नई दिल्ली: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को अभी तक नया सरकारी बंगला आवंटित नहीं किया गया है। पद से इस्तीफा देने के बाद भी वह फिलहाल उपराष्ट्रपति के आधिकारिक आवास में ही रह रहे हैं। खबर है कि वह जल्द ही दक्षिण दिल्ली के छतरपुर एनक्लेव स्थित अपने निजी घर में चले जाएंगे।
गौरतलब है कि धनखड़ ने 21 जुलाई को स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया था।
सरकारी आवास की प्रक्रिया में देरी
नियमानुसार पात्रता – पूर्व राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को नियम के अनुसार टाइप-8 बंगला आवंटित किया जाता है। इसका प्रबंधन आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय करता है।
प्रक्रिया में समय- मंत्रालय के अधिकारियों ने धनखड़ से मुलाकात की है, लेकिन नए आवास पर चर्चा आगे नहीं बढ़ पाई है। सरकारी आवास आवंटन की प्रक्रिया में आमतौर पर कम से कम तीन महीने का समय लग जाता है, क्योंकि सीपीडब्ल्यूडी (CPWD) को बंगले में जरूरी मरम्मत और बदलाव करने होते हैं।
निजी घर में शिफ्ट– इस देरी के कारण, धनखड़ ने अंतरिम व्यवस्था के तौर पर अपने निजी आवास में जाने का फैसला किया है। उन्हें 9 सितंबर तक उपराष्ट्रपति आवास खाली करना होगा, क्योंकि उस दिन उपराष्ट्रपति पद का चुनाव होना है।
पेंशन की प्रक्रिया शुरू
उपराष्ट्रपति पेंशन– पूर्व उपराष्ट्रपति के रूप में उन्हें लगभग 2 लाख रुपये मासिक पेंशन मिलेगी।
सांसद पेंशन- झुंझुनू से सांसद (1989-91) रहने के नाते उन्हें 45,000 रुपये मासिक पेंशन मिलेगी।
विधायक पेंशन- उन्होंने राजस्थान विधानसभा सचिवालय में पूर्व विधायक पेंशन के लिए भी आवेदन किया है। वह 1993 से 1998 तक किशनगढ़ से विधायक थे। पहले उन्हें 35,000 रुपये मासिक पेंशन मिलती थी। 70 वर्ष से अधिक आयु होने के कारण पेंशन में 20% की वृद्धि होगी, जिससे यह लगभग 42,000 रुपये हो जाएगी।
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सरकारी बंगला क्यों
भारत में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री जैसे संवैधानिक पदों पर रहने वाले व्यक्तियों को उनके कार्यकाल के दौरान और बाद में भी सरकारी आवास मुहैया कराया जाता है। यह सुविधा उनके पद की गरिमा और सुरक्षा जरूरतों को ध्यान में रखते हुए दी जाती है।
उपराष्ट्रपति आवास– उपराष्ट्रपति का आधिकारिक निवास नई दिल्ली में मौलाना आज़ाद रोड पर है।
पूर्व उपराष्ट्रपति के लिए नियम– जब कोई उपराष्ट्रपति पद छोड़ता है, तो उसे नियमों के अनुसार टाइप-8 श्रेणी का सरकारी बंगला आवंटित किया जाता है। यह आवंटन शहरी विकास और आवास मंत्रालय के अधीन आता है।
जगदीप धनखड़ का मामला
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई को अपने पद से इस्तीफा दिया था। नियमानुसार, उन्हें तुरंत उपराष्ट्रपति का आधिकारिक निवास खाली करना चाहिए था ताकि अगले उपराष्ट्रपति के लिए जगह उपलब्ध हो सके। हालांकि, उन्हें अभी तक नया सरकारी बंगला नहीं मिला है।
प्रक्रिया में देरी
इस खबर का मुख्य पहलू यही है कि एक उच्च पद से हटने के बाद भी धनखड़ को नया आवास नहीं मिला। आमतौर पर, जब कोई व्यक्ति ऐसे पद से हटता है तो नए आवास के लिए प्रक्रिया पहले ही शुरू हो जाती है। लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं हुआ।
अंतरिम व्यवस्था
सरकारी प्रक्रिया में समय लगने की वजह से धनखड़ ने अपने निजी घर में रहने का फैसला किया है। यह कदम दिखाता है कि सरकारी आवास आवंटन की प्रक्रिया में कई बार बेवजह की देरी हो सकती है, जिससे उच्च पदों पर बैठे लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ सकती है।
इस प्रकार, पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ को अब तीनों पदों (उपराष्ट्रपति, सांसद और विधायक) से पेंशन और अन्य संबंधित सुविधाएँ मिलेंगी



