नई दिल्ली: सितंबर को PCOS अवेयरनेस मंथ के रूप में मनाया जाता है, और इसी दौरान विशेषज्ञों ने महिलाओं में पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) के बढ़ते मामलों को लेकर चिंता जताई है। डॉक्टरों के मुताबिक, इस समस्या के प्रति जागरूकता की कमी और सामाजिक कलंक के कारण अधिकतर महिलाएं समय पर सही इलाज नहीं करा पातीं, जिससे यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है।
भारत में बढ़ता PCOS
वैश्विक स्तर पर, 6% से 26% महिलाओं को PCOS की समस्या होती है। साथ ही भारत में लगभग हर 5 में से 1 युवा महिला इस का शिकार होती है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि लगभग 70% मामले डायग्नोज़ ही नहीं हो पाते, जिसकी वजह है जागरूकता की कमी और समय पर इसकी जांच न कराना।
क्या होता हैं PCOS?
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) एक हार्मोनल डिसऑर्डर होता है, जो महिलाओं की प्रजनन क्षमता और सम्पूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित करता है। इस स्थिति में महिलाओं के शरीर में एंड्रोजन यानी पुरुष हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है, जिससे ओवरी में सिस्ट बनने लगते हैं।
PCOS के आम लक्षण
डॉक्टरों के अनुसार, PCOS की पहचान जल्दी करने के लिए हमे इसके लक्षणों पर ध्यान देना बहुत जरूरी है। इसके मुख्य लक्षण हैं:
- अनियमित पीरियड्स का होना।
- अचानक वजन का बढ़ना।
- चेहरे और शरीर पर अनचाहे बाल।
- अत्यधिक मुंहासे और तैलीय त्वचा।
- बालों का अत्यधिक झड़ना या पतले होना।
- प्रजनन क्षमता में कमी।
समय पर इलाज क्यों है जरूरी
डॉक्टरों का कहना है कि समय पर इलाज न होने पर PCOS के कारण कई गंभीर समस्याएं हो सकती हैं, जैसे:
- बांझपन (Infertility)
- इंसुलिन रेजिस्टेंस और टाइप 2 डायबिटीज़।
- हार्ट डिजीज़ का खतरा बढ़ सकता हैं।
- एंडोमेट्रियल कैंसर की संभावना भी हो सकती हैं।
समय पर इस बीमारी की जाच करना अति आवशयक हैं। PCOS की समय पर जांच और सही उपचार से इन जटिलताओं से आसानी से बचा जा सकता है।
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डॉक्टरों की सलाह
विशेषज्ञों ने महिलाओं को PCOS से बचाव और इसके प्रबंधन के लिए निम्नलिखित सुझाव दिए हैं:
जल्दी जांच कराएं: डॉक्टरों का कहना हैं की अगर PCOS से जुड़े किसी भी प्रकार का लक्षण दिखाई दे तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और इसका समय रहते सही उपचार करा ले ताकि भविष्य में कोई गंभीर समस्या उत्पन्न न हो।
स्वस्थ जीवनशैली: सेहत पर सबसे ज्यादा प्रभाव हमारे खान पान की आदतों से पढता हैं। इसलिए नियमित व्यायाम और संतुलित आहार का सेवन करने पर भी गौर करना चाहिए।
तनाव नियंत्रित: विशेषज्ञों के अनुसार तनाव PCOS का एक मुख्य कारण हैं जिसके कारण स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पढ़ता हैं। इससे निपटने के लिए योग, ध्यान और मेडिटेशन को दिनचर्या में जरुर शामिल करें।
वजन नियंत्रण: मोटापा PCOS की समस्या को और अधिक बढ़ा सकता है। इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखे की शरीर का वजन कंट्रोल में रहे।
निष्कर्ष
भारत में PCOS के मामलों में तेजी से बढ़ोतरी एक चिंता का विषय बना हुआ है। डॉक्टरों का कहना है कि समय पर जांच, स्वस्थ आहार, नियमित व्यायाम और जीवनशैली में सुधार करके इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। जागरूकता ही PCOS से बचाव का एक अहम उपाय है।




