हरेक लैब, नवाचार और कोलैबोरेशन का विकसित भारत के विजन में योगदान : अनुप्रिया पटेल

भारत स्वास्थ्य अनुसंधान और नवाचार के क्षेत्र में लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है और विश्व स्तर पर नए मानक स्थापित कर रहा है।अनुप्रिया पटेल ने DHR, ICMR और VRDL नेटवर्क की सराहना करते हुए कहा कि ये संस्थान समाज की सेवा में स्वास्थ्य अनुसंधान को नई दिशा दे रहे हैं।

Share This Article:

नई दिल्ली: प्रत्येक प्रयोगशाला, प्रत्येक नवाचार, प्रत्येक सहयोग विकसित भारत के विजन में योगदान देता है। यह बात केंदीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने नेशनल वायरस रिसर्च एंड डायग्नोस्टिक लेबोरेटरी (वीआरडीएल) कॉन्क्लेव-2025 के उद्घाटन के दौरान कही। इस अवसर पर स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (डीएचआर) के सचिव एवं आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल और भारत के औषधि महानियंत्रक डॉ. राजीव सिंह रघुवंशी भी उपस्थित थे।

दिल्ली में आयोजित दो दिवसीय सम्मेलन में देश भर की 165 वीआरडीएल के वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए पटेल ने कहा कि हमारी वीआरडीएल कोविड-19 महामारी के दौरान और उसके बाद भी देश की रक्षा में प्रहरी की तरह काम कर रही हैं। उन्होंने वायरस का अनुक्रमण करने और लगभग 1,700 नैदानिक उत्पादों को मान्य करने में इन प्रयोगशालाओं की महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।

मंत्री पटेल ने बताया कि इनमें से सोलह वीआरडीएल अब उच्च जोखिम वाले रोगाणुओं का अध्ययन करने के लिए जैव-सुरक्षा स्तर-3 सुविधाओं से लैस हैं। उन्होंने कहा कि वीआरडीएल निपाह, जीका और क्यासनूर फॉरेस्ट डिजीज के प्रकोप का शीघ्र पता लगाने में अहम भूमिका निभा रही हैं।

आईवीडी प्रमाणन पोर्टल और प्रोटोकॉल जारी

केंद्रीय मंत्री ने इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स (आईवीडी) प्रमाणन पोर्टल और प्रोटोकॉल भी जारी किए। साथ ही विश्वास व्यक्त किया कि आज लॉन्च किया गया नया आईवीडी प्रमाणन पोर्टल तेज, अधिक पारदर्शी और उद्योग के अनुकूल प्रमाणन प्रक्रियाओं को सुविधाजनक बनाएगा।

साक्ष्य-आधारित नीति-निर्माण का सुदृढ़ीकरण करने के एक हिस्से के रूप में, श्रीमती पटेल ने पहला वीआरडीएल बुलेटिन जारी किया। उन्होंने कहा कि “यह वायरल संक्रमणों की वास्तविक समय में निगरानी करने में सक्षम बनाएगा जिससे राज्य एवं केंद्र सरकारों द्वारा संसाधनों का बेहतर आवंटन किया जा सकेगा।”

केंद्रीय मंत्री ने रोग का पता लगाने और प्रयोगशाला उत्कृष्टता में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए निम्नलिखित 25 शीर्ष प्रदर्शन करने वाले वीआरडीएल को पुरस्कृत किया।

गोल्ड कैटेगरी

गवर्नमेंट मोहन कुमारमंगलम मेडिकल कॉलेज, सेलम, तमिलनाडु

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, छत्रपति संभाजीनगर, महाराष्ट्र

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, अमृतसर, पंजाब

आईसीएमआर-राजेंद्र मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, पटना, बिहार

सवाई मान सिंह मेडिकल कॉलेज, जयपुर, राजस्थान

गौहाटी मेडिकल कॉलेज, गुवाहाटी, असम

जवाहरलाल इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्टग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, पुडुचेरी

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भोपाल, मध्य प्रदेश

सिल्वर कैटेगरी

डॉ. वैशम्पायन मेमोरियल गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, सोलापुर, महाराष्ट्र

