भागलपुर: बिहार में भ्रष्टाचार के खिलाफ आर्थिक अपराध इकाई (EOU) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। इसी कड़ी में भागलपुर के निबंधन कार्यालय में पदस्थापित अवर निबंधक विनय सौरभ के ठिकानों पर छापेमारी कर करोड़ों की बेनामी संपत्ति का खुलासा किया गया है। यह कार्रवाई आय से अधिक संपत्ति के मामले में की गई है, जिसमें उनके पास से कई राज्यों में प्लॉट, फ्लैट और अन्य संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज मिले हैं।
छापेमारी का विवरण
EOU की दो टीमों ने सुबह 9 बजे एक साथ अवर निबंधक के कार्यालय और खंजरपुर स्थित अभिनव एनक्लेव अपार्टमेंट में उनके फ्लैट पर धावा बोला। छापेमारी के दौरान अवर निबंधक विनय सौरभ अकेले मौजूद थे। उन्होंने टीम को बताया कि उनका परिवार पूर्णिया में है। साढ़े छह घंटे तक चली इस छापेमारी में EOU को महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। डीएसपी राजन प्रसाद सिंह ने बताया कि टीम को सिलीगुड़ी में 7 प्लॉट और एक दुकान, पटना में एक प्लॉट, और सासाराम में उनके पैतृक गांव व शहर में फ्लैट और जमीन से संबंधित दस्तावेज मिले हैं। इसके अलावा, उनकी पत्नी के नाम से कुछ बीमा पॉलिसी के कागजात भी जब्त किए गए हैं।
जब्त की गई संपत्तियां और दस्तावेज
- संपत्ति: सिलीगुड़ी में 7 प्लॉट और 1 दुकान, पटना और सासाराम में भी फ्लैट और जमीन।
- वाहन: पूर्णिया स्थित आवास से 2.5 लाख रुपये, मारुति सुजुकी एक्स एलजी और मारुति सुजुकी 800 कार।
- दस्तावेज: बैंक खातों के दस्तावेज और पत्नी के नाम से बीमा पॉलिसी।
जांच टीम ने अवर निबंधक के बैंक खातों की भी छानबीन की है। हालांकि, टीम को जमीन के मूल दस्तावेज नहीं मिले हैं, जिससे यह आशंका है कि उन्होंने उन्हें किसी रिश्तेदार के घर छिपा रखा है।
EOU की टीम और स्थानीय सहयोग
EOU की टीम में कुल चार डीएसपी शामिल थे, जिनमें एक महिला डीएसपी भी थीं। इसके अलावा, छह इंस्पेक्टर, एक दारोगा और अन्य जवान भी मौजूद थे। छापेमारी के दौरान बरारी और जोगसर पुलिस के अधिकारी भी EOU की मदद के लिए तैनात थे। छापेमारी की खबर फैलते ही अपार्टमेंट के बाहर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई थी। दोपहर 3:30 बजे EOU की टीम अवर निबंधक के फ्लैट से बाहर निकली और जब्त किए गए सामान पर उनके हस्ताक्षर लिए। यह छापेमारी भागलपुर के अलावा पूर्णिया और सासाराम में भी की गई थी, जिससे इस मामले की जड़ें कई जगहों तक फैली होने का संकेत मिलता है।
- भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की नीति: बिहार सरकार ने सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता लाने और भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई है। इसी नीति के तहत EOU को भ्रष्ट अधिकारियों की पहचान करने और उन पर कार्रवाई करने के लिए विशेष अधिकार दिए गए हैं।
- आय से अधिक संपत्ति का मामला: यह कार्रवाई किसी विशेष शिकायत के आधार पर शुरू हुई हो सकती है, जिसमें अवर निबंधक विनय सौरभ के पास उनकी ज्ञात आय से कहीं अधिक संपत्ति होने की जानकारी मिली होगी। EOU इस तरह के मामलों में पहले खुफिया जानकारी इकट्ठा करती है और फिर सबूत मिलने पर छापेमारी करती है।
- राज्यव्यापी अभियान: यह छापेमारी केवल भागलपुर तक सीमित नहीं है, बल्कि जैसा कि खबर में बताया गया है, यह पूर्णिया और सासाराम तक भी फैली हुई थी। यह दर्शाता है कि EOU किसी एक अधिकारी पर नहीं, बल्कि भ्रष्टाचार के पूरे नेटवर्क पर काम कर रही है।
- जनता का समर्थन: छापेमारी की खबर फैलने पर अपार्टमेंट के बाहर लोगों की भीड़ का इकट्ठा होना यह दिखाता है कि जनता भी भ्रष्टाचार से परेशान है और इस तरह की कार्रवाई का समर्थन करती है।
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बिहार में भ्रष्टाचार विरोधी अभियान की गंभीरता को दर्शाती है, जहां अब सरकारी अधिकारियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है और आय से अधिक संपत्ति के मामलों में सख्त कार्रवाई की जा रही है।



