नई दिल्ली: IASV Triveni में दुनिया का चक्कर लगा पानी पर इतिहास रचने निकली सेना की 10 महिला अधिकारी। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को मुंबई के गेटवे ऑफ इंडिया से ‘समुद्र प्रदक्षिणा’ को वर्चुअली हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह एक ऐतिहासिक और पहली त्रि-सेवा (थलसेना, नौसेना और वायुसेना) की सभी महिला अधिकारियों की परिक्रमा नौकायन अभियान है।
नौ महीने तक दुनिया की समुद्री यात्रा करेंगी
इस अभियान में थलसेना, नौसेना और वायुसेना की 10 महिला अधिकारी स्वदेशी निर्मित इंडियन आर्मी सेलिंग वेसल (IASV) त्रिवेणी पर सवार होकर नौ महीने तक पूरी दुनिया की समुद्री यात्रा करेंगी। वे 26,000 से अधिक नौटिकल मील की दूरी तय करेंगी और इस दौरान खतरनाक समुद्री रास्तों, बर्फीली हवाओं और अप्रत्याशित तूफानों का सामना करेंगी। 50 फुट लंबी यह नौका त्रिवेणी पुदुच्चेरी में स्वदेशी तौर पर बनाई गई है।
सभी बड़े महासागरों में नौकायन करेगा
मुंबई से रवाना हुआ यह दल दो बार भूमध्य रेखा (Equator) को पार करेगा। दुनिया के तीन प्रमुख केप (केप लीविन, केप हॉर्न और केप ऑफ गुड होप) से गुजरेगा और सभी बड़े महासागरों में नौकायन करेगा। इनमें दक्षिणी महासागर और ड्रेक पैसेज भी शामिल हैं। अभियान दल फ्रीमैन्टल (ऑस्ट्रेलिया), लिटलटन (न्यूजीलैंड), ब्यूनस आयर्स (अर्जेंटीना) और केपटाउन (दक्षिण अफ्रीका) में चार बंदरगाहों पर रुकेगा और मई 2026 में मुंबई लौटने का कार्यक्रम है।
अनुशासन व इच्छाशक्ति की यात्रा
डिफेंस मिनिस्टर राजनाथ सिंह ने कहा कि यह यात्रा “नारी शक्ति, सामूहिक शक्ति, तीनों सेनाओं की एकता और संयुक्तता, आत्मनिर्भर भारत, सैन्य कूटनीति और भारत की वैश्विक दृष्टि का उज्ज्वल प्रतीक है।” यह अभियान केवल एक जहाज़ पर की जाने वाली यात्रा नहीं है, बल्कि “एक आध्यात्मिक साधना और अनुशासन व इच्छाशक्ति की यात्रा” भी है। उन्होंने कहा कि इस अभियान के दौरान हमारी अधिकारी अनेक चुनौतियों का सामना कर सकती हैं, लेकिन उनके संकल्प की ज्योति अंधकार को चीर देगी। वे सुरक्षित रूप से घर लौटेंगी और दुनिया को दिखाएंगी कि भारतीय महिलाओं का पराक्रम किसी भी सीमा से परे है।
जुड़ेगा स्वर्णिम अध्याय
उन्होंने भारतीय नौसेना की दो महिला अधिकारियों लेफ्टिनेंट कमांडर दिलना के और लेफ्टिनेंट कमांडर रूपा ए की ऐतिहासिक उपलब्धि को याद किया। दोनों अधिकारियों, जिन्होंने इस वर्ष मई में इंडियन नेवल सेलिंग वेसल (INSV) तरिणी पर डबल-हैंडेड मोड में पूरी दुनिया की परिक्रमा की थी। उन्होंने यह यात्रा बिना किसी बाहरी सहायता के और केवल पवन-शक्ति पर निर्भर रहते हुए पूरी की थी तथा साहस और समर्पण से अनेक चुनौतियों को पार किया था। सिंह ने कहा कि IASV त्रिवेणी समुद्री रोमांच में एक और वैश्विक मानक स्थापित करेगी और भारत की समुद्री यात्रा में एक और स्वर्णिम अध्याय जोड़ेगी। त्रि-सेवा अभियान को तीनों सेनाओं की संयुक्तता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का उज्ज्वल उदाहरण बताते हुए सिंह ने कहा कि हम मानते हैं कि जब सशस्त्र बलों में संयुक्तता की भावना होती है, तो सबसे बड़ी चुनौती भी छोटी लगने लगती है।
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दल में ये अधिकारी हैं शामिल
10 सदस्यीय दल में अभियान की नेता लेफ्टिनेंट कर्नल अनुजा वरुडकर, डिप्टी अभियान नेता स्क्वाड्रन लीडर श्रद्धा पी राजू, मेजर करमजीत कौर, मेजर ओमिता दलवी, कैप्टन प्राजक्ता पी निकम, कैप्टन दौली बुटोला, लेफ्टिनेंट कमांडर प्रियंका गुसाईं, विंग कमांडर विभा सिंह, स्क्वाड्रन लीडर अरुवि जयदेव और स्क्वाड्रन लीडर वैशाली भंडारी शामिल हैं। तीन साल का लिया है कठिन प्रशिक्षण दल ने तीन वर्षों का कठोर प्रशिक्षण लिया है, जिसकी शुरुआत छोटे ऑफशोर अभियानों से हुई थी जो क्लास बी नौकाओं पर किए गए और धीरे-धीरे अक्टूबर 2024 में अधिग्रहीत क्लास ए नौका IASV त्रिवेणी तक पहुँचा। अभियान के दौरान दल नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ ओशनोग्राफी के साथ मिलकर वैज्ञानिक शोध भी करेगा, जिसमें माइक्रो-प्लास्टिक का अध्ययन, समुद्री जीवन का प्रलेखन और समुद्री स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना शामिल है।



