नई दिल्ली: अमेरिका से व्यापारिक रिश्ते में टैरिफ की गांठ पड़ने के बाद भारत दूसरे के साथ अपने संबंध को प्रगाढ़ करने में जुटा है। इससे न केवल देश के उद्यमियों की निर्भरता अमेरिका से कम होगी बल्कि ट्रंप को कड़ा संदेश भी मिल रहा है। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारत-यूएई व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) को और मजबूत करने के उद्देश्य से संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) के विदेश व्यापार मंत्री महामहिम डॉ. थानी बिन अहमद अल ज़ायौदी के साथ द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय आर्थिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में मिलकर काम करने के महत्व पर जोर दिया।
यल ने भारतीय अर्थव्यवस्था की सुदृढ़ता और अंतर्निहित शक्तियों पर प्रकाश डाला, जिसने इसे चुनौतीपूर्ण समय में भी आगे बढ़ने में सक्षम बनाया है। दोनों मंत्रियों ने पारस्परिक लाभ के लिए विविध साझेदारों के साथ काम करने के महत्व पर सहमति व्यक्त की। इस बैठक में 2030 तक गैर-तेल, गैर-कीमती धातुओं के व्यापार को 100 अरब अमेरिकी डॉलर तक पहुंचाने के द्विपक्षीय व्यापार के साझा दृष्टिकोण की पुष्टि की गई।
इन क्षेत्रों में दोनों देश करेंगे सहयोग
इस बैठक में नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल अवसंरचना, आपूर्ति श्रृंखला रिज़िल्यन्स और स्वास्थ्य सेवा जैसे उभरते क्षेत्रों में सहयोग पर भी चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने सीईपीए के अंतर्गत बेहतर निगरानी के लिए समय पर व्यापार डेटा के आदान-प्रदान की आवश्यकता पर जोर दिया और इस बात पर सहमति व्यक्त की कि सेवाओं पर उप-समिति की बैठक दो महीने के भीतर की जाएगी। भारतीय पक्ष ने अमीरात औषधि प्रतिष्ठान के गठन और भारतीय दवा कंपनियों की समस्याओं को दूर करने में इसकी भूमिका का स्वागत किया। बाजार पहुंच और विनियामक मुद्दों पर दोनों मंत्रियों ने सीईपीए संयुक्त समिति में शीघ्र समाधान के लिए मामलों को उठाने पर सहमति व्यक्त की।
यूएई इन क्षेत्रों में कर रहा निवेश
गोयल ने भारत के बुनियादी ढांचे, लॉजिस्टिक्स और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्रों में संयुक्त अरब अमीरात के बढ़ते निवेश का स्वागत किया। दोनों देशों के मंत्रियों ने व्यापार सुगमता के सहायक के रूप में यूएई में स्थानीय मुद्रा निपटान प्रणाली (आईएनआर-एईडी) और भारत मार्ट जैसी पहलों के महत्व का उल्लेख किया। बैठक में भारत-यूएई साझेदारी को 21वीं सदी के एक निर्णायक एलायंस के रूप में रेखांकित किया गया जो नवाचार, स्थिरता और साझी समृद्धि पर आधारित है।
फार्मा सेक्टर पर क्या हुई बात
फार्मा क्षेत्र में उभरती भू-राजनीतिक चुनौतियों के मद्देनजर प्रमुख मुद्दों पर भी चर्चा की गई। दोनों पक्षों ने फार्मास्यूटिकल्स एवं स्वास्थ्य सेवा उत्पादों के व्यापार को और सुगम बनाने के तरीकों पर विचार साझा किए। यूएई पक्ष ने पंजीकरण प्रक्रियाओं और विनियामक सुविधा में तेजी लाने पर सकारात्मक दृष्टिकोण व्यक्त किया, जबकि भारतीय पक्ष ने यूएई अधिकारियों द्वारा निरीक्षण और लेखा परीक्षा के प्रति स्वीकार्यता और तत्परता पर प्रकाश डाला।
गल्फ फूड में दिखेंगे भारतीय व्यंजन
खाद्य क्षेत्र में एपीडा ने खाद्य और कृषि प्रौद्योगिकी स्टार्टअप्स को बढ़ावा देने के लिए भारती योजना शुरू की है, जिसके तहत 100 से ज्यादा कंपनियों को ब्रांड बनाने, उनका विस्तार करने और बिजनेस-टू-बिजनेस गठजोड़ बनाने में मदद मिलेगी। एपीडा ने दुबई में होने वाले गल्फ फ़ूड के 2026 संस्करण में भारत को भागीदार देश बनाने के लिए डीडब्ल्यूटीसी के साथ एक समझौता ज्ञापन पर भी हस्ताक्षर किए। यूएई पक्ष ने भारतीय खाद्य एवं पेय उद्योग की समस्याओं का समाधान किया, जिसमें उच्च खुदरा मूल्य, मूल्य मानदंड और चावल की खेपों के लिए आवश्यक परीक्षण से संबंधित मुद्दे शामिल थे।
दक्षिणी राज्यों में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं की समीक्षा
उधर, उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव अमरदीप सिंह भाटिया ने कर्नाटक, केरल और तेलंगाना राज्यों में मेगा इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं को प्रभावित करने वाले प्रमुख मुद्दों की समीक्षा की। इसमें परियोजना निगरानी समूह (पीएमजी) द्वारा सुगम अंतर-मंत्रालयी और राज्यों के बीच समन्वय को बढ़ाकर समस्याओं के समाधान में तेजी लाने पर ध्यान केंद्रित किया गया। कर्नाटक में 3,658 करोड़ रुपये की कुल परियोजना लागत वाली 5 महत्वपूर्ण परियोजनाओं से संबंधित 5 मुद्दों की समीक्षा की गई। केरल में 5,002 करोड़ रुपये की लागत वाली 2 परियोजनाओं से संबंधित 2 मुद्दों की पड़ताल की गई, जबकि तेलंगाना में 1,934 करोड़ रुपये की कुल लागत वाली 3 परियोजनाओं से संबंधित 6 मुद्दों पर चर्चा की गई।