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नागपुर, महाराष्ट्र

कस्तूरबा हॉस्पिटल फॉर इंफेक्शियस डिजीज, मुंबई, महाराष्ट्र

इंस्टीट्यूट ऑफ पोस्ट ग्रेजुएट मेडिकल एजुकेशन एंड रिसर्च, कोलकाता, पश्चिम बंगाल

ज़ोरम मेडिकल कॉलेज, ज़ोरम, मिजोरम

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, सूरत, गुजरात

गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज, मिराज, महाराष्ट्र

सेठ गोर्धनदास सुंदरदास (जी.एस.) मेडिकल कॉलेज एंड किंग एडवर्ड मेमोरियल (केईएम) अस्पताल, मुंबई, महाराष्ट्र

डॉ. राम मनोहर लोहिया हॉस्पिटल एंड अटल बिहारी वाजपेयी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली

मदुरै मेडिकल कॉलेज, मदुरै, तमिलनाडु

तिरुनेलवेली मेडिकल कॉलेज, तिरुनेलवेली, तमिलनाडु

आर्म्ड फोर्सेज मेडिकल कॉलेज, पुणे महाराष्ट्र

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, भुवनेश्वर, ओडिशा

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी, लखनऊ, उत्तर प्रदेश

किंग इंस्टीट्यूट ऑफ प्रिवेंटिव मेडिसिन एंड रिसर्च, चेन्नई, तमिलनाडु

आईसीएमआर-क्षेत्रीय चिकित्सा अनुसंधान केंद्र, डिब्रूगढ़, असम

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, नई दिल्ली

क्या है वीआरडीएल बुलेटिन

 त्रैमासिक वीआरडीएल बुलेटिन देश भर में रोगजनकों के रुझानों, उनके सीजनल पैटर्न और प्रकोप के डायनैमिक्स को व्यवस्थित रूप से ट्रैक करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह नीति-निर्माताओं और स्वास्थ्य अधिकारियों के लिए संक्रमण के पैटर्न को समझने, मौसमी वृद्धि (सीजनल सर्ज) का अनुमान लगाने और स्वास्थ्य सेवा संसाधनों के लक्षित और कुशल आवंटन को सक्षम करने के लिए एक महत्वपूर्ण उपकरण के रूप में कार्य करता है। 

प्रोटोकॉल के बारे में

आईसीएमआर और सीडीएससीओ ने इन-विट्रो डायग्नोस्टिक्स (आईवीडी) के लिए मानकीकृत विश्लेषणात्मक और नैदानिक प्रमाणन प्रोटोकॉल विकसित किए हैं। पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित करने के लिए, एक नया प्रमाणन पोर्टल बनाया  गया है, जिससे निर्माता प्रमाणन के लिए आवेदन कर सकते हैं और वास्तविक समय में अपने आवेदनों की स्थिति को ट्रैक कर सकते हैं। सीडीएससीओ की वेबसाइट पर प्रकाशित होने के बाद, इन प्रोटोकॉल के वैश्विक मानक बनने की उम्मीद है, जिससे भारत के नैदानिक मानकों में विश्वास बढ़ेगा।

Sanjay Rai

sanjayrai.dj@gmail.com

संजय राय ने बीते 25 साल के प्रोफेशनल कैरियर में स्वास्थ्य, अपराध, शिक्षा, विकास समेत सभी बीट की कवरेज की है। दिल्ली सरकार, विधानसभा की कार्यवाही, भाजपा, कांग्रेस, आप सरीखे राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक-सांस्कृतिक व आंदोलनात्मक गतिविधियों को भी कवर किया है। कई सत्रों में संसद की कार्यवाही पर भी कलम चलाई है। फिलवक्त NewG India में बतौर सीनियर स्पेशल काॅरेस्पोंडेंट अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

https://x.com/DjSanjayrai

2 thoughts on “हरेक लैब, नवाचार और कोलैबोरेशन का विकसित भारत के विजन में योगदान : अनुप्रिया पटेल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

न्यूज़लेटर के लिए सब्सक्राइब करें

कैटेगरीज़

हम वह खबरची हैं, जो खबरों के साथ खबरों की भी खबर रखते हैं। हम NewG हैं, जहां खबर बिना शोरगुल के है। यहां news, without noise लिखी-कही जाती है। विचार हममें भरपूर है, लेकिन विचारधारा से कोई खास इत्तेफाक नहीं। बात हम वही करते हैं, जो सही है। जो सत्य से परामुख है, वह हमें स्वीकार नहीं। यही हमारा अनुशासन है, साधन और साध्य भी। अंगद पांव इसी पर जमा रखे हैं। डिगना एकदम भी गवारा नहीं। ब्रीफ में यही हमारा about us है।

©2025 NewG India. All rights reserved.