ली वालों पर ही टोल टैक्स लगा दिया। जिन गांवो के लोगों की जमीन लेकर रोड बनाई, उन्हीं को टोल देने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

सवाल : अब राजनीति से हटकर कुछ बात। आप तो ठेठ दिल्ली वाले हैं। खानपान में क्या अच्छा लगता है ?

जवाब : देखिए मुझे हमेशा से घर का खाना पसंद रहा है। हमेशा से! हां, ये जरूर है कि चांदनी चौक की चाट मिल जाए। कहीं कचौड़ी मिल जाए, कहीं पूरियां मिल जाएं, छोले भटूरे मिल जाएं, जो दिल्ली की पहचान हैं। नटराज की टिक्की मिल जाए, नटराज के भल्ले मिल जाए, ओम जी के भटूरे मिल जाए। हमारे यहां पे एक लोकल जॉइंट है बंसल स्वीट्स। वो संडे को पूरी बनाता है। मेरी कोशिश रहती है कि एक पूरी तो जरूर खाई जाए।

सवाल : आप एक एनजीओ से भी तो जुड़े हुए हैं?

जवाब : मेरी एनजीओ मेरे दिल के करीब है। एक्चुअली और जो समाज की जो कमियां हैं हम उन पर काम करते हैं। एनजीओ का नाम नेशन फर्स्ट फाउंडेशन है। जैसा नाम है कोशिश यही है कि हमारा नेशन फर्स्ट रहे और नेशन के जो लोग रहने वाले हैं उनको हम कैसे फैसिलिटेट कर सकें। जन्मा था ये जो आईडिया था जरूर क्योंकि मेरा पर्टिकुलर एरिया जो है बादली विधानसभा अगर मैं बात करूं तो बहुत पिछड़ा हुआ था और पिछड़े का मतलब ये था कि हर तरीके से पिछड़ा था। गरीब लोग ज्यादा थे। उनको हर रोज की चाहे शादी ब्याह हो जी उसमें भी परेशानी होती थी। एनवायरमेंट बहुत खराब था।  हमारे यहां लैंडफील्ड साइट थी। जी तो कोशिश की कि एनवायरमेंट पर काम किया जाए। एनवायरमेंट में हमने पौधा रोपण पर काम शुरू किया। हमारे जिस साथी का जन्मदिन होता है तो उसके यहां पर पौधा देते हैं। इसी तरह गरीब लड़कियों की शादी के लिए जरुरत होती है तो हमने गरीब लड़कियों की शादी करने में मदद करनी शुरू कर दी। पढ़ने लिखने वाले बच्चों को प्रॉपर अभाव के चलते जो वो अचीव कर सकते थे उससे चूक जाते थे। उनकी मदद करते हैं। टॉपर्स को लैपटाप से लेकर स्कूटर तक की मदद करते हैं। हायर स्टडी करने वालों को स्कॉलरशिप देते हैं। इसके अलावा भी समाज के अन्य वर्गों की इस एनजीओ के जरिए सहायता करते हैं।

Gulshan Rai Khatri

gulshanraikhatri@gmail.com

गुलशन राय खत्री 35 वर्ष से अधिक समय से पत्रकारिता में हैं। दैनिक जागरण और जनसत्ता में रिपोर्टिंग के बाद नवभारत टाइम्स में लगभग 33 साल तक पत्रकारिता की। सिटी रिपोर्टिंग के अलावा नवभारत टाइम्स के नैशनल ब्यूरो में रहते हुए नैशनल बीजेपी, रेलवे, शहरी विकास, रोड ट्रांसपोर्ट जैसे कई मंत्रालयों की रिपोर्टिंग की। बाद में 6 साल नवभारत टाइम्स में मेट्रो एडिटर रहने के बाद रिटायर हुए। अब स्वतंत्र पत्रकारिता कर रहे हैं और न्यूजी इंडिया के लिए भी लिखते हैं।

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