व्यापारिक हितों को आगे बढ़ाने में थिंक टैंक की भूमिका अहम

भारत के पूर्व मुख्य न्यायधीश डीवाई चंद्रचूड़ का मानना है कि देश की क्षमता विकास में वकीलों व थिंक टैकों की बड़ी भूमिका है। CTIL इसमें प्रमुख है।

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नई दिल्ली: वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल का मानना है कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार अनुसंधान केंद्र (CRIT) भारत के व्यापारिक हितों को आगे बढ़ाने में अहम जिम्मेदारियां निभा रहे हैं। यह टिप्पणी नई दिल्ली स्थित तीन मूर्ति भवन स्थित प्रधानमंत्री संग्रहालय एवं पुस्तकालय में आयोजित व्यापार एवं निवेश विधि केंद्र (CTIL) के 8वें वर्षगांठ समारोह में की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि सुनील बर्थवाल ने जोर दिया कि इन केंद्रों द्वारा किया जा रहा कार्य भारत के राष्ट्रीय हितों से गहराई से जुड़ा हुआ है। व्यापार वार्ताओं की गोपनीयता बनाए रखने के लिए इनकी स्थापना अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मज़बूत आंतरिक क्षमता के विकास में भी योगदान देगा।

वकीलों और थिंक टैंकों की भूमिका पर जोर

भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश और इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डी.वाई. चंद्रचूड़ ने राज्य की क्षमता विकास में वकीलों और थिंक टैंकों की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीटीआईएल की भूमिका व्यापार और निवेश कानून के क्षेत्र में आवश्यक विशेषज्ञता और कौशल लाकर सरकार की क्षमता को बढ़ाने में है। उन्होंने बताया कि कैसे क्षमता निर्माण की पहलों ने व्यापार वार्ताओं और समझौतों में परिणाम देने शुरू कर दिए हैं। ट्रेडलैब जैसे अनुभवात्मक शिक्षण कार्यक्रमों में सीटीआईएल के प्रयासों का उल्लेख किया और अन्य विधि विद्यालयों में इसके विस्तार की वकालत की।

प्रोफेसर जेम्स जे. नेदुम्परा ने केंद्रों की गतिविधियों और उन क्षेत्रों का उल्लेख किया जहां केंद्र ने वाणिज्य विभाग और विभिन्न मंत्रालयों की गतिविधियों में समय पर कानूनी जानकारी और विश्लेषण प्रदान करके योगदान दिया है जिनमें व्यापार वार्ता, विधायी प्रारूपण, नियम निर्माण और विवाद समाधान शामिल हैं। उन्होंने सीटीआईएल द्वारा अपनी स्थापना के बाद से की गई विभिन्न शैक्षणिक और सहयोगात्मक गतिविधियों का भी उल्लेख किया।

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान के कुलपति डॉ. राकेश मोहन जोशी की उपस्थिति ने और समृद्ध बनाया, जिन्होंने कुलपति का संबोधन दिया। इस कार्यक्रम में भारत सरकार के वाणिज्य विभाग के विशेष सचिव श्री सत्य श्रीनिवास और भारत सरकार के अन्य वरिष्ठ अधिकारी, वकील और कानून के छात्र भी उपस्थित थे।

वार्षिक पत्रिका विमोचन हुआ 

आठवीं वर्षगांठ के अवसर पर सीटीआईएल ने दो प्रकाशनों का शुभारंभ किया। वार्षिक सीटीआईएल पत्रिका का विमोचन किया गया जिसका विषय था “अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक कानून की पुनर्कल्पना: सुधार, लचीलापन, पुनर्निर्माण” और लेक्सिसनेक्सिस द्वारा प्रकाशित “बेस्पोक संधियां या मानक मॉडल? – भारत के प्रमुख व्यापार भागीदारों के अंतर्राष्ट्रीय निवेश संधि प्रावधानों का एक अध्ययन” शीर्षक से एक पुस्तक।

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