नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने इन योजनाओं के तहत देश के करोड़ों गरीब और जरूरतमंद लोगों को मुफ्त या रियायती दरों पर राशन देती है। हालांकि, लंबे समय से यह शिकायतें आ रही थीं कि बहुत से ऐसे लोग भी इन योजनाओं का लाभ उठा रहे हैं जो इसके पात्र नहीं हैं। इसलिए सरकार ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम (NFSA) के तहत मुफ्त खाद्यान्न योजना का लाभ ले रहे उन लाभार्थियों की पहचान की है जो इसके पात्र नहीं हैं। सरकार ने 1.17 करोड़ ऐसे राशन कार्ड धारकों की एक सूची राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजी है और उन्हें 30 सितंबर 2025 तक जमीनी स्तर पर सत्यापन कर इन अपात्र लोगों को बाहर करने का निर्देश दिया है।
कौन हैं अपात्र लाभार्थी
सरकार ने विभिन्न सरकारी एजेंसियों के डेटाबेस से जानकारी का मिलान करके यह सूची तैयार की है। इसमें इन श्रेणियों के लोग शामिल हैं
- आयकर दाता: 94.71 लाख राशन कार्ड धारक आयकर देते हैं।
- चार-पहिया वाहन मालिक: 17.51 लाख लोग चार-पहिया वाहन के मालिक हैं।
- कंपनी निदेशक: 5.31 लाख लोग कंपनियों में निदेशक हैं।
NFSA के नियमों के अनुसार, सरकारी कर्मचारी, ₹1 लाख या उससे अधिक की वार्षिक आय वाले परिवार, चार-पहिया वाहन मालिक और करदाता मुफ्त राशन के लिए पात्र नहीं हैं।
क्यों हटाया जा रहा है नाम
खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के अनुसार, यह कवायद इसलिए की जा रही है ताकि राशन का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुँच सके। अपात्र लोगों को हटाकर प्रतीक्षा सूची में शामिल योग्य और वंचित परिवारों को इस योजना में शामिल किया जाएगा।
केंद्रीय खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने 8 जुलाई 2025 को राज्यों को भेजे पत्र में इस कार्य को 30 सितंबर तक पूरा करने का आग्रह किया है ताकि सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता और दक्षता सुनिश्चित हो सके।
कैसे करें लिस्ट में नाम चेक
आप स्थानीय प्रखंड मुख्यालयों में जाकर अपनी स्थिति की जांच कर सकते हैं, क्योंकि वहां अपात्र लाभार्थियों की सूची उपलब्ध करा दी गई है। वर्तमान में, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के तहत राशन कार्ड धारकों को अनाज पूरी तरह से मुफ्त दिया जा रहा है। सरकार का यह कदम यह सुनिश्चित करेगा कि इस महत्वपूर्ण योजना का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिले जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत है।
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सरकार का उद्देश्य
सरकार का मकसद सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को और अधिक पारदर्शी और कुशल बनाना है। इसके लिए केंद्र सरकार ने पहली बार बड़े स्तर पर एक डेटा मिलान अभियान चलाया। उन्होंने विभिन्न सरकारी एजेंसियों जैसे आयकर विभाग, सड़क परिवहन मंत्रालय (MORTH), कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय (MCA) और प्रधानमंत्री किसान योजना (PM-KISAN) के डेटाबेस को आपस में जोड़ा। इस डेटा मिलान से उन्हें उन लोगों की पहचान करने में मदद मिली जो पात्रता मानदंडों को पूरा नहीं करते हैं, यह अभियान यह सुनिश्चित करने के लिए है कि सरकारी सब्सिडी का लाभ केवल उन्हीं लोगों को मिले जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। सरकार अब राज्यों को निर्देश दे रही है कि वे जमीनी स्तर पर इन सूचियों का सत्यापन करें और अपात्र लोगों को हटाकर उनकी जगह उन जरूरतमंदों को शामिल करें जो अभी भी प्रतीक्षा सूची में हैं।यह कार्रवाई पिछले वर्षों में 1.34 करोड़ “फर्जी/अपात्र” राशन कार्ड रद्द करने की एक बड़ी सरकारी पहल का ही हिस्सा है।



