नई दिल्ली: एआई आधारित मौसम पूर्वानुमान देश के किसानों तक पहुंच रहा है। इसकी मदद से किसान अच्छी खेती कर रहे हैं। गौरतलब है कि देश के करोड़ों किसानों की आय और आजीविका का मुख्य स्रोत खरीफ की खेती है लेकिन इसके लिए किसान वर्षा पर निर्भर हैं। मानसून के बारे में यदि किसानों को पहले से ही मौसम संबंधी पूर्व जानकारी मिल जाए तो उन्हें यह निर्णय लेने काफी मदद मिल सकती है कि कौन सी फसल, कितनी मात्रा में और कब बोनी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) द्वारा संचालित मौसम पूर्वानुमान में क्रांति के कारण अब यह संभव हो सका है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय (एमओएएफडब्ल्यू) किसानों के लिए एआई की शक्ति का उपयोग कर रहा है। एक अनूठी सार्वजनिक पहल के तहत मंत्रालय ने इस वर्ष 13 राज्यों के लगभग 3.8 करोड़ किसानों को एसएमएस (एम-किसान) के माध्यम से एआई-आधारित मानसून पूर्वानुमान भेजे। यह पूर्वानुमान बारिश से चार सप्ताह पहले तक कहीं उपलब्ध थे।
एआई-आधारित मॉडलों ने किसानों की ज़रूरतों के अनुसार विशेष रूप से पूर्वानुमान तैयार करना संभव बना दिया है जिससे किसानों को खरीफ फसल संबंधी निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण मिला। यह अब तक एआई मौसम पूर्वानुमानों का अपनी तरह का पहला लक्षित प्रसार है जिसने मंत्रालय को किसानों को सीधे लाभ पहुंचाने के लिए एआई मौसम पूर्वानुमान लागू करने में विश्व-अग्रणी के रूप में स्थापित किया है।
जोखिमों का प्रबंधन करने में मददगार
अपर सचिव डॉ. प्रमोद कुमार मेहरदा और संयुक्त सचिव संजय कुमार अग्रवाल ने कृषि भवन में आयोजित कार्यक्रम समीक्षा बैठक में नोबेल पुरस्कार विजेता और शिकागो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर माइकल क्रेमर के साथ मंत्रालय की इस अभूतपूर्व पहल और कार्यक्रम के विस्तार पर चर्चा की। डॉ. मेहरदा ने कहा कि यह कार्यक्रम निरंतर वर्षा की भविष्यवाणी करने के लिए एआई-आधारित मौसम पूर्वानुमान में क्रांति का उपयोग करता है, जिससे किसानों को अधिक आत्मविश्वास के साथ कृषि गतिविधियों की योजना बनाने और जोखिमों का प्रबंधन करने में मदद मिलती है। हम आने वाले वर्षों में इस प्रयास को और बेहतर बनाने की आशा करते हैं।
मानसून की रुकावट की हुई सटीक पहचान
इस वर्ष मानसून समय से पहले आ गया था लेकिन उत्तर की ओर बढ़ने में रुकावट आने से 20 दिनों तक बारिश रुकी रही। मंत्रालय ने एआई आधारित पूर्वानुमानों से मानसून की इस रुकावट की सटीक पहचान की। सरकार ने किसानों को हर हफ्ते अद्यतन जानकारी भेजी। अग्रवाल ने कहा कि जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम में परिवर्तनशीलता बढ़ रही है, इसलिए पूर्वानुमान किसानों को समय के साथ तारतम्य स्थापित करने में मदद करने का एक उपयोगी साधन हैं।
इसको भी पढ़ें: किसान ध्यान दें, मानसून एक्सप्रेस समय से चल रही है
मौसम पूर्वानुमान में एआई क्रांति
2022 से कृत्रिम बुद्धिमत्ता से प्रेरित क्रांति ने मौसम पूर्वानुमान के विज्ञान को पूरी तरह बदल दिया है और कई स्थितियों में अधिक सटीक पूर्वानुमान प्रदान किए हैं। इन मॉडलों को उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है और ये भारतीय मानसून जैसी जटिल घटनाओं का हफ्तों पहले पूर्वानुमान लगाने की क्षमता को और बढ़ा रहे हैं। मंत्रालय ने करोड़ों किसानों के हित के लिए इस क्रांति को लागू करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा इस्तेमाल किए गए पूर्वानुमान दो ओपन-एक्सेस मॉडलों गूगल के न्यूरल जीसीएम और ईसीएमडब्ल्यूएफ के आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस फोरकास्टिंग सिस्टम्स (एआईएफएस) के मिश्रण थे। कड़े विश्लेषणों में ये मॉडल किसानों के लिए स्थानीय स्तर पर मानसून की शुरुआत की भविष्यवाणी करने में अन्य उपलब्ध पूर्वानुमानों से स्पष्ट रूप से बेहतर साबित हुए।



