नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली एक बार फिर बाढ़ की दहलीज पर खड़ी है। पहाड़ी राज्यों में हो रही मूसलाधार बारिश और हरियाणा के हथिनीकुंड बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने के बाद यमुना (Yamuna) नदी ने अपना रौद्र रूप धारण कर लिया है। यमुना का जलस्तर लगातार खतरे के निशान को पार कर रहा है, जिससे दिल्ली, नोएडा और गाजियाबाद के निचले इलाकों में बाढ़ का अलर्ट जारी कर दिया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने आज शाम 5 बजे से पुराने यमुना पुल, जिसे ‘लोहा पुल’ भी कहा जाता है, पर ट्रैफिक और लोगों की आवाजाही को पूरी तरह से बंद करने का फैसला किया है।
खतरे के निशान से कितना ऊपर है यमुना का जलस्तर?
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, यमुना का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
- दोपहर 12 बजे: पुराने रेलवे पुल पर जलस्तर 205.90 मीटर दर्ज किया गया।
- सुबह 8 बजे: जलस्तर 205.80 मीटर था।
- सुबह 6 बजे: जलस्तर 205.68 मीटर पर था।
यमुना में खतरे का निशान 205.33 मीटर है। शाहदरा के जिला मजिस्ट्रेट ने चेतावनी दी है कि जलस्तर 206.50 मीटर को भी पार कर सकता है, जिससे हालात और बिगड़ सकते हैं।
क्यों बढ़ रहा है यमुना का जलस्तर? हथिनीकुंड बैराज बना वजह
यमुना के इस बढ़े हुए जलस्तर का सीधा कारण हथिनीकुंड बैराज से छोड़ा गया पानी है। सोमवार को अलग-अलग समय पर 3 लाख क्यूसेक से भी ज्यादा पानी छोड़ा गया, जो अब दिल्ली पहुंच रहा है। मंगलवार सुबह भी लाखों क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे नदी का बहाव तेज हो गया है।
- हथिनीकुंड बैराज से सुबह 8 बजे: 1,76,307 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
- वजीराबाद बैराज से: 69,210 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
- ओखला बैराज से: 73,619 क्यूसेक पानी छोड़ा गया।
निचले इलाकों में हाहाकार, घरों में घुसा बाढ़ का पानी
यमुना का पानी अब दिल्ली के निचले इलाकों में घुसने लगा है। यमुना बाजार और मजनू का टीला जैसे क्षेत्रों में स्थिति सबसे खराब है। यमुना बाजार में कई घरों की पहली मंजिल तक पानी भर गया है, जिससे लोगों को अपना कीमती सामान छतों पर रखकर राहत शिविरों में जाना पड़ रहा है। मजनू का टीला इलाके के निवासी ग्वाल दास ने बताया, हम रातभर जागकर पानी के स्तर पर नजर रख रहे हैं। पुलिस हमें सतर्क रहने के लिए कह रही है। 2023 की बाढ़ का मंजर हमें अभी भी याद है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने आशंका जताई है कि जलस्तर 207 मीटर तक पहुंच सकता है, जो पिछले 47 वर्षों में तीसरा सबसे भयावह स्तर होगा। प्रशासन का कहना है कि वे किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं।
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क्या 2023 से सबक लेकर तैयार है दिल्ली सरकार?
पिछले साल जुलाई 2023 में जब हथिनीकुंड से 3.59 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया था, तब यमुना का जलस्तर रिकॉर्ड 208.66 मीटर* तक पहुंच गया था और ITO समेत पूरी दिल्ली हफ्तों तक जलमग्न रही थी। इस बार उस अनुभव से सीखते हुए सरकार ने कई कदम उठाए हैं:
- निचले इलाकों में लगातार मुनादी कराकर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।
- मयूर विहार, शास्त्री पार्क और ITO के पास कई राहत शिविर तैयार किए गए हैं।
- बाढ़ की स्थिति पर नजर रखने के लिए 14 निगरानी केंद्र बनाए गए हैं जो 24 घंटे काम कर रहे हैं।
- सभी संबंधित विभागों को संवेदनशील स्थानों पर कड़ी गश्त और निगरानी रखने का निर्देश दिया गया है।



