नई दिल्ली: बॉलीवुड में कोर्टरूम ड्रामा हमेशा से दर्शकों को बांधे रखते हैं, क्योंकि ये सिर्फ सस्पेंस नहीं, बल्कि समाज के गहरे मुद्दों को उकेरते है। आमतौर पर मसाला एक्शन या लव स्टोरी से अलग, ये फिल्में न्याय व्यवस्था, महिला सशक्तिकरण और मानवाधिकारों पर सवाल उठाती हैं। 19 सितंबर 2025 को रिलीज होने वाली Jolly LLB 3 के हाइप के बीच, अगर आप इस जॉनर के शौकीन हैं, तो OTT प्लेटफॉर्म्स पर पहले से मौजूद ये क्लासिक्स देखना न भूलें। ये न सिर्फ मनोरंजन देंगी, बल्कि वीकेंड को सोचने-समझने का मौका भी देंगी। आइए, इन चुनिंदा फिल्मों पर नजर डालें, जो आसानी से स्ट्रीम हो सकती है।
पिंक: सहमति का सशक्त संदेश
तापसी पन्नू, अमिताभ बच्चन और धृतिमान चक्रवर्ती की 2016 की ये फिल्म कोर्टरूम में महिलाओं की आवाज को बुलंद करती है। कहानी तीन लड़कियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक रात की घटना के बाद कानूनी जंग लड़ती हैं। बिग बी का रिटायर्ड वकील रोल यादगार है, जो “नो मीन्स नो” का मंत्र दोहराता है। ये फिल्म महिला अधिकारों पर बहस छेड़ने वाली बनी, जो आज भी रेलिवेंट है। जियो सिनेमा पर उपलब्ध, ये परफेक्ट स्टार्ट है आपके वॉचलिस्ट के लिए।
ऐतराज: झूठे आरोपों की कड़वी सच्चाई
अक्षय कुमार, करीना कपूर और प्रियंका चोपड़ा स्टारर 2004 की ये थ्रिलर एक सफल बिजनेसमैन की जिंदगी को उलट-पुलट देती है। जब उसकी एक्स-लवर, जो अब उसके बॉस की पत्नी है, यौन उत्पीड़न का झूठा इल्जाम लगाती है, तो पत्नी अदालत में उतर आती है। फिल्म पावर डायनामिक्स और जेंडर बायस पर तीखा प्रहार करती है, कोर्ट सीनज से भरपूर। ZEE5 पर स्ट्रीमिंग, ये पुरानी लेकिन ताजा लगने वाली मूवी है।
ओह माय गॉड: भगवान पर मुकदमा
परेश रावल और अक्षय कुमार की 2012 की सटीरिकल कॉमेडी एक नास्तिक दुकानदार की कहानी है, जो भूकंप में सब कुछ खोने पर खुदा पर केस ठोकता है। बीमा कंपनी ‘ईश्वरीय आपदा’ का बहाना बनाकर पैसे न देने पर कोर्ट में हंगामा मच जाता है। धर्म, अंधविश्वास और मानवता पर चुटकी लेती ये फिल्म हंसाती भी है और सोचने पर मजबूर करती है। जियो सिनेमा पर आसानी से मिल जाएगी।
सेक्शन 375: रेप लॉज का ग्रे एरिया
ऋचा चड्ढा और अक्षय खन्ना की 2019 की इंटेंस थ्रिलर IPC की धारा 375 पर फोकस करती है, जो रेप की परिभाषा तय करती है। एक फिल्म डायरेक्टर पर लगे आरोपों की जंग में प्रॉसिक्यूटर और डिफेंस लॉयर आमने-सामने होते हैं। फिल्म कानून के दुरुपयोग और नैतिक दुविधाओं को बेबाकी से उजागर करती है, दर्शकों को न्याय की सीमाओं पर सवाल करने को विवश कर देती है। अमेजन प्राइम वीडियो पर उपलब्ध।
शाहिद: मानवाधिकार वकील की बायोपिक
राजकुमार राव की 2013 की परफॉर्मेंस से सजी ये फिल्म रियल-लाइफ ह्यूमन राइट्स लॉयर शाहिद आजमी की जिंदगी पर बेस्ड है। मुंबई दंगों के बाद आतंकी संगठन से जुड़ने वाले शाहिद का सफर, जो गलत फंसाए गए मुसलमानों का केस लड़ते हैं, इमोशनल रोलरकोस्टर है। ये फिल्म सिस्टम की बायस्डनेस दिखाती है। अमेजन प्राइम वीडियो पर देखें।
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वीकेंड प्लान: इन फिल्मों से लें कोर्टरूम का मजा
ये फिल्में न सिर्फ जॉली एलएलबी 3 के लिए वार्म-अप हैं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर गहन बहस भी छेड़ती हैं। पॉपकॉर्न पकड़ें, लाइट्स डिम करें और इन थ्रिलर्स में खो जाएं, आपका वीकेंड दोगुना स्पाइसी हो जाएगा।



